घर बैठे खुशबू ने बदल दी किस्मत, लाखों की कमाई के साथ-साथ महिलाओं को दे रही ट्रेनिंग

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घर बैठे खुशबू ने बदल दी किस्मत, लाखों की कमाई के साथ-साथ महिलाओं को दे रही ट्रेनिंग 

Udaipur Times, khushboo Chaudhary Success Story: एक ओर जहां अधिकतर युवा सरकारी नौकरी या डॉक्टर-इंजीनियर बनने के सपनों के पीछे भागते हैं। वहीं आज हम आपको हरलाखी की खुशबू चौधरी की सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं। प्रतियोगिता के इस दौर में खुशबू ने अपने लिए एक अलग रास्ता चुना है। बीते लगभग 10 सालों से खुशबू मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में बनी हुई हैं और आज इस पारंपरिक कला के जरिए न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।

कला को बनाया अपनी आजीविका का माध्यम

खुशबू चौधरी ने साल 2016 में मिथिला पेंटिंग की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और उन्होंने इस कला को अपनी आजीविका का मजबूत माध्यम बना लिया। आज उनकी बनाई पेंटिंग और उससे जुड़े प्रोडक्ट देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचते हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उनकी बिक्री होती है, हालांकि स्थानीय और ऑफलाइन बाजार से उन्हें ज्यादा ऑर्डर मिलते हैं।

खुशबू बताती हैं कि उनका काम पूरे साल चलता रहता है। वह पहले से ही पेंटिंग प्रोडक्ट तैयार रखती हैं, जिन्हें शादी-विवाह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न आयोजनों में खूब पसंद किया जाता है। उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों में साड़ी, दुपट्टा, कुर्ता, सूट, चूड़ी, पाग और फोटो फ्रेमिंग जैसे कई कस्टमाइज्ड आइटम शामिल हैं।

एक महीने में 2 लाख से अधिक की आमदनी

आय के बारे में बात करते हुए वह बताती हैं कि उनकी कमाई निश्चित नहीं होती, लेकिन सीजन के समय एक महीने में 2 लाख रुपये से अधिक तक की आमदनी हो जाती है। सामान्य दिनों में भी अच्छी खासी आय हो जाती है, जिससे वह अपने परिवार को बेहतर तरीके से संभाल पा रही हैं।

मुफ्त में देती हैं मिथिला पेंटिंग की ट्रेनिंग

खुशबू चौधरी की खास बात यह है कि वह केवल खुद तक सीमित नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों से वह गांव और आसपास की लड़कियों और शादीशुदा महिलाओं को मुफ्त में मिथिला पेंटिंग की ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका छह महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को इस कला में दक्ष बनाकर उन्हें रोजगार से जोड़ने का काम करता है।

वह कहती हैं कि उनका उद्देश्य केवल कमाई करना नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे भी घर बैठे अपनी पहचान और आय का साधन बना सकें।

खुशबू चौधरी की यह कहानी दिखाती है कि अगर लगन और हुनर हो तो पारंपरिक कला भी आजीविका का मजबूत साधन बन सकती है और समाज में बदलाव की नई दिशा दे सकती है।

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