झीलों में गिर रहे गंदे नालो को तीन महीने की अवधि में बंद करने के प्रशासन के निश्चय को पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सकारात्मक कदम बताया है।
रविवार को आयोजित संवाद में झील प्रेमी डॉ अनिल मेहता, तेज शंकर पालीवाल तथा नन्द किशोर शर्मा ने इसका स्वागत करते हुए झीलो में घरेलू और होटलों के दैनिक कचरे के विसर्जन को रोकने का आग्रह किया है। आम जन की जागरूकता इसके लिए अत्यंत जरूरी है।
झील प्रेमियों ने घरों व् होटलो से झील में आ रहे विविध कचरे के साथ साथ बचे मांस की पोटलियों, सेनेट्री पेड, कंडोम तथा दवाइयों व् अन्य केमिकल सामग्रियों के विसर्जन को झील पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया। इसको नियंत्रित करने के लिए सी सी टी वी कैमरों की स्थापना सहित जन जाग्रति के कार्यक्रम चलाने होंगे।
संवाद से पूर्व झील मित्र संस्थान, झील संरक्षण समिति एवं डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के सयुंक्त तत्वावधान में हुए श्रमदान में झील क्षेत्र से खाद्य सामग्री , शराब, मिनरल वाटर की बोतले, फूलमालाये, नारियल, पॉलीथिन व भारी मात्रा में जलीय खरपतवार निकाली गई।
श्रमदान में रमेश चंद्र राजपूत, दीपेश स्वर्णकार, हरीश पुरोहित, तेज शंकर पालीवाल, डॉ अनिल मेहता व नन्दकिशोर शर्मा ने भाग लिया।
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