जयसमंद झील के बीच नाव में आधी रात को हुई डिलीवरी

यसमंद में गुरुवार को आधी रात में लकड़ी की नाव में महिला का प्रसव हुआ। यह कोई फिल्म का सीन नहीं, झील के बीच बसे एक टापू पर बसे लोगों की मजबूरी की हकीकत है। अंधेरे में मोबाइल की रोशनी में प्रसव के बाद महिला की मौत हो गई।

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जयसमंद झील के बीच नाव में आधी रात को हुई डिलीवरीकड़कड़ाती ठंड और खुले आकाश के नीचे एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील जयसमंद में गुरुवार को आधी रात में लकड़ी की नाव में महिला का प्रसव हुआ। यह कोई फिल्म का सीन नहीं, झील के बीच बसे एक टापू पर बसे लोगों की मजबूरी की हकीकत है। अंधेरे में मोबाइल की रोशनी में प्रसव के बाद महिला की मौत हो गई। टापू पर चिकित्सा सुविधा नहीं होने से यहां के लोगों को अक्सर ऐसी मुसीबत से गुजरना पड़ता है। गातोड़ पंचायत का मूंडियाखेत गांव जयसमंद झील के बीच में है।

यहां के अम्बावा मीणा की पत्नी अमरी देवी मीणा उम्र 30 वर्ष की मौत हो गई। अंबावा ने बताया कि गुरुवार रात को प्रसव पीड़ा होने पर रात करीब दो बजे क्षतिग्रस्त लकड़ी की नौका से पत्नी को जयसमंद अस्पताल ले जा रहा था। उसके साथ उसकी चाची गुजरी व समनी मीणा भी सहायता के लिए नाव में सवार हुए।

बीच रास्ते में पत्नी को प्रसव पीड़ा तेज हो गई। इस पर गुजरी मीणा व समनी मीणा ने झील के बीच ही अंधेरे में मोबाइल की रोशनी से प्रसव करवाया। महिला को बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन कुछ ही देर में महिला की तबीयत बिगड़ने और समय पर उपचार नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई। रात के अंधेरे में परिजन रोते बिलखते वापस घर पहुंचे।

शुक्रवार को मृतका के शव को नौका में रखकर करीब दो किलोमीटर दूर श्मशान ले जाकर दाह-संस्कार कराया गया। इस टापू से बच्चे भी नौका व पहाडिय़ों से स्कूल जाते हैं। इधर मासूम बच्ची की तबीयत ठीक बताई गई है।

अम्बावा मीणा ने भास्कर को बताया कि टापू पर पहुंचने के लिए दो साल पहले पगडंडी मार्ग बनाया, लेकिन आधा किलोमीटर तक कार्य कर अधूरा छोड़ा दिया गया। पूर्व में भी तीन महिलाऔ का प्रसव नौका में कराया गया, लेकिन दिन में होने से जन हानि नहीं हुई थी। पूर्व सरपंच शांतिलाल मीणा ने बताया कि नरेगा में रास्ते का कार्य किया था, लेकिन बजट नहीं होने से अधूरा रह गया है।

Source: Dainik Bhaskar

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