मनुष्य स्वर्णिम इतिहास रचने में पूर्णतया सक्षम
श्रमण संघीय महामंत्री श्री सौभाग्य मुनि 'कुमुद' ने कहा कि विश्व में सब कुछ क्षण क्षण बदल रहा है। आप और हम उसी प्रक्रिया के अन्तर्गत है। अदृश्य रूप से यह प्राकृतिक परिवर्तन धु्रव है इसे कोई रोक नही सकता। क्योंकि यही प्रकृति का सत्य है।
श्रमण संघीय महामंत्री श्री सौभाग्य मुनि ‘कुमुद’ ने कहा कि विश्व में सब कुछ क्षण क्षण बदल रहा है। आप और हम उसी प्रक्रिया के अन्तर्गत है। अदृश्य रूप से यह प्राकृतिक परिवर्तन धु्रव है इसे कोई रोक नही सकता। क्योंकि यही प्रकृति का सत्य है।
वे आज पंचायती नोहरे में विशाल धर्म सभा को संम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस सत्य को आत्मसात करके जीना चाहिये कि प्रकृति हमें कब स्थान परिवर्तन का आदेश दे दे, कुछ भी कहा नही जा सकता। एक मेहमान के अस्तित्व का क्या ठिकाना । यह प्रकृति अपरिहार्य है यह जानकर भी भय भीत नही होना चाहिये। प्रकृति चक्र को कोई रोक नही सकता।
उन्होंने कहा कि हम एक बात कर सकते है कि हम जब तक जीएं किसी महान उद्देश्य के लिए जीएं। सर्वप्रथम हम आपने परिवेश को मंगलमय बनाएं। आनन्द पूर्ण जीने के लियें अपना वातावरण और परिवेश पवित्र होना चाहिये। पवित्र परिवेश में मानव की प्रतिभाओं का जागरण होता है। प्रतिभा का जागरण यहीं मानव जीवन की विशेषता है। मानव जीवन एक स्वर्णीम इतिहास रचने में पूर्णतया सक्षम है। यदि व्यक्ति अपनी प्रतिभा का जागरण कर पाएं तो वह मानव से महामानव का पद पा जाएगा।
आज हम जिन महापुरूषों की जय-जयकार करते है वे मानव ही थे। उन्होंने किसी एक क्षेत्र में ही सही लेकिन अपनी प्रतिभा को इतना विकसित किया कि वह एक इतिहास बन गया। यह विकास हम प्रकृति के सत्य को समझकर ही कर सकते है। मुनि जी ने बताया कि मानव को स्वपरक हो कर जीना चाहिये, क्योंकि प्रतिभा जागरण स्वयं से ही संभव है। हम अक्सर बाह्य पदार्थो व्यक्तियों से बहुत प्रभावित रहते है परिणाम स्वरूप अपनी बु़िद्ध उनमें ही उलझकर रह जाती है।
मुनि जी का कहना था कि परिर्वतन की इस प्रक्रिया से कोई अछूता नही है। अत: बाह्य पदार्थो के प्रति आसक्ति का विकास न करे। अधिक आसक्ति अपनी बुद्धि को किसी खूंटे में बांध देगी। फिर कुछ भी नया नही कर पायेंगे। सभा को कोमल मुनि ने भी सम्बोधित किया तथा कार्यक्रम का संचालन श्रावक संघ मंत्री हिम्मत बड़ाला ने किया।
