नींव रखने से पहले ही रॉकेट की तरह भाग रहे जमीन के दाम, मेट्रो लाइनें बढ़ा रही है मुनाफे की राह
Udaipur Times, Metro driving up property prices : घर खरीदने वालों के लिए, प्रॉपर्टी में निवेश का सुनहरा नियम हुआ करता था लोकेशन लेकिन अब कुछ सालों से यह मंत्र बदलकर "कनेक्टिविटी" हो गया है। मुंबई में, मेट्रो लाइनें और फ्रीवे न सिर्फ़ आने-जाने का समय कम कर रहे हैं, बल्कि रियल एस्टेट मार्केट के लिए मुनाफ़े का ज़रिया भी बन गए हैं। किसी प्रोजेक्ट की नींव रखे जाने से पहले ही ज़मीन की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। JLL और नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) की हालिया रिपोर्ट ने इस सच्चाई को उजागर किया है।
निर्माण से पहले ज़मीन की कीमतों में बदलाव
JLL-NAREDCO रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स - जैसे मेट्रो लाइन 4, 6 और 11, कोस्टल रोड और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) - किसी भी नई यूनिट का निर्माण शुरू होने से पहले ही ज़मीन की कीमतों में बदलाव (री-रेटिंग) ला रहे हैं।
कनेक्टिविटी से तय होगी प्रोजेक्ट की लोकेशन
रिपोर्ट बताती है कि अब सिर्फ़ ज़ोनिंग के बजाय कनेक्टिविटी यह तय कर रही है कि अगला बड़ा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट कहां शुरू होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का सबसे ज़्यादा असर ठाणे और नवी मुंबई पर पड़ा है। जहाँ पहले इन इलाकों में नए प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी न के बराबर थी, वहीं अब यह डबल डिजिट में पहुँच गई है। इससे पता चलता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर न सिर्फ़ बसे हुए इलाकों में घनत्व बढ़ा रहा है, बल्कि विकास के नए रास्ते भी खोल रहा है।
प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीखों पर ध्यान
JLL-NAREDCO रिपोर्ट खरीदारों और निवेशकों के बीच एक अहम ट्रेंड पर ज़ोर देती है: वे अब शुरुआती घोषणाओं के बजाय प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीखों पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं।
रेल लाइनें भविष्य में मुनाफ़ा बढ़ायेंगी
रिपोर्ट साफ़ तौर पर कहती है कि रियल एस्टेट से होने वाले मुनाफ़े की अगली लहर सुरंगों और रेल लाइनों के असल में पूरा होने से आएगी; सिर्फ़ घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। रिपोर्ट खास तौर पर बताती है कि मुंबई में विकास के लिए खाली ज़मीन लगभग खत्म हो चुकी है; इसलिए, पुरानी इमारतों का रीडेवलपमेंट शहर में घरों की सप्लाई का मुख्य ज़रिया बन गया है। 2025 और 2026 की पहली छमाही के बीच, रीडेवलप किए गए घरों की बिक्री नए लॉन्च किए गए प्रोजेक्ट्स की बिक्री से कहीं ज़्यादा रही। फिलहाल, मुंबई में कुल हाउसिंग लॉन्च में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी 10.3% और कुल बिक्री में 14.7% है।
इंफ्रास्ट्रक्चर: मार्केट में 'एंट्री टिकट'
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर अब सिर्फ़ एक सुविधा नहीं रह गया है, बल्कि मार्केट में 'एंट्री टिकट' बन गया है। नई मेट्रो लाइनें, तटीय कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय ट्रांजिट नेटवर्क रीडेवलपमेंट के अर्थशास्त्र को बदल रहे हैं और अलग-अलग माइक्रो-मार्केट में जमीन की असली कीमत को सामने ला रहे हैं। इसके अलावा, जानकारों का मानना है कि बिल्डरों के लिए रीडेवलपमेंट सिर्फ एक बिजनेस या मुनाफा कमाने का जरिया नहीं है। यह मुंबई शहर को बनाए रखने के लिए एक जरूरत बन गया है।