यूपी-हरियाणा समेत कई राज्यों में मानसून की कमी ! अब अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण बढ़ी किसानों की टेंशन

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यूपी-हरियाणा समेत कई राज्यों में मानसून की कमी ! अब अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण बढ़ी किसानों की टेंशन 

Udaipur Times, Crop Survey and Data Systems : देश में सामान्य से कम मानसून के बीच खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर पहले ही चिंता बनी हुई है। इस बीच सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की एक समीक्षा रिपोर्ट में कृषि डेटा संग्रह प्रणाली (Crop Statistics System) की कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों में फसल सर्वे समय पर पूरा नहीं हुआ, गांवों के नक्शे दशकों पुराने हैं और कई जगह फसल उत्पादन का आकलन अप्रशिक्षित कर्मचारियों से कराया गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 'गिरदावरी', यानी गांवों के राजस्व अधिकारियों द्वारा किया जाने वाला फसल सर्वे, देश के आधे से भी कम हिस्से में समय पर पूरा हो सका। यही आंकड़े कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) और सरकार द्वारा खाद्य उत्पादन के अनुमान तैयार करने में इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हीं अनुमानों के आधार पर सरकार निर्यात-आयात नीति, खाद्यान्न भंडारण और महंगाई नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेती है।

इन राज्यों में फसल सर्वे अधूरा

रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में वर्ष 2023-24 के दौरान गिरदावरी समय पर पूरी नहीं हो सकी।
स्थिति यह रही कि शुरुआती खरीफ सीजन में केवल 43 प्रतिशत, देर से खरीफ में 46 फीसदी, रबी में 48 प्रतिशत और गर्मी के मौसम में महज 33 प्रतिशत सैंपल गांवों में ही फसल सर्वे समय पर पूरा हो पाया।

20 साल पुराने नक्शों से बढ़ी परेशानी

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि देश के 63 प्रतिशत गांवों के भूमि नक्शे 20 साल से अधिक पुराने हैं। इन पुराने नक्शों में शहरीकरण, नई सड़कें, निर्माण और भूमि उपयोग में हुए बदलाव दर्ज नहीं हैं, जिससे सर्वे और भूमि की सही पहचान करने में दिक्कत आती है।

पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में सभी गांवों के नक्शे दो दशक से अधिक पुराने हैं। वहीं ओडिशा (99%), उत्तराखंड (98%), असम (94%), तमिलनाडु और झारखंड (93%) में भी अधिकांश नक्शे पुराने हैं। इसके विपरीत गुजरात में केवल 5 फीसदी गांवों के नक्शे 20 साल से अधिक पुराने पाए गए।

अप्रशिक्षित कर्मचारियों से कराए गए सर्वे

रिपोर्ट में फसल उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए किए जाने वाले क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट (CCE) पर भी सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2023-24 में करीब 12 लाख CCE किए जाने थे, लेकिन कई राज्यों में यह काम प्रशिक्षित अधिकारियों के बजाय जूनियर या अप्रशिक्षित कर्मचारियों से कराया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में करीब 40 प्रतिशत CCE अप्रशिक्षित कर्मचारियों ने किए। वहीं मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी 10 प्रतिशत से अधिक सर्वे जूनियर कर्मचारियों के भरोसे किए गए।

सरकार ने सुधार की जरूरत बताई

रिपोर्ट में राज्यों को निर्देश दिया गया है कि फसल सर्वे समय पर पूरा कराया जाए, गांवों के नक्शों को नियमित रूप से अपडेट किया जाए और वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षित कर्मचारियों के माध्यम से फसल उत्पादन का आकलन किया जाए। इससे कृषि उत्पादन के आंकड़े अधिक सटीक होंगे और सरकार खाद्य सुरक्षा तथा कृषि नीति से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले सकेगी।

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