8वे वेतन आयोग में DA का विलय, वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई समायोजन से लेकर कर्मचारियों की क्या है मुख्य मांगे ?
Udaipur Times, 8th pay commission : 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) अभी परामर्श चरण में है। अगले साल मई में अपनी अंतिम सिफारिशें देने से पहले, यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगी समूहों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव और इनपुट जुटा रहा है।
उम्मीद है कि आयोग वेतन (जिसमें आमतौर पर वेतन संरचना, पे मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर शामिल होते हैं), भत्तों (जैसे DA, DR, HRA) और अन्य सुविधाओं या लाभों (जैसे इंक्रीमेंट, प्रमोशन आदि) की समीक्षा करेगा और इनमें जरूरी व व्यावहारिक बदलावों की सिफारिश करेगा।
इन फैसलों से 1 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा होने की उम्मीद है। इनमें लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं, जिनमें रक्षा और रेलवे मंत्रालयों के मौजूदा कर्मचारी और सेवानिवृत्त लोग भी शामिल हैं।
आयोग ने 22-23 अक्टूबर को मुंबई का आधिकारिक दौरा तय किया है। इस दौरान वे कर्मचारी यूनियनों, प्रतिनिधियों, विभिन्न समूहों, पेंशनभोगी संघों, महासंघों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकें करेंगे।
DA (महंगाई भत्ता) को मूल वेतन में मिलाने (मर्जर) की मांग
कई कर्मचारी यूनियनों और प्रतिनिधि समूहों ने केंद्र सरकार से DA को मूल वेतन में मिलाने (DA मर्जर) के बारे में आधिकारिक घोषणा करने की मांग की है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 7वें CPC में यह प्रावधान था कि यदि DA 50% से अधिक हो जाता है, तो इसे मूल वेतन में मिलाया जा सकता है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब DA मूल वेतन का 60% हो गया है।
गौरतलब है कि सरकार ने अभी तक DA को मूल वेतन में मिलाने (जिससे मूल वेतन बढ़ जाएगा) की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। यह मुद्दा इसलिए जोर पकड़ रहा है क्योंकि मूल वेतन के आधार पर ही मुआवजे के अन्य हिस्से तय होते हैं, जैसे कि प्रोविडेंट फंड (PF) योगदान, पेंशन, भत्ते, ग्रेच्युटी आदि। इसलिए, DA बढ़ने और उसके मूल वेतन में जुड़ जाने से कुल वेतन और उससे जुड़े भत्तों में भी बढ़ोतरी होगी।
न्यूनतम मूल वेतन से जुड़ी मांगें
नेशनल काउंसिल - जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) जैसे बड़े कर्मचारी समूहों ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाने की मांग की है। इन समूहों की मांगें इस प्रकार हैं: NC-JCM: ₹69,000, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: ₹65,000, और AIDEF: ₹69,000।
इस बीच, इंडियन रेलवेज़ टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने मांग की है कि आधुनिक आर्थिक कारकों के आधार पर न्यूनतम वेतन को संशोधित करके ₹52,600 किया जाए और इसके लिए अलग-अलग 'फिक्सेशन फैक्टर' (fixation factors) अपनाए जाएं। वहीं, रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने मांग की है कि न्यूनतम वेतन की गणना 01.01.2026 के मूल्य सूचकांक (price index) के आधार पर की जानी चाहिए।
महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की मांग
इन तीनों संगठनों ने महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी कुछ मांगें रखी हैं: NC-JCM ने 'महंगाई से जुड़े वेतन मॉडल' की मांग की है; महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन ने कम से कम 4% DA बढ़ोतरी और 50% DA के मूल वेतन में विलय (merger) की मांग की है; और AIDEF ने 'महंगाई के अनुसार मुआवजे' की मांग की है।
फिटमेंट फैक्टर (fitment factor) बढ़ाने की मांग
इसके अलावा, IRTSA का कहना है कि रेल मंत्रालय में 'सेफ्टी कैटेगरी' (safety category) के पदों, विशेष रूप से लेवल 6 के पदों के लिए फिटमेंट फैक्टर को उच्च स्तर पर रखा जाना चाहिए। उन्होंने 2.92, 3.50 और 3.80 के फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है।
DA गणना के फॉर्मूले में बदलाव की मांग
AIDEF ने 8वें वेतन आयोग (8th CPC) को सौंपे गए अपने दूसरे ज्ञापन में DA की गणना के तरीके में बदलाव की भी मांग की है। उनका तर्क है कि मौजूदा फॉर्मूले में उन खर्चों को ज्यादा महत्व दिया गया है जो अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं, जबकि कर्मचारी खासकर कम वेतन ग्रेड वाले अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, घर का किराया, दवाइयों और अन्य जरूरी चीजों पर खर्च करते हैं।
8वें वेतन आयोग (8th CPC) की सिफारिशें कब आ सकती हैं?
8वें वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) के अनुसार, पैनल के गठन (3 नवंबर 2025) के 18 महीने के भीतर सिफारिशें घोषित की जानी चाहिए। इस तरह, रिपोर्ट सौंपने की अंतिम समय-सीमा मई 2027 है।
एक बार वेतन आयोग की सिफारिशें आ जाने के बाद, उन्हें पूरी तरह लागू होने में दो से तीन साल और लग सकते हैं। इसका मतलब यह है कि 2027 में घोषित की जाने वाली बढ़ोतरी शायद 2029 या 2030 तक ही पूरी तरह से लागू हो पाएगी।