मेवाड में महाकालेश्वर भगवान की शाही सवारी 12 को

मेवाड में महाकालेश्वर भगवान की शाही सवारी 12 को

मेवाड में महाकालेश्वर भगवान की शाही सवारी कार्यक्रम के अंतर्गत मेवाड की धरा पर परम्परागत् रूप से महाकालेश्वर भगवान महाकाल कि आगामी 12 तारीख को शहर में नगर भ्रमण हेतु निकलने वाली शाही सवारी की विभिन्न व्यवस्थाओं के सम्बध में आज मन्दिर परिसर में बैठक तेजसिंह सरूपरिया की अध्यक्षता में हुई। जिसमें प्रन्यास के सभी पदाधिकारियों एवं श्रावण महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

 

मेवाड में महाकालेश्वर भगवान की शाही सवारी 12 को

मेवाड में महाकालेश्वर भगवान की शाही सवारी कार्यक्रम के अंतर्गत मेवाड की धरा पर परम्परागत् रूप से महाकालेश्वर भगवान महाकाल कि आगामी 12 तारीख को शहर में नगर भ्रमण हेतु निकलने वाली शाही सवारी की विभिन्न व्यवस्थाओं के सम्बध में आज मन्दिर परिसर में बैठक तेजसिंह सरूपरिया की अध्यक्षता में हुई। जिसमें प्रन्यास के सभी पदाधिकारियों एवं श्रावण महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में शाही सवारी निकलने के सम्बंध में रूप-रेखाओं को प्रस्तुत करते हुए अंतिम रूप देकर संकल्प लिया गया कि भगवान रूद्र की शाही सवारी को अनुशाशित, भव्य तथा शान्ति पूर्णरूप सद्भावना व सौहार्द्र से निकाली जाएगी।

प्रन्यास के सचिव चंद्रशेखर दाधीच ने बताया कि शाही सवारी के स्वरूप में निकलने वाली सवारी में पूर्व में महाकाल का पताका लिए हुए व्यक्ति रहेगा। उसके पीछे प्रन्यास द्वारा बनाई झाकियां चलेगी। जिसमें सर्वप्रथम विशाल गणपति की झाकी शाही सवारी की अगवानी करते हुए चलेगी। तत्पश्चात् विशाल नन्दी पर विराजित महादेव, शेर पर विराजित माँ जगदम्बा, कार्तिकेय, विश्वकर्मा, महर्षि दधीचि, पांच नन्दी के जोडे, गौ-माता की आकर्षक झांकी रहेगी।

बीच बीच में लोक कलाकार गवरी अपनी प्रस्तुतियां देंगे साथ गणगौर, भजन मण्डली, विशाल शिवलिंग की झांकी रहेगी। वहीं 11 घोड़े, बैण्ड बाजे, 101 कलशधारी महिलाएं मंगलगीत गाती चलेगी। इसी कारवें में 11 कारें, व 4 गोल्फ कारों का आकर्षक रूप होगा। शाही सवारी में परम्परागत वाद्य यंत्रों थाली मादल, ढोल मंजिरे की टोली चलेगी। साथ ही भगवान को अतिप्रिय डमरू को बजाने वाली टोली चलेगी। तत्पश्चात् भगवान रूद्र की शोभायमान बारात चलेगी। इसके पीछे पुष्पक विमान में ग्यारह रूद्रपाठी पंडित भगवान महाकाल की महिमा स्त्रोत् सह-स्वर करते हुए चलेंगे।

ठीक उसके पीछे भगवान रूद्र की भव्य अद्भुत शाही सवारी दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रहेगी। भगवान नगर भ्रमण हेतु पधारेंगे। उसके पीछे सभी पुरूष भक्त भगवान महाकाल के जयकारे लगाकर वातावरण को शिवमय बनाते हुए चलेंगे। इस सम्पूर्ण शाही सवारी की सुरक्षा हेतु रूद्र सेना एवं रूद्र वाहिनी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में दोनों ओर सुरक्षा प्रदान करते हुए चलेंगे।

समिति के महिपाल शर्मा ने बताया कि वातावरण का पवित्र बनाने के लिए शाही सवारी में ओगड़ी माता की प्रजवल्लित धुणी चलेगी जो विभिन्न संगुन्धित धूप बत्ती व गूगल की आहूति होंगे जो संपूर्ण शाही सवारी मार्ग को सुगंधित करती हुई चलेगी।

इस बार विशेष: महोत्सव के गोपाल लोहार ने बताया कि शाही सवारी में इस बार 10 फीट लम्बी व 5 फीट चैडी माता कालिका की प्रतिमा रहेगी जो भगवान शिव की छाती पर पैर रखे खड़ी होगी।

बैठक में कार्यक्रम संयोजक रमाकान्त अजारिया सुंदर लाल मांडावत ने बताया कि इस भव्य शोभायात्रा के सम्पूर्ण रास्ते में महाकाल के श्रृद्धालु महाकाल की अगवानी हाथीपोल पर खटीक समाज एवं शनि मन्दिर ट्रस्ट की ओर से भगवान रूद्र, शनिदेव व देवी महाकाली का स्तवन होगा जिसमें भगवान रूद्र व उनके शिष्य शनिदेव द्वारा स्तवन (मिलन) होगा। जगदीश मन्दिर पर भगवान विष्णु भगवान महाकाल का स्वतवन कर पुष्प भेंट करेंगे तथा भगवान महाकाल सुदर्शन – चक्र भेंट करेंगे। जहां पर लधु रूद्र नाटीका का आयोजन होगा।

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