हरियाणा में मंत्री विज का बड़ा एक्शन ! 22 से अधिक योजनाओं की फिर खुलेंगी फाइलें, अफसरों को किया तलब
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड में वर्ष 2007 से जुलाई 2023 तक हुई कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। करीब दो वर्ष पहले इस जांच के आदेश देने वाले श्रम मंत्री अनिल विज ने अब जांच में हो रही लगातार देरी पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ही कठघरे में खड़ा किया है।
बुधवार को बुलाइ गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विज न केवल लंबित जांच की प्रगति का ब्योरा लेंगे, बल्कि यह भी पूछेंगे कि बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद रिपोर्ट सरकार तक क्यों नहीं पहुंची। सूत्रों के अनुसार, मंत्री इस बात से नाराज हैं कि वर्षों पुराने मामलों की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में अब अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जांच को तय समयसीमा में पूरा कराने पर फैसला लिया जा सकता है। श्रम मंत्री ने वर्ष 2023 में पूरे प्रकरण की व्यापक जांच के निर्देश दिए थे।
इसके बाद विभागीय स्तर पर कई बार प्रगति रिपोर्ट मांगी गई और अधिकारियों को रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन जांच अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। यही वजह है कि अब पहली बार जांच की धीमी रफ्तार भी सरकार के निशाने पर है। सूत्रों का कहना है कि बुधवार की बैठक में यह भी तय किया जा सकता है कि जांच किस स्तर पर अटकी, किस अधिकारी के पास फाइल लंबित रही और आगे इसकी निगरानी कैसे होगी।
अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच सभी जिलाधीशों के माध्यम से श्रमिक पंजीकरण और निर्माण कार्य के 90 दिन पूरे होने से जुड़े प्रमाणों का विशेष सत्यापन कराया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेजों और रिकॉर्ड पर सवाल उठे। इसके बाद सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए पूरे बोर्ड की कार्यप्रणाली की समीक्षा का फैसला किया।
16 साल का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा
सूत्रों के अनुसार, अब जांच केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं रहेगी। वर्ष 2007 से जुलाई 2023 के बीच बोर्ड के माध्यम से संचालित 22 से अधिक कल्याणकारी योजनाओं, लाभार्थियों के सत्यापन, डीबीटी के जरिए हुए भुगतान, 90 दिन के कार्य प्रमाण, वर्क स्लिप और अन्य रिकॉर्ड की भी विस्तृत पड़ताल होगी।
हाई लेवल कमेटी बनी, फिर ठंडी पड़ गई जांच
जिलाधीशों की रिपोर्ट के बाद सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने कई दौर की बैठकें भी कीं, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने से जांच की गति धीमी पड़ गई। अब सरकार इस पूरी प्रक्रिया को फिर से सक्रिय करने की तैयारी में है।
बैठक क्यों अहम
प्रशासनिक हलकों के अनुसार, यह केवल समीक्षा बैठक नहीं होगी। इसमें जांच की नई समयसीमा तय करने, लंबित बिंदुओं को अंतिम रूप देने और जरूरत पड़ने पर जवाबदेही तय करने जैसे फैसले भी हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद वर्षों से लंबित इस मामले की जांच तेज रफ्तार पकड़ सकती है।
