बड़े UPI पेमेंट पर जल्द लगाया जा सकता है शुल्क, जाने वजह ?
Udaipur Times, New Delhi : पांच साल से फ्री यूपीआई सर्विस पर अब सरकार का रुख बदलता नजर आ रहा है। जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पॉलिसी से इकोसिस्टम की आय का मॉडल ही खत्म हो गया। अब सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ के बीच बड़े लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया है कि यूपीआई इकोसिस्टम को टिकाऊ बनाने और सरकारी खजाने पर बोझ घटाने के लिए MDR से जुड़े दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पहला- तय सीमा से ज्यादा के लेनदेन या मर्चेंट्स पर MDR दोबारा लागू करना, और दूसरा- अगले कुछ वर्षों में सरकारी सहायता चरणबद्ध तरीके से घटाने के लिए एक 'टियर्ड इंसेंटिव' ढांचा बनाना।
मिली जानकारी के मुताबिक फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट ने वित्त संबंधी स्थायी समिति को दिए लिखित जवाब में आगाह किया है कि बड़े लेनदेन पर MDR लगाने का कानूनी प्रावधान लागू करने में देरी के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। जनवरी 2020 से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सभी यूपीआई लेनदेन पर MDR शून्य कर दिया गया था।
