दिवाली पर लेकसिटी नहाई रोशनी में
दिवाली यानी रोशनी, जहाँ अमावस की काली अँधेरी रात जगमगा उठती है। मेवाड़ की पावन धरा भी प्रभु श्री राम के चौदह वर्ष बनवास काटकर आयोध्या नगरी में लौट आने की ख़ुशी में जगमगा उठी। दिवाली न सिर्फ रौशनी बल्कि मिठाईयाँ, खरीददारी, खुशियाँ और वो सबकुछ जो एक बच्चे से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर मुस्कान लेकर आती है। प्यार और त्याग की मिट्टी से गूंथे अपने अपने घरौंदों को सजाना तरह तरह के पकवान बनाना नए कपड़े और पटाखों की खरीददारी ! दीपकों की रोशनी और पटाखों का शोर बस यही दिखाई देता है चारों ओर। हमारे देश और हमारी संस्कृति की यही खूबी है। त्यौहार के रूप में मनाए जाने वाले जीवन के ये दिन न सिर्फ उन पलों को खूबसूरत बनाते हैं बल्कि हमारे जीवन को अपनी खुशबू से महका जाते हैं।
दिवाली यानी रोशनी, जहाँ अमावस की काली अँधेरी रात जगमगा उठती है। मेवाड़ की पावन धरा भी प्रभु श्री राम के चौदह वर्ष बनवास काटकर आयोध्या नगरी में लौट आने की ख़ुशी में जगमगा उठी। दिवाली न सिर्फ रौशनी बल्कि मिठाईयाँ, खरीददारी, खुशियाँ और वो सबकुछ जो एक बच्चे से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर मुस्कान लेकर आती है।
प्यार और त्याग की मिट्टी से गूंथे अपने अपने घरौंदों को सजाना तरह तरह के पकवान बनाना नए कपड़े और पटाखों की खरीददारी ! दीपकों की रोशनी और पटाखों का शोर बस यही दिखाई देता है चारों ओर। हमारे देश और हमारी संस्कृति की यही खूबी है। त्यौहार के रूप में मनाए जाने वाले जीवन के ये दिन न सिर्फ उन पलों को खूबसूरत बनाते हैं बल्कि हमारे जीवन को अपनी खुशबू से महका जाते हैं।
हमारे सारे त्यौहार न केवल एक दूसरे को खुशियाँ बाँटने का जरिया हैं बल्कि वे अपने भीतर बहुत से सामाजिक संदेश देने का भी जरिया हैं।
पुलिस बैंड
भारत में हर धर्म के लोगों के दीवाली मानने के अपने अपने कारण हैं। जैन लोग दीवाली मनाते हैं क्योंकि इस दिन उनके गुरु श्री महावीर को निर्वाण प्राप्त हुआ था। सिख दीवाली अपने गुरु हर गोबिंद जी के बाकी हिंदू गुरुओं के साथ जहाँगीर की जेल से वापस आने की खुशी में मनाते हैं। बौद्ध दीवाली मनाते हैं क्योंकि इस दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। और हिन्दू दीवाली मनाते हैं अपने चौदह वर्षों का बनवास काटकर प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस आने की खुशी में।
कुछ रंग ऐसे भी
विदेशी पर भी चढ़ा देसी रंग
मेले का आनंद
मौत का कुआँ
