लाखों की नौकरी छोड़ गांव में लौटी खुशबू ने शुरू किया ये बिजनेस, ऐसे लिखी सफलता की कहानी

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लाखों की नौकरी छोड़ गांव में लौटी खुशबू ने शुरू किया ये बिजनेस, ऐसे लिखी सफलता की कहानी

Udaipur Times, Business Women Khusboo Patil Success Story : आम तौर पर लोग अपने जीवन की सफलता के लिए शहर की ओर रुख करते हैं। लेकिन आज हम एक महिला की सफलता की उस कहानी के बारें में बताने जा रहे हैं जो शहर में अपनी कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़कर गांव में वापस आकर सफलता की एक नई कहानी लिखी और बन गई सक्सेस बिजनेस वुमन।

ये कहानी है मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले की रहने वाली खुशबू पाटिल की। बेंगलुरु की कॉर्पोरेट लाइफ और शानदार नौकरी छोड़कर खुशबू ने गांव लौटने का फैसला किया और केला चिप्स मैन्युफैक्चरिंग का स्टार्टअप शुरू किया। आज उनका कारोबार देश के कई राज्यों तक पहुंच चुका है और वे गांव में रोजगार को बढ़ावा देने का काम भी कर रही हैं।

शतरंज (Chess) को खेल से बहुत कुछ सिखने को मिला 

 5 फरवरी 2000 को मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के छोटे से गांव बोरसर में जन्मी खुशबू पाटिल का किसान परिवार से आती हैं। खुशबू के पिता युवराज पाटिल पेशे से किसान हैं, बचपन से ही खुशबू ने खेती और किसानों के जीवन को बहुत करीब से देखा है।  खेत, मौसम, फसल, मंडी, कर्ज और संघर्ष हमेशा से ही उनके जीवन का हिस्सा रहे। बुरहानपुर के सेंट टेरेसा हायर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ीं खुशबू अन्य एक्टिविटी में भी आगे थीं।  करीब पांच साल तक शतरंज (Chess) खेलने के दौरान वे जिला एवं संभाग स्तर पर लगातार टॉप-3 में पायदान पर रहीं। बाद में फिर स्टेट लेवल तक भी चेस खेला।

तूफान ने बदल दिया जीवन  

 जब खुशबू ने साल 2017-18 में 12वीं की परीक्षा पास की, उसी दौरान तेज तूफान ने उनके परिवार के केले के बागानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। इस हादसे में परिवार को करीब 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ। पहले से कर्ज में डूबे परिवार पर यह बड़ा आर्थिक झटका था। खुशबू बड़े कॉलेज में पढ़ना चाहती थीं, लेकिन हालात ऐसे नहीं थे कि परिवार बाहर पढ़ाई का खर्च उठा सके। मजबूरी में उन्हें बुरहानपुर के ही कॉलेज में दाखिला लेना पड़ा। 

पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी की 

परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद खुशबू ने हार नहीं मानी। उन्होंने पढ़ाई के साथ नौकरी भी की। इसी दौरान उनके पिता मानसिक तनाव में रहने लगे, लेकिन उनकी मां अनीता पाटिल ने पूरे परिवार को संभाले रखा। खुशबू के मन में हमेशा यह सवाल उठता था कि सबसे ज्यादा मेहनत किसान करता है, फिर भी सबसे ज्यादा नुकसान उसी को क्यों झेलना पड़ता है। 

इंदौर से ट्रैवल मैनेजमेंट का कोर्स किया 

साल 2018 में खुशबू इंदौर चली गईं, जहां उन्होंने ट्रैवल मैनेजमेंट का कोर्स किया और छह महीने तक नौकरी भी की। इसी दौरान उन्होंने बुरहानपुर के सेवा सदन कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। शुरुआत से ही उनका झुकाव बिजनेस और क्रिएटिव कामों की तरफ था। उन्होंने “Khush Parlour Designing” नाम से छोटा बिजनेस भी शुरू किया, जिसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला।

MBA और कॉर्पोरेट दुनिया का अनुभव

इसके बाद खुशबू ने यूनिवर्सल बिजनेस स्कूल, कर्जत से MBA किया। यहां वे कॉलेज ओलंपिक्स में लगातार दो साल तक गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी नौकरी रिलायंस रिटेल हेडक्वार्टर, बेंगलुरु में Assistant Manager के रूप में लगी। उनका सालाना पैकेज करीब 7 लाख रुपये था। यहां उन्होंने Fashion & Lifestyle डिवीजन में काम करते हुए बिजनेस स्ट्रेटेजी, मार्केटिंग, सेल्स और ऑपरेशन जैसी चीजों को करीब से समझा।

किसानों के लिए कुछ अलग करने का फैसला

कॉर्पोरेट नौकरी के दौरान खुशबू काफी कुछ सीख रही थीं और अच्छी कमाई भी कर रही थीं, लेकिन गांव और किसानों की समस्याएं उन्हें लगातार याद आती थीं। उन्हें महसूस हुआ कि देश में उत्पादन की कमी नहीं है, बल्कि किसानों के स्तर पर वैल्यू एडिशन और ब्रांडिंग की कमी सबसे बड़ी समस्या है। यहीं से उन्होंने किसानों के लिए कुछ अलग करने का फैसला लिया।

गांव लौटकर केले के चिप्स का बिजनेस शुरू किया

जनवरी 2026 में खुशबू ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और गांव लौट आईं। उन्होंने “युवराज एंड अनीता पाटिल एंटरप्राइजेस” नाम से Banana Chips Manufacturing स्टार्टअप शुरू किया। यह नाम उन्होंने अपने माता-पिता के सम्मान में रखा। इस बिजनेस की शुरुआत में उन्होंने करीब 8 से 10 लाख रुपये निवेश किए। आज उनके साथ करीब 10 लोगों की टीम काम कर रही है।

सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ाया बिजनेस 

खुशबू ने कहा कि सोशल मीडिया इसके लिए सबसे अच्छा प्लेटफार्म है, मैंने उसी को अपनी ताकत बनाया।  अपनी कहानी और प्रोडक्ट्स को इंस्टाग्राम के जरिए पहुंचाना शुरू किया. धीरे-धीरे लोगों का रिस्पांस मिलने लगा। अब तक हमें मध्य प्रदेश ही नहीं झारखंड, कर्नाटक, गुजरात समेत कुछ अन्य जगह से ऑर्डर मिल चुके हैं। 

मैं चाहती हूं कि गांवों में ऐसे छोटे-छोटे बिजनेस बढ़ें, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिल सकेगा। मेरा सपना एक ऐसा मॉडल बनाने का है, जिससे किसान खुद के खेत के उत्पादन को ही उत्पाद (value-added products) बनाकर सीधे लोगों तक पहुंचा सके।

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