9 साल की उम्र में चली गई आंखों की रोशनी, फिर भी नहीं टूटा हौसला, दो बार क्रैक कर दिया UPSC
Udaipur Times, Success Story of Ajay R Raj : कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल इंसान की राह नहीं रोक सकती। केरल के कोझिकोड जिले के चथांगोट्टुनाडा गांव के रहने वाले अजय आर. राज ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। महज नौ साल की उम्र में अपनी आंखों की रोशनी खो देने वाले अजय ने कभी भी अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बनने दिया और कड़ी मेहनत के दम पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 109 हासिल कर देशभर में अपनी पहचान बनाई है।

बचपन में खोई आंखों की रोशनी, लेकिन नहीं छोड़े सपने
अजय राज की जिंदगी आसान नहीं रही। जब वे केवल नौ साल के थे, तब उनकी आंखों की रोशनी चली गई। यह किसी भी बच्चे और उसके परिवार के लिए बेहद कठिन परिस्थिति थी, लेकिन अजय ने इसे अपनी जिंदगी की हार नहीं बनने दिया। उन्होंने शुरू से ही यह तय कर लिया था कि वह अपनी परिस्थितियों को अपने सपनों के बीच नहीं आने देंगे। परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ते रहे।
दृढ़ संकल्प और मेहनत से हासिल की बड़ी सफलता
दृष्टिबाधित होने के बावजूद अजय ने अपनी पढ़ाई में कभी कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने सुनियोजित रणनीति, आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत के जरिए UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति के सपनों को सीमित नहीं कर सकतीं, यदि उसके इरादे मजबूत हों।

पहले से हैं भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा के अधिकारी
अजय राज वर्तमान में भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (Indian Railway Management Service-IRMS) में अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और सिविल सेवा परीक्षा में बेहतर रैंक हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। उनकी यह उपलब्धि नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी एक साथ करने वाले युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है।
कोझिकोड के छह अभ्यर्थियों ने पास की UPSC परीक्षा
इस वर्ष UPSC सिविल सेवा परीक्षा में कोझिकोड जिले के कुल छह अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। इनमें अजय आर. राज ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 109 प्राप्त की, जो जिले की सबसे ऊंची रैंक है।
उनकी सफलता से परिवार, गांव और पूरे जिले में खुशी का माहौल है। लोग इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बता रहे हैं।

लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बने अजय
अजय राज की कहानी उन युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है, जो किसी शारीरिक, आर्थिक या सामाजिक चुनौती के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां इंसान की मंजिल तय नहीं करतीं, बल्कि उसकी मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प ही उसे सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। अजय की यह उपलब्धि न केवल दिव्यांगजनों बल्कि देश के हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखता है।
