गुरुग्राम को पीछे छोड़ इस जगह की जमीन बनी सोना ! जाने कितनी महंगी हुई प्रॉपर्टी ?
Udaipur Times, Noida vs Gurugram Real Estate : दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदना पहले ही आम आदमी के बजट पर भारी पड़ रहा है। अब जमीन की बढ़ती कीमतों ने भी प्रॉपर्टी खरीदकर अपना घर बनाने की योजना को मुश्किल बना दिया है। लंबे समय तक महंगी जमीन और प्रीमियम रियल एस्टेट के मामले में गुरुग्राम का नाम सबसे ऊपर लिया जाता रहा है, लेकिन नोएडा में हुए एक बड़े जमीन सौदे ने रियल एस्टेट मार्केट की तस्वीर बदलने की चर्चा शुरू कर दी है।
नोएडा के सेक्टर-108 में हुई एक आवासीय भूखंड की नीलामी में जिस कीमत पर जमीन बिकी, उसने प्रॉपर्टी बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस सौदे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या जमीन की कीमतों के मामले में नोएडा अब गुरुग्राम को टक्कर देने लगा है। हालांकि दोनों शहरों के रियल एस्टेट बाजार की तुलना केवल एक जमीन सौदे के आधार पर करना सही नहीं होगा, लेकिन यह सौदा नोएडा में बढ़ती जमीन की मांग और प्रीमियम प्रॉपर्टी मार्केट का संकेत जरूर देता है।
नोएडा सेक्टर-108 में 12.5 एकड़ जमीन का बड़ा सौदा
नोएडा के सेक्टर-108 में करीब 12.5 एकड़ जमीन की नीलामी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक नोएडा विकास प्राधिकरण ने इस जमीन का बेस प्राइस करीब 835 करोड़ रुपये रखा था। नीलामी में रियल एस्टेट कंपनी M3M ने करीब 1,839 करोड़ रुपये की बोली लगाकर जमीन हासिल की।
इस हिसाब से जमीन की कीमत करीब 147 करोड़ रुपये प्रति एकड़ बैठती है। यह सौदा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नीलामी में देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल DLF ने भी हिस्सा लिया था। इतनी ऊंची बोली से यह संकेत मिलता है कि नोएडा के कुछ प्रीमियम इलाकों में डेवलपमेंट क्षमता और जमीन की मांग काफी मजबूत बनी हुई है।
गुरुग्राम में 2018 में हुआ था बड़ा जमीन सौदा
गुरुग्राम लंबे समय से दिल्ली-एनसीआर के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों में शामिल रहा है। यहां कॉरपोरेट ऑफिस, आईटी कंपनियों, प्रीमियम हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की वजह से जमीन की मांग काफी मजबूत रही है। साल 2018 में DLF ने गुरुग्राम के उद्योग विहार में करीब 11.76 एकड़ जमीन 1,496 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
यह जमीन हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम यानी HSIIDC की नीलामी में शामिल थी। इसका बेस प्राइस करीब 686 करोड़ रुपये था, जबकि नीलामी के बाद यह सौदा करीब 127 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के स्तर पर पहुंच गया था। उस समय इसे एनसीआर के सबसे महंगे जमीन सौदों में गिना गया था। अब नोएडा के सेक्टर-108 में हुए बड़े सौदे के बाद दोनों शहरों के प्रीमियम लैंड मार्केट की तुलना फिर से चर्चा में आ गई है।
आखिर गुरुग्राम की इतनी डिमांड क्यों रही?
