अविश्वास ने नष्ट किये पारम्परिक मूल्य
श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि मसा. कुमुद ने कहा कि अविश्वास के दौर से गुजरता मानव स्वंय पीड़ा का अनुभव करा रहा है।हम अविश्वास के दौर से गुजर रहे हैं। सब से अनुचित बात तो यह हो गई हैं कि
श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि मसा. कुमुद ने कहा कि अविश्वास के दौर से गुजरता मानव स्वंय पीड़ा का अनुभव करा रहा है।हम अविश्वास के दौर से गुजर रहे हैं। सब से अनुचित बात तो यह हो गई हैं कि हमारा आत्म विश्वास ही भंग हो गया हैं।
कष्ट,पीड़ा व अभाव सहकर वह किसी पर विश्वास ही नहीं कर पा रहा है। अपने परिवार और उसके सदस्य भी आपस में ही अविश्वास की काली छाया में जी रहे हैं। यह स्थिति बहुत दुखद हैं। अच्छाईयों पर से विश्वास डगमगा जाने के कारण व्यक्ति अच्छा करना चाहते हुए भी आत्मविश्वास की कमी से नहीं कर पा रहा हैं। हमारे पारंपरिक श्रेष्ठ मूल्यों के नष्ट होने का कारण भी अविश्वास हैं।
वे आज वे आज पंचायती नोहरे में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होनें कहा कि आत्मविश्वास वह शक्ति हैं जो मानव मन की धरा को गलत रास्ते पर जाने से बचा लेती हैं। मानव जीवन के आधारभूत तत्वों में एक महत्त्वपूर्ण तत्व हैं। विश्वास है तो श्रद्धा है और जहाँ श्रद्धा है वहीं आस्था है। आस्था भी विश्वास का दूसरा नाम हैं। इस गुण को परमात्मा भगवान महावीर ने परम दुर्लभ कहा है।
उन्होनें कहा कि परम दुर्लभ का अर्थ है कि जीवन में मानव विविध प्रकार के पदार्थ और सुविधाएं प्राप्त कर सकता हैं लेकिन जीवन में विश्वास हासिल करना सबसे कठिन कार्य है। मुनिश्री ने कहा कि सभी धर्म श्रद्धा पर जोर देते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि धर्म संस्थान किसी से अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं। धर्म संस्थान तो अपने स्थान पर प्रवर्तित होते ही हैं। श्रद्धावान इससे जुडक़र उसका लाभ उठाते हैं। धर्म श्रद्धा पर इसलिये जो दिया जाता है कि कहीं हम श्रेष्ठत्व के प्रति आश्वस्त हो। व्यक्ति का मानस एक ऐसा तरल पदार्थ हैं कि जिस ओर बह गया, वह बढ़ता रहेगा। यदि उसने गलत कार्य चुन लिया तो उसके जीवन का पतन निश्चित हैं। प्रवचन सभा को श्रमण मुनिजी मसा ने संबोधित किया और कहा कि धर्म के आशय को समझना ही धार्मिकता हैं। कार्यक्रम का संचालन श्रावक संघ महामंत्री हिम्मत बड़ाला ने किया।