जल तरंग की गूंज से गुंजायमान हुआ बाड़ी महल

मर्दाना महल में तीन दिवसीय म्यूजिकल नाइट का दूसरा दिन

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mardana

उदयपुर 11  चीनी मिट्टी के प्यालों पर बेंत की छड़ी के सहारे रागों की गूंज से सोमवर को सिटी पैलेस का  गुंजायमान हो गया।  महाराण मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन की ओर से तीन दिवसीय म्यूजिकल नाइट का सिटी पैलेस में आयोजन किया गया। दूसरे दिन जलतरंग के कलाकार नंदलाल गंधर्व और कपिल गंधर्व ने तबला पर संगत की। सम्मोहित करती प्यालों पर लय-ताल की खनक ने दर्शकों को मनमोहित कर दिया। शास्त्रीय संगीत में 16 मात्रा के साथ जल तरंग पर जुगलबंदी की।

मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का कहना है कि मेवाड़ कला और संस्कृति का प्राचीनकाल से ही संरक्षण करता आ रहा है और आगे भी करता करेगा। महाराणा कुम्भा का कला और भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी स्वर्णिम काल रह चुका है, जो भारतीय इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। तीसरे दिन मंगलवार कार्तिक पूर्णिमा को सौरभ देहलवी (सितार) और रितिक कुमावत (तबला) की प्रस्तुति होगी।

यह है जल तरंग

- वेदों में वोदक वाद्य के रूप में इसका उल्लेख है। 

- 21 प्याले कतारबद्ध सजाए जाते हैं। इन्हीं प्यालों के बीच सप्तक निहित होता है। 

- बेंत या बांस की छड़ी के सहारे प्यालों पर स्वरों की होती है अवतारणा

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