गुरुग्राम की रियल एस्टेट ग्रोथ में सबसे बड़ी भूमिका यहां मौजूद कॉरपोरेट और आईटी सेक्टर की रही है। देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने शहर में अपने ऑफिस और कैंपस स्थापित किए हैं। इसके चलते हाई-इनकम प्रोफेशनल्स के लिए घर, लग्जरी अपार्टमेंट, ऑफिस स्पेस और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग बढ़ी।
दिल्ली से नजदीकी, एक्सप्रेसवे और प्रमुख सड़कों की कनेक्टिविटी तथा इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक आसान पहुंच ने भी गुरुग्राम के रियल एस्टेट बाजार को मजबूती दी। यही वजह है कि लंबे समय तक एनसीआर के प्रीमियम प्रॉपर्टी बाजार में गुरुग्राम की मजबूत पकड़ रही है।
जाने नोएडा में क्यों बढ़ रही जमीन की मांग?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़े हैं। सबसे बड़ा बदलाव जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास को माना जा रहा है। एयरपोर्ट से जुड़े प्रोजेक्ट्स और आसपास विकसित हो रहे कमर्शियल तथा इंडस्ट्रियल क्षेत्रों ने इस पूरे इलाके की रियल एस्टेट संभावनाओं को बढ़ाया है।
इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित और विकसित हो रही नई सड़क कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और फिल्म सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में निवेश की दिलचस्पी बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।
जेवर एयरपोर्ट से बदली इलाके की तस्वीर
जेवर एयरपोर्ट को नोएडा-ग्रेटर नोएडा के भविष्य के विकास का एक बड़ा आधार माना जा रहा है। एयरपोर्ट के आसपास होटल, लॉजिस्टिक्स, कमर्शियल प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्रियल यूनिट और आवासीय विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं। एयरपोर्ट के आसपास जमीन की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आने के दावे किए जाते रहे हैं। हालांकि किसी इलाके में जमीन के भाव अलग-अलग सेक्टर, सड़क से दूरी, डेवलपमेंट स्टेटस और जमीन के इस्तेमाल के आधार पर काफी अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक कीमत को पूरे जेवर क्षेत्र का औसत भाव मानना सही नहीं होगा।
एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी से मिल रहा फायदा
नोएडा की रियल एस्टेट ग्रोथ में एक्सप्रेसवे नेटवर्क की भी अहम भूमिका है। यमुना एक्सप्रेसवे ने नोएडा को आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों से जोड़ने में मदद की है। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे और दूसरे प्रस्तावित सड़क प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में और सुधार की उम्मीद है।
जेवर एयरपोर्ट को अलग-अलग शहरों और प्रमुख सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाली परियोजनाएं भी इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर अक्सर जमीन और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग पर पड़ सकता है, हालांकि कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी बाजार की मांग और सप्लाई पर निर्भर करती है।
न्यू नोएडा से भी बढ़ सकती है जमीन की मांग
नोएडा के विस्तार की योजना अब मौजूदा शहर से आगे बढ़कर न्यू नोएडा तक पहुंच रही है। प्रस्तावित न्यू नोएडा क्षेत्र में कई गांवों की जमीन को नियोजित तरीके से विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य औद्योगिक, कमर्शियल और आवासीय गतिविधियों के लिए नया शहरी क्षेत्र तैयार करना है।
अगर यहां बड़े स्तर पर इंडस्ट्री, रोजगार और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी विकसित होती है तो आसपास के इलाकों में जमीन की मांग बढ़ सकती है। हालांकि न्यू नोएडा के सभी क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में समान तेजी आएगी, ऐसा अभी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।
फिल्म सिटी और इंडस्ट्री से बढ़ेंगी नौकरियां
यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित फिल्म सिटी भी नोएडा के भविष्य के विकास से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और दूसरे उद्योगों में निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।नई कंपनियों के आने से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ने पर आसपास किराये के घर, अपार्टमेंट, प्लॉट और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग में भी इजाफा हो सकता है।
नोएडा के किन- किन इलाकों पर है नजर?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी की संभावनाएं एक जैसे नहीं हैं। सेक्टर-150, 128, 137, 143, 142, 107, 76 और 78 जैसे इलाकों में अलग-अलग तरह के रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स विकसित हुए हैं। इन क्षेत्रों में कीमतें उनकी कनेक्टिविटी, प्रोजेक्ट की गुणवत्ता, उपलब्ध सुविधाओं और आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।
वहीं जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास का क्षेत्र भविष्य के विकास की वजह से निवेशकों की नजर में बना हुआ है। हालांकि यहां निवेश करने वालों को केवल संभावित कीमत बढ़ने के आधार पर फैसला लेने के बजाय जमीन का टाइटल, अप्रूवल, भूमि उपयोग, डेवलपर की विश्वसनीयता और संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।
क्या नोएडा ने सच में गुरुग्राम को पीछे छोड़ दिया?
नोएडा और गुरुग्राम की तुलना केवल जमीन के एक बड़े सौदे से करना जल्दबाजी होगी। गुरुग्राम अभी भी कॉरपोरेट ऑफिस, आईटी, कमर्शियल रियल एस्टेट और प्रीमियम हाउसिंग के मामले में बेहद मजबूत बाजार है। दूसरी तरफ नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, फिल्म सिटी और न्यू नोएडा जैसी परियोजनाएं भविष्य की ग्रोथ को मजबूत आधार दे रही हैं।
कुल मिलाकर हम कह सकते है कि, नोएडा के सेक्टर-108 में हुआ बड़ा जमीन सौदा इस बात का संकेत जरूर है कि शहर के कुछ प्रीमियम इलाकों में जमीन की कीमत और डेवलपर्स की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। लेकिन पूरे नोएडा को जमीन की कीमतों में गुरुग्राम से महंगा बताना अभी सही नहीं होगा। दोनों शहरों के अलग-अलग सेक्टरों में कीमतों में बड़ा अंतर है और भविष्य की ग्रोथ भी इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, कनेक्टिविटी और वास्तविक मांग पर निर्भर करेगी।