उदयपुर के चीरवा गांव निवासी आठवीं पास गोवर्धन बिना किसी इंजीनियरिंग की डिग्री-डिप्लोमा के ही साइंटिस्ट जैसी भूमिका में सामने आया है। चाय की दुकान चलाते-चलाते इसने एक ऐसा उपकरण तैयार कर लिया है, जिसे देख लोग हैरान हैं। पूरे क्षेत्र में वह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। चीरवा में गोवर्धन चाय की दुकान चलाता है। चाय बनाना, लोगों को परोसना और फिर वही चाय के कप धोकर रखना दिनचर्या कुछ ऐसी ही है। इसी दिनचर्या में से उसने अपने लिए कुछ ऐसा कर दिया, जिसे देख बड़े-बड़े साइंटिस्ट भी चकरा जाएं।
उसने चूल्हे को विकसित कर लिया है। जो की न सिर्फ खाना बनाने का काम करता है बल्कि इससे बिजली भी बनती है। यह चूल्हा थ्री-इन-वन के रूप में काम करता है। इस चूल्हे से जिस समय चाय बनती है, उसी समय खाना भी बन जाता है। यही नहीं इसी दौरान बिजली भी बनना शुरू हो जाती है। यानी चाय और खाना एक साथ वो भी एक ही चूल्हे से। यानी दोगुनी ईंधन की बचत। साथ ही उसी ईंधन से घर के लिए बिजली भी तैयार।
गोवर्धन ने इस चूल्हे में कॉइल के साथ में एक छोटा पावर जेनरेटर जोड़ दिया है। यह गर्म धुएं और हीट में काम करता है। जैसे ही इस चूल्हे में लकड़ी या उपले डालते हैं, हीट और धुआं पैदा होता है। इसी धुआं से चूल्हे में लगा इंजन गर्मी के प्रेशर से काम करना शुरू कर देता है। बस इसी से इंजन काम करना शुरू कर देता है और बिजली बनने लगती है। इस चूल्हे में एक स्विच बोर्ड भी लगा दिया है। इस स्विच से चूल्हे में बनी बिजली को अपने काम में लिया जा सकता है। इससे इतनी बिजली तो बन ही जाती है कि एक मोबाइल चार्ज हो जाए। घर में रोशनी हो सके।गोवर्धन ने 2 माह की मेहनत में यह काम कर दिखाया है।
Source: Dainik Bhaskar
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