बर्तन धोना और घर का काम करना सीख लो, पढ़ लिखकर क्या होगा, तानों का सामना करते हुए सुष्मिता बनीं ASO

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बर्तन धोना और घर का काम करना सीख लो, पढ़ लिखकर क्या होगा, तानों का सामना करते हुए सुष्मिता बनीं ASO

Udaipur Times, ASO Sushmita Sharma : सुष्मिता शर्मा की कहानी, जो मुश्किलों और सपनों के बीच अपने लक्ष्य को पाने के लिए डटी रहीं, पुरानी रूढ़िवादी सोच को तोड़ती है। एक मिडिल-क्लास परिवार से आने वाली सुष्मिता से हमेशा यही कहा जाता था कि उनका भविष्य सिर्फ़ शादी और घर के कामों में ही है। जब 18 साल की उम्र में उनकी शादी तय की जा रही थी, तो उन्होंने अपने सपनों के लिए खड़े होने का फ़ैसला किया। 

मुश्किल हालात, परिवार के दबाव और रिश्तेदारों के ताने सहने के बावजूद, उन्होंने SSC CGL परीक्षा पर ध्यान दिया और सफलता हासिल की। ​​इन मुश्किलों का सामना करने से लेकर ASO (असिस्टेंट सेक्शन ऑफ़िसर) बनने तक का उनका सफर दूसरे उम्मीदवारों के लिए उम्मीद की किरण है।

शादी के बढ़ते दबाव के बीच परिवार से समय की मांग

सुष्मिता शर्मा उस रूढ़िवादी सोच से परेशान थीं जो लड़कियों के सपनों को सिर्फ़ शादी तक ही सीमित मानती थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जब वह सिर्फ़ 18 साल की थीं और कॉलेज के पहले साल में थीं, तब उनकी शादी तय की जा रही थी; उनकी मर्ज़ी के बिना ही रिश्ता पक्का किया जा रहा था। परिवार और रिश्तेदारों का बहुत ज़्यादा दबाव था, और उनसे अक्सर कहा जाता था कि सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद छोड़ दें।

बर्तन धोना और घर का काम करना सीख लो

लेकिन, हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी इच्छाओं के लिए लड़ाई लड़ी और अपने लक्ष्यों को पाने के लिए परिवार से तीन-चार साल का समय मांगा। इस दौरान, करीबी लोगों के तानों से उन्हें एहसास हुआ कि समाज लड़कियों की पढ़ाई को बोझ मानता है।

बर्तन धोना और घर का काम करना सीख लो

उन्हें याद है कि जब उन्होंने शादी का प्रस्ताव ठुकराया तो लोग कैसे ताने मारते थे। रिश्तेदार और पड़ोसी ताने मारते हुए पूछते थे कि पढ़ाई से उन्हें क्या फ़ायदा होगा और कहते थे कि बर्तन धोना और घर के काम संभालना सीखना बेहतर है। उन्हें अक्सर ऐसी बातें सुनने को मिलती थीं, "लड़की के नौकरी पाने का इंतज़ार कौन करता है?" फिर भी, इस सारी नकारात्मकता के बीच, वह अपने लक्ष्य पर टिकी रहीं। कुछ बातों ने उनके दिल पर गहरा असर डाला और आखिरकार उनकी सफलता की नींव रखी। 

SSC CGL की तैयारी और शुरुआत में मिली असफलता का दर्द

शादी के दबाव से बाहर निकलकर, सुष्मिता ने SSC CGL परीक्षा की तैयारी करने का रास्ता चुना। उन्होंने दिन-रात लाइब्रेरी में पढ़ाई करते हुए कड़ी मेहनत की। उन्होंने रोज़ाना 8 से 10 घंटे पढ़ने का रूटीन बनाया, लेकिन इतनी मेहनत के बावजूद जब उनका सिलेक्शन नहीं हुआ, तो वह बुरी तरह टूट गईं। उस असफलता ने उनका हौसला तोड़ दिया और वह घंटों अपने कमरे में बैठकर रोती रहीं। उन्हें लगा कि उनकी सारी मेहनत बेकार चली गई, फिर भी वह जानती थीं कि चाहे कुछ भी हो जाए, उन्हें आगे बढ़ना ही है।

किडनी स्टोन और अस्पताल में भर्ती होने की चुनौती

उन्होंने किसी तरह खुद को संभाला और अपनी तैयारी फिर से शुरू की। इस दौरान उन्हें शारीरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। SSC Mains परीक्षा से ठीक एक महीने पहले, उन्हें किडनी स्टोन के दर्द से गुज़रना पड़ा और सर्जरी करवानी पड़ी। अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए भी, वह पढ़ाई के टॉपिक लिखने और याद करने के लिए अपने पास एक बोर्ड रखती थीं। शारीरिक दर्द और आने वाली परीक्षा के मानसिक तनाव के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी। दर्द और कमज़ोरी के बावजूद, उनका एकमात्र लक्ष्य सरकारी नौकरी पाना ही रहा।

ASO बनना और सचिवालय में पोस्टिंग

सालों के संघर्ष के बाद, उनका सबसे बड़ा सपना आखिरकार सच हो गया। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में SSC CGL परीक्षा पास कर ली। इसके बाद, उन्हें सेंट्रल सेक्रेटेरिएट सर्विस में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) के पद पर नियुक्त किया गया। उस दिन, उन लोगों की बोलती बंद हो गई जो उन पर ताने कसते थे। 

उनकी सफलता ने न केवल उनका भविष्य सुरक्षित किया, बल्कि उनके परिवार और समाज की सोच को भी हमेशा के लिए बदल दिया। आज, वह अपनी कहानी के ज़रिए लाखों युवा महिलाओं को प्रेरित और उनका मार्गदर्शन करती हैं।

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