नमो भारत की बढ़ेगी कनेक्टिविटी ! दिल्ली-यूपी, हरियाणा और राजस्थान तक सफर करना होगा बिल्कुल आसान

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नमो भारत की बढ़ेगी कनेक्टिविटी ! दिल्ली-यूपी, हरियाणा और राजस्थान तक सफर करना होगा बिल्कुल आसान 

Udaipur Times, New Delhi : दिल्ली को 2047 तक दुनिया के आधुनिक महानगरों की कतार में खड़ा करने की तैयारी के तहत राजधानी के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में मेट्रो विस्तार के साथ नमो भारत, रीजनल रेल, ऑर्बिटल कनेक्टिविटी और हाई-स्पीड रेल जैसे विकल्पों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसका मकसद सिर्फ दिल्ली के अंदर ट्रैफिक कम करना नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में बदलना है।

अगर प्रस्तावित योजनाएं तय दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में हापुड़, बागपत, सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, मानेसर, बहादुरगढ़ और राजस्थान के अलवर जैसे शहरों से दिल्ली की कनेक्टिविटी पहले के मुकाबले काफी तेज