वांछित प्रतिफल नहीं मिलने पर अत्यधिक दुखी होता है मनुष्य

श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि कुमुद ने कहा कि कठिनाइयों और अभावों में व्यक्ति अक्सर दु:खी होता है। मनुष्य आकांक्षा रखने पर

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श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि कुमुद ने कहा कि कठिनाइयों और अभावों में व्यक्ति अक्सर दु:खी होता है। मनुष्य आकांक्षा रखने पर वांछित प्रतिफल नहीं मिलने पर काफी दुखी हो जाता है।

वे आज पंचायती नोहरे में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आश्चर्य तो इस बात का है कि व्यक्ति दूसरों को सुखी देखकर अधिक दु:खी होता है। इस तरह के दु:खी होने के कारण तो अनेक है किन्तु इस बात को याद रखना चाहिये की दु:खी होना हमारी चेंतना का स्वभाव नही है। यह एक विकृति है। यदि यह आदत बन जाती है तो व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी परिस्थिति तथा किसी भी अनुकूलता में भी सुख का अनुभव नही करेगा।

उन्होंने बताया कि चेतना तो आनन्द का समुद्र है वहां दु:ख का एक अंश भी नही है किन्तु यह अपनी ही करतूतें होती है। हम आनन्द को उभरने ही नही देते। तुच्छ प्रलोभन और बुराइयों का आचरण कर दु:ख हम स्वयं ही पैदा करते है। तृष्णा की आग एक ऐसी ज्वाला है जिसके जागृत होने पर उसको बुझा पाना बड़ा कठिन हो जाता है।

उन्होंने बताया कि जीवन को आनन्द पूर्वक जीने के दो ही मार्ग है। हम चेतना के आनन्द के स्वरूप को स्वीकार करें। दु:ख विकृति है, दु:खी होना हमारी अनिवार्यता नही है। यह ढृढ़ निर्णय आपके दु:ख को जीवन में जमने नही देगा। आपका जीवन दु:ख का अड्डा नही बनेगा। आनन्दपूर्ण जीने का दूसरा सशक्त साधन है जीवन की आवश्यकताएं कम करें। सादगी के साथ जीए। पारिवारिक सम्बन्धों को निमित समझ कर जीना। ये सम्बन्ध आत्यन्तिक नही है। अस्थायी है यह मनोवृति आपको शोक सागर में ड़ूबने से बचा सकती है। किसी निजी व्यक्ति का वियोग हो जाने पर पुन: उसका संयोग तो होना नही फिर प्रकृति सत्य को स्वीकार कर ही लेना चाहिये।

प्रवचन सभा का शुभारम्भ प्रवर्तक मदन मुनि के सूत्र स्वाध्याय पूर्वक प्रारम्भ हुआ। कोमल मुनि ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन श्रावक संघ मंत्री हिम्मत बड़ाला ने किया। श्रावक संघ अध्यक्ष वीरेन्द्र डांगी ने बताया कि आज श्रावक संघ की सभी महिलाओं ने अपने सुहाग के सुखमय जीवन एंव दीर्घायु की कामना हेतु उपवास रखा।

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