9 गांवों की जमीनों का होगा सर्वे ! वेयरहाउस और फैक्ट्री बनाने की तैयारी, जाने पूरा प्लान ?

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9 गांवों की जमीनों का होगा सर्वे ! वेयरहाउस और फैक्ट्री बनाने की तैयारी, जाने पूरा प्लान ?

Udaipur Times, land in 9 villages of Delhi : सरकार ने दिल्ली में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने और वेयरहाउस व फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स विकसित करने की तैयारी तेज़ कर दी है। इस पहल के तहत, दक्षिण-पश्चिम और बाहरी उत्तर ज़िलों के नौ गांवों में लगभग 13.26 एकड़ ग्राम सभा (ग्राम परिषद) की जमीन का टोपोग्राफ़िकल सर्वे किया जाएगा।

इस जमीन का क्या किया जाएगा?

दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) ने इस काम के लिए टेंडर जारी किया है। यह ज़मीन दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग से DSIIDC को ट्रांसफर की जाएगी। टेंडर के दस्तावेज़ों के अनुसार, इस ज़मीन का प्रस्तावित इस्तेमाल वेयरहाउस, फ़्लैटेड फ़ैक्ट्री कॉम्प्लेक्स और पेड़-पौधे लगाने वाले इलाकों के लिए किया जाएगा।

दिल्ली के किन गांवों में जमीन का सर्वे होगा?

सर्वे में दक्षिण-पश्चिम ज़िले के बडुसराय, ग़ालिबपुर, झटिकरा, राघोपुर, रावता और ढांसा गांव शामिल होंगे। इसके अलावा, बाहरी उत्तर ज़िले के औचंडी, निज़ामपुर रसूलपुर और ताजपुर कलां गांवों की ज़मीन का भी सर्वे किया जाएगा। इन नौ गांवों में कुल मिलाकर लगभग 13.26 एकड़ ज़मीन की पहचान की गई है, जिसमें दक्षिण-पश्चिम ज़िले में लगभग 9.24 एकड़ और बाहरी उत्तर ज़िले में लगभग 4.02 एकड़ ज़मीन शामिल है।

जमीन की सीमाओं, पेड़ों और सड़कों की मैपिंग

DSIIDC द्वारा जारी टेंडर में सर्वे की लागत का अनुमान ₹2,24,932 लगाया गया है। सर्वे के दौरान, 'टोटल स्टेशन' लेज़र उपकरण का इस्तेमाल करके ज़मीन की असल स्थिति का पता लगाया जाएगा।

सर्वे में प्लॉट की सीमाओं और क्षेत्रफल के साथ-साथ मौजूदा ढांचों जैसे कि इमारतें, शेड, बाउंड्री वॉल, सड़कें, पेड़, बिजली के खंभे, नालियां और पुलिया का विवरण दर्ज किया जाएगा। ज़मीन की बनावट (टोपोग्राफ़ी) का पता लगाने के लिए अलग-अलग जगहों पर ऊंचाई के स्तर (एलिवेशन लेवल) मापे जाएंगे और इस डेटा के आधार पर नक्शे तैयार किए जाएंगे। 

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया

सर्वे के बाद, चुनी गई एजेंसी को AutoCAD से बने नक्शे, रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ जमा करने होंगे। हर साइट से जुड़े दस्तावेज़ों की पांच प्रतियां देनी होंगी। संबंधित विभागों से ज़रूरी सर्टिफ़िकेट भी लेने होंगे। टेंडर में भाग लेने वाली एजेंसियों के लिए इसी तरह के टोपोग्राफ़िकल सर्वे के काम का अनुभव, GST रजिस्ट्रेशन और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य है।

सर्वे के बाद क्या होगा?

सर्वे पूरा होने के बाद, जमीन की सीमाओं और उपलब्ध एरिया के बारे में साफ़ जानकारी मिलने की उम्मीद है। इससे ज़मीन को इंडस्ट्रीज़ डिपार्टमेंट से DSIIDC को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी और प्रस्तावित इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए आगे के कदमों में मदद मिलेगी।

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