म्हारी छोरियां किसी से कम नहीं, हरियाणा की बेटी शेना ने MBBS एंट्रेंस टॉप कर UPSC में हासिल की 19वीं रैंक
Udaipur Times, IAS Shena Aggarwal : UPSC और NEET-UG को देश की सबसे मुश्किल और कड़ी टक्कर वाली परीक्षाओं में से दो माना जाता है। जहां UPSC के लिए 8-9 लाख उम्मीदवारों में से सिर्फ एक हजार के आस-पास उम्मीदवार चुने जाते हैं, वहीं NEET-UG देने वाले 20 लाख छात्रों में से सिर्फ 1.30 लाख छात्रों को MBBS की सीट मिलती है। लाखों उम्मीदवार इन परीक्षाओं की तैयारी में सालों बिताते हैं और कई बार कोशिश करते हैं। फिर भी, कुछ बहुत होनहार छात्र ऐसे भी होते हैं जो अच्छी रैंक के साथ ये दोनों परीक्षाएं पास कर लेते हैं।
आज हम उनकी बात कर रहे हैं जिन्होंने ना सिर्फ़ MBBS एंट्रेंस एग्ज़ाम CBSE PMT (जिसे अब NEET-UG के नाम से जाना जाता है) बल्कि UPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी टॉप किया। यह कहानी हरियाणा की IAS अधिकारी डॉ. शेना अग्रवाल की है, जिन्होंने देश की दो सबसे मुश्किल परीक्षाओं में टॉप करके यह साबित कर दिया कि छोरियां किसी से कम नहीं हैं।
जॉइंट डेवलपमेंट कमिश्नर (IRD) और एडिशनल कमिश्नर (NREGA) के तौर पर तैनात
अपनी सफलता के ज़रिए, शेना ने हरियाणा के उन लोगों को एक कड़ा संदेश दिया जो बेटियों को गर्भ में ही मार देते हैं या उन्हें बोझ समझते हैं। खराब लिंगानुपात (sex ratio) के लिए बदनाम राज्य से होने के बावजूद, उन्होंने अपनी काबिलियत से यह दिखाया कि बेटियों को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए; बल्कि, वे अपने परिवार, समाज और देश का गौरव होती हैं। लड़कियां वे सभी मुकाम हासिल कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं। आज, शेना अग्रवाल पंजाब कैडर की 2012 बैच की IAS अधिकारी हैं। वह अभी जॉइंट डेवलपमेंट कमिश्नर (IRD) और एडिशनल कमिश्नर (NREGA) के तौर पर काम कर रही हैं।
10वीं में 95 प्रतिशत और 12वीं में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए
IAS शेना अग्रवाल मूल रूप से हरियाणा के यमुनानगर की रहने वाली हैं। उनके पिता, डॉ. केसी अग्रवाल, एक डेंटिस्ट हैं। शेना स्कूल के दिनों से ही पढ़ाई में बहुत होनहार थीं। उन्होंने संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल (यमुनानगर) से 10वीं की पढ़ाई पूरी की और 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने दयानंद पब्लिक स्कूल (नाभा) से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और 92 प्रतिशत अंक हासिल किए।
AIIMS एंट्रेंस एग्जाम में 19वीं रैंक हासिल की
शेना ने 2004 में पूरे देश में CBSE प्री-मेडिकल टेस्ट में टॉप किया। उन्होंने AIIMS एंट्रेंस एग्जाम में 19वीं रैंक हासिल की। उन्होंने AIIMS, दिल्ली से MBBS की पढ़ाई की और डॉक्टर बनीं। MBBS की डिग्री लेने के बाद उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि गरीबी से बड़ी कोई बीमारी नहीं है।
मेडिकल का फील्ड छोड़ IAS अफसर बनने का फैसला लिया
AIIMS से MBBS पूरा करने के बाद एक गांव में इंटर्नशिप के दौरान, शेना ने देखा कि देश में सिर्फ़ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मुकाबले गरीबी एक बहुत बड़ी समस्या है। उन्हें लगा कि एक डॉक्टर के तौर पर इलाज करने की उनकी क्षमता सीमित है, जबकि IAS अफ़सर बनकर वह बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव ला सकती हैं। उन्हें एहसास हुआ कि ऊंचे प्रशासनिक पद पर रहे बिना वह इस सामाजिक समस्या का पूरा समाधान नहीं कर सकतीं। इसी सोच के साथ, उन्होंने IAS अफसर बनने का फैसला किया।
दूसरे प्रयास में UPSC पास किया, तीसरे में टॉप किया
उन्होंने 2009 में अपनी MBBS इंटर्नशिप पूरी करते हुए पहली बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी। हालांकि वह शुरुआती चरण (प्रीलिम्स) पास नहीं कर पाईं, लेकिन उन्होंने इसे हार नहीं, बल्कि परीक्षा को बेहतर ढंग से समझने का एक मौका माना।
उन्होंने 2010 में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर काम करते हुए दूसरी बार परीक्षा दी। इस बार वह सफल रहीं और 305वीं रैंक हासिल करके इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) के लिए चुनी गईं।
तीसरे प्रयास में UPSC में पूरे देश में टॉप किया
शेना अग्रवाल अपनी IRS ट्रेनिंग के लिए नागपुर जाने की तैयारी कर रही थीं, तभी 2011 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे घोषित हुए। अपने तीसरे प्रयास में, उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की।