कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ वापस लौटी गांव ! अब केले के कारोबार से खड़ा किया लाखों का बिजनेस

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कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ वापस लौटी गांव ! अब केले के कारोबार से खड़ा किया लाखों का बिजनेस 

Udaipur Times, Success Story of Khushboo Patil : जहां एक तरफ युवा बड़े शहरों में अच्छी नौकरी और कॉर्पोरेट करियर बनाने का सपना देखते हैं, वहीं मध्य प्रदेश की 26 वर्षीय खुशबू पाटिल ने एक अलग रास्ता चुना। बेंगलुरु में रिलायंस रिटेल की करीब 7 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर वह अपने गांव लौट आईं और केले से जुड़ा अपना कारोबार शुरू कर दिया। आज उनका यह स्टार्टअप कई राज्यों से ऑर्डर प्राप्त कर रहा है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन रहा है।

कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ वापस लौटी गांव !

किसान परिवार में हुआ जन्म

5 फरवरी 2000 को मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव में जन्मीं खुशबू एक किसान परिवार से हैं। उनके पिता युवराज पाटिल किसान हैं और बचपन से ही उन्होंने खेती-किसानी को करीब से देखा। खुशबू पढ़ाई के साथ-साथ शतरंज की अच्छी खिलाड़ी भी रही हैं। करीब पांच साल तक उन्होंने जिला और संभाग स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और कई बार शीर्ष तीन में जगह बनाई। उनका कहना है कि शतरंज ने उन्हें धैर्य, अनुशासन और रणनीतिक सोच सिखाई, जो आज उनके व्यवसाय में काफी मदद कर रही है।

एक तूफान ने बदल दी जिंदगी

12वीं पास करने के बाद उनके परिवार पर बड़ा संकट आ गया। एक भीषण तूफान ने परिवार की केले की फसल बर्बाद कर दी, जिससे करीब 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ। परिवार पहले से कर्ज में था और इस नुकसान ने आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ दिया। इसके चलते खुशबू को बड़े संस्थान में पढ़ने का सपना छोड़ना पड़ा और उन्होंने बुरहानपुर के एक स्थानीय कॉलेज में दाखिला लिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने काम भी शुरू कर दिया। इस कठिन दौर का उनके पिता पर भी गहरा असर पड़ा, जबकि उनकी मां अनीता पाटिल पूरे परिवार का सहारा बनीं।

कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ वापस लौटी गांव !

नौकरी से लेकर बिजनेस तक का सफर

साल 2018 में खुशबू इंदौर चली गईं, जहां उन्होंने ट्रैवल मैनेजमेंट का कोर्स किया और कुछ समय नौकरी भी की। इसके बाद उन्होंने बुरहानपुर के सेवा सदन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बिजनेस में उनकी रुचि शुरू से ही थी। उन्होंने 'खुश पार्लर डिजाइनिंग' नाम से एक छोटा कारोबार भी शुरू किया, जो सफल रहा। बाद में उन्होंने महाराष्ट्र के कर्जत स्थित यूनिवर्सल बिजनेस स्कूल से एमबीए किया।

एमबीए पूरा करने के बाद उन्हें रिलायंस रिटेल के बेंगलुरु मुख्यालय में फैशन एंड लाइफस्टाइल डिवीजन में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिली। यहां उन्हें बिजनेस रणनीति, मार्केटिंग, सेल्स और रिटेल संचालन का अच्छा अनुभव मिला।

क्यों छोड़ी 7 लाख की नौकरी?

कॉर्पोरेट नौकरी के बावजूद खुशबू के मन में अपने गांव और किसानों की समस्याएं लगातार बनी रहीं। उन्होंने महसूस किया कि किसानों की सबसे बड़ी समस्या उत्पादन नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन और ब्रांडिंग की कमी है। इसी सोच ने उन्हें जनवरी 2026 में नौकरी छोड़कर गांव लौटने के लिए प्रेरित किया।

केले के चिप्स से शुरू किया कारोबार

बुरहानपुर केला उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में खुशबू ने केले के चिप्स बनाने का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने अपने माता-पिता के नाम पर 'युवराज एंड अनीता पाटिल एंटरप्राइजेज' की स्थापना की। इस कारोबार में उन्होंने करीब 8 से 10 लाख रुपये का निवेश किया। उनकी यूनिट में इस्तेमाल होने वाले केले उनके अपने खेतों से आते हैं और फिलहाल यह उद्यम करीब 10 लोगों को रोजगार दे रहा है।

कई राज्यों से मिल रहे ऑर्डर

सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम ने खुशबू के कारोबार को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने अपने उत्पाद और उद्यम की कहानी ऑनलाइन साझा की, जिससे लोगों का ध्यान उनके ब्रांड की ओर गया। आज उनके केले के चिप्स के लिए मध्य प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, गुजरात, पुणे और इंदौर समेत कई जगहों से ऑर्डर मिल रहे हैं।

किसानों के लिए बनना चाहती हैं मिसाल

खुशबू का सपना ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें किसान अपनी फसल को सीधे मूल्यवर्धित उत्पाद में बदलकर बाजार तक पहुंचाएं और अधिक कमाई कर सकें। उनका मानना है कि यदि किसान अपनी उपज को प्रोसेस कर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाएं, तो गांवों में रोजगार बढ़ेगा और किसानों की आय में भी इजाफा होगा। आज खुशबू पाटिल की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो नौकरी छोड़कर उद्यमिता और कृषि आधारित व्यवसाय में भविष्य तलाशना चाहते हैं।

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