3 साल की उम्र में हुई शादी, कैंसर को हराकर बनीं पुलिस कांस्टेबल, आज 'पुलिसवाली दीदी' के नाम से हैं मशहूर
Udaipur Times, Success story Rajasthan Women Police Constable : "हौसले बुलंद हो तो किस्मत भी झुक जाती है।" यह कहावत राजस्थान की सुनीता चौधरी की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। बाल विवाह, गरीबी और ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
मात्र 3 साल की उम्र में हो गया बाल विवाह

राजस्थान के बाड़मेर जिले के बायतू गांव के एक किसान परिवार में जन्मी सुनीता चौधरी का बचपन संघर्षों से भरा रहा। महज 3 साल की उम्र में उनका बाल विवाह कर दिया गया। उस समय गांव में लड़कियों की पढ़ाई को महत्व नहीं दिया जाता था। आर्थिक तंगी और सामाजिक परंपराओं के चलते परिवार ने उनकी शादी कर दी, लेकिन सुनीता का सपना कुछ और ही था। वह पढ़-लिखकर अफसर बनना चाहती थीं।
छिपकर जाती थी स्कूल
गांव की परंपरा के मुताबिक लड़कियों का काम सिर्फ घर संभालना और खेतों में परिवार का हाथ बंटाना माना जाता था। लेकिन सुनीता ने हार नहीं मानी। वह परिवार से छिपकर स्कूल जाने लगीं। इसके लिए उन्हें कई बार डांट और मार भी सहनी पड़ी, लेकिन पढ़ाई नहीं छोड़ी।
जब वह सिर्फ 5 साल की थीं, तब उन्होंने अपने पिता से कहा कि वह बड़ी होकर अफसर बनना चाहती हैं। उनकी इस इच्छा को पिता का साथ मिला। दिन में खेतों में काम करने के बाद वह रात को लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करती थीं। एक शिक्षक ने भी उनके पिता को समझाया, जिसके बाद उन्हें कम से कम पांचवीं तक पढ़ने की अनुमति मिल गई।
आठवीं में जिला मेरिट में हासिल किया 10वां स्थान

सुनीता पढ़ाई में बेहद होनहार थीं। आठवीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने जिला मेरिट सूची में 10वां स्थान हासिल किया। उनकी इस सफलता ने गांव के लोगों की सोच बदलनी शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें 10वीं और 12वीं तक पढ़ने का मौका मिला। आगे चलकर उनका चयन जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) कोर्स के लिए हो गया।
19 साल की उम्र में बनीं गांव की पहली महिला पुलिस कांस्टेबल
नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल में रहते हुए उन्होंने राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती का फॉर्म भरा। हॉस्टल की करीब 35 लड़कियों ने परीक्षा दी, लेकिन चयन सिर्फ सुनीता का हुआ। महज 19 साल की उम्र में वह अपने गांव की पहली महिला पुलिस कांस्टेबल बन गईं और समाज की कई रूढ़ियों को तोड़ दिया।
"गंजी" कहकर बुलाते थे लोग
साल 2011 में पुलिस सेवा जॉइन करने के दो साल बाद, 2013 में सुनीता को स्टेज-2 ओवेरियन कैंसर होने का पता चला। छह महीने तक चली कीमोथेरेपी के दौरान उनके सारे बाल झड़ गए और वजन घटकर सिर्फ 35 किलो रह गया। कुछ लोग उनका मजाक उड़ाते हुए उन्हें "गंजी" तक कहने लगे।
इलाज पर उनके पिता ने करीब 4 लाख रुपये खर्च किए। इस दौरान कई लोगों ने यह तक कहा कि बेटी पर इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है। इन बातों से सुनीता मानसिक रूप से टूट गईं। वह लोगों से मिलना-जुलना बंद कर चुकी थीं और ड्यूटी के दौरान भी टोपी पहनकर रहती थीं। लेकिन एक दिन पिता को रोते देखकर उन्होंने फैसला किया कि अब हार नहीं मानेंगी।
संगीत बना नई जिंदगी का सहारा

इलाज के दौरान सकारात्मक रहने के लिए सुनीता ने संगीत का सहारा लिया। उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताना शुरू किया और एक संगीत शिक्षक से हारमोनियम बजाना सीखा। संगीत ने उन्हें मानसिक मजबूती दी और जिंदगी को नए नजरिए से जीना सिखाया।
'पुलिसवाली दीदी' के नाम से हुईं मशहूर
कैंसर से पूरी तरह ठीक होने के बाद सुनीता ने समाज सेवा को अपना मिशन बना लिया। वह स्कूलों में जाकर बच्चों को पर्सनल सेफ्टी, गुड टच-बैड टच, सेल्फ डिफेंस और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूक करने लगीं। धीरे-धीरे बच्चे और स्थानीय लोग उन्हें प्यार से "पुलिसवाली दीदी" कहने लगे।
उन्होंने संगीत के जरिए भी सामाजिक जागरूकता फैलाने की शुरुआत की। स्थानीय लेखकों और अपने संगीत शिक्षक की मदद से उन्होंने सरकारी योजनाओं, बेटी बचाओ, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति और अन्य सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता गीत तैयार किए। इन गीतों का खर्च भी उन्होंने खुद उठाया।
कोविड-19 महामारी के दौरान उनके एक जागरूकता वीडियो एल्बम का विमोचन तत्कालीन राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया था।

कई सम्मानों से हो चुकी हैं सम्मानित
सुनीता चौधरी के साहस और समाज सेवा को राजस्थान पुलिस और राज्य सरकार ने कई बार सम्मानित किया है। उन्हें पुलिस महानिदेशक (डीजी) और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2021 में जैसलमेर जिला मुख्यालय और 2023 में राज्य स्तरीय अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह में भी उन्हें सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें राजस्थान सरकार का प्रतिष्ठित 'गार्गी पुरस्कार' भी मिल चुका है।
आज सुनीता चौधरी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जैसलमेर में पुलिस कांस्टेबल के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। साथ ही वह लगातार बेटियों को यह संदेश दे रही हैं कि अगर हौसला मजबूत हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
