दया, परोपकार देकर जाता है पर्युषण: साध्वी अभ्युदया
वासुपूज्य मंदिर स्थित दादाबाड़ी में आराधना के महापर्व पर्युषण के पहले दिन साध्वी अभ्युदया ने कहा कि आज का सूर्योदय कुछ नयापन लेकर आया है। अउरी की किरणें धरती को छुई और आध्यात्मिक संचार हुआ। हाथों में अष्ट प्रकार की सामग्री आ गयी और मंदिर में पहुंचने लगे। भावों में परिवर्तन आ गया। इसका स्वागत करना है। दादाबाड़ी स्थित वासुपूज्य मंदिर में पर्युषण के पहले दिन ही श्रावक-श्राविकाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर स्थित दादाबाड़ी में आराधना के महापर्व पर्युषण के पहले दिन साध्वी अभ्युदया ने कहा कि आज का सूर्योदय कुछ नयापन लेकर आया है। अउरी की किरणें धरती को छुई और आध्यात्मिक संचार हुआ। हाथों में अष्ट प्रकार की सामग्री आ गयी और मंदिर में पहुंचने लगे। भावों में परिवर्तन आ गया। इसका स्वागत करना है। दादाबाड़ी स्थित वासुपूज्य मंदिर में पर्युषण के पहले दिन ही श्रावक-श्राविकाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
उन्होंने कहा कि त्याग पर आधारित जिन शासन है। किसी साधु-साध्वी का पता चलते ही सभी वंदन करते हैं। त्याग की महिमा है। पंच महाव्रतों को धारण करने वाले तपस्वी, त्यागी को नमस्कार है। पर्युषण दया, समान, परोपकार, सरलता, मृदुता, आध्यात्मिक गुण देकर जाता है। इन आठ दिनों में क्रोध, लालच, कलह नही करूँगा। झूठ नहीं बोलूंगा, होटल नहीं जाऊंगा। विरोध भाव वाले लोगों का भी स्वागत करूंगा। जीवन को निर्मल बनाकर अपने जीवन का उद्धार करते हैं। इसे सभी पर्वों का राजा इसीलिए कहते हैं। इन आठ दिन में आत्मा के तत्वों की आराधना की जाती है। आठ कर्मों को तोड़ने के लिए ये आठ दिन रखे हुए हैं। तपस्वियों को एकासने करवाये गए।
इस अवसर पर बीएच बाफना की ओर से भक्तामर स्त्रोत की पुस्तिका का विमोचन कर वितरित की गई। इसके लाभार्थी बीएच बाफना थे।चातुर्मास संयोजक प्रतापसिंह चेलावत ने बताया कि सोमवार को प्रभावना का वितरण राज लोढ़ा एवं परिवार की ओर से किया गया। आंगी के लाभार्थी प्रवीणा बेन मणिलाल डांगा एवं परिवार थे।सह संयोजक दलपत दोशी ने बताया कि मंगलवार को कल्पसूत्र चढ़ावा, 5 ज्ञान पूजा और अष्ट प्रकार की पूजा होगी।
