महंगे स्कूलों को छोड़ सरकारी आंगनवाड़ी में भेजे अपने जुड़वा बच्चे, डेंस्टिट छोड़ अफसर बनीं IAS मिताली सेठी
Udaipur Times, IAS Mitali Sethi : IAS और IPS जैसे प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचने वाले अधिकारियों की सफलता की कहानियां अक्सर लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत होती हैं। हालांकि, कुछ अधिकारी ऐसे भी होते हैं जो सिविल सर्वेंट बनने के बाद अपने काम और फैसलों से अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। महाराष्ट्र कैडर की IAS अधिकारी मिताली सेठी ऐसी ही एक अधिकारी हैं। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 56 हासिल की थी।
मेडिकल के क्षेत्र में अपना करियर छोड़ने के बाद IAS बनने का रास्ता चुनने वालीं मिताली सेठी इन दिनों एक अनोखे फैसले के कारण चर्चा में हैं: उन्होंने अपने जुड़वां बच्चों का दाखिला किसी महंगे प्राइवेट स्कूल में कराने के बजाय एक सरकारी आँगनवाड़ी में कराया। उनके बच्चे लगभग एक साल से आंगनवाड़ी जा रहे हैं। यह फैसला उस आम सोच के बिल्कुल उलट है कि ऊंचे ओहदे वाले सरकारी अधिकारियों के बच्चे आमतौर पर महंगी सुविधाओं वाले महंगे स्कूलों में पढ़ते हैं।

मिताली सेठी नंदुरबार जिले की कलेक्टर
2017 बैच की IAS अधिकारी मिताली सेठी अभी नंदुरबार जिले की कलेक्टर के तौर पर काम कर रही हैं। जब उनके जुड़वां बेटे तीन साल के हुए, तो उन्होंने अपने घर के पास एक सरकारी आँगनवाड़ी में उनका दाखिला करा दिया। हालांकि, उन्होंने यह फैसला सरकारी संस्थानों के बारे में कोई बड़ी बात कहने के लिए नहीं लिया था; उन्हें बस आंगनवाड़ी पसंद आई और वहां काम करने वाले लोगों पर भरोसा था, इसलिए उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला वहीं कराने का फैसला किया।
IAS अधिकारी मिताली सेठी आंगनवाड़ी के कर्मचारियों के काम करने के तरीके और पढ़ाने के तरीकों से बहुत प्रभावित थीं। वह चाहती थीं कि उनके बच्चे भी ऐसे ही माहौल में शिक्षा पायें। हालांकि शुरू में उनके परिवार वाले उनके फैसले से सहमत नहीं थे, लेकिन मिताली सेठी का यह फैसला न तो दिखावा था और न ही कोई पब्लिसिटी स्टंट। यह जमीनी अनुभव और वहां के लोगों की संवेदनशीलता पर आधारित था ऐसी खूबियाँ जिन्होंने उनका दिल जीत लिया था।
IAS मिताली ने आंगनवाड़ी में कुछ खास बातें देखीं
IAS अधिकारी मिताली ने आँगनवाड़ी में कुछ खास बातें देखीं। उदाहरण के लिए, जब भी किसी बच्चे का आँगनवाड़ी में दाखिला होता है, तो सबसे पहले उसका वज़न किया जाता है। वज़न करते समय बच्चे अक्सर रोते और चिल्लाते हैं। हालांकि, उन्होंने देखा कि बच्चों का वज़न करने के लिए एक खास तरह की झोली (स्लिंग) का इस्तेमाल किया जा रहा था; वज़न करते समय बच्चे उसमें खुशी-खुशी बैठते थे। गौरतलब है कि स्थानीय आंगनवाड़ी वर्कर ने एक दर्ज़ी से यह झोली खास तौर पर बनवाई थी।

एक साल से आंगनवाड़ी जा रहे जुड़वां बच्चे
इस तरीके ने IAS अधिकारी का दिल जीत लिया। उन्हें एहसास हुआ कि बच्चों के लिए किताबों से रटकर सीखने या महंगे विज्ञापनों से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है परिवार जैसा प्यार और देखभाल मिलना। अब बच्चे चार साल के हो गए हैं और गर्व के साथ आंगनवाड़ी जाते हैं। उनका मानना है कि कम उम्र में बच्चों को सिर्फ़ किताबी ज्ञान पर ध्यान देने के बजाय इंसानी संवेदनाओं को समझना चाहिए और अपने आस-पास के माहौल से जुड़ना चाहिए।
कौन हैं IAS मिताली सेठी?
मिताली सेठी पंजाब के जालंधर की रहने वाली हैं। वह शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई में होनहार थीं। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने अमृतसर से डेंटल डिग्री (BDS) हासिल की। इसके बाद वह ऑर्थोडॉन्टिक्स में मास्टर डिग्री पूरी करने के लिए चेन्नई चली गईं। पेशे से डॉक्टर होने के नाते, मिताली को शुरू में पता भी नहीं था कि IAS क्या होता है। हालांकि, बाद में उन्होंने सिविल सेवा की ओर अपना ध्यान लगाया और UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
तीसरे प्रयास में हासिल की 56वीं रैंक
मिताली सेठी का UPSC का सफ़र वाकई प्रेरणादायक है। UPSC परीक्षा के अपने पहले प्रयास में वह सफल नहीं हो पाईं और दूसरी बार भी उन्हें नाकामी का सामना करना पड़ा। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी; जैसा कि वह खुद बताती हैं, वह काफी दृढ़ निश्चयी हैं। आखिरकार, उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने 2017 में अपने तीसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास की, 56वीं रैंक हासिल की और IAS के लिए चुनी गईं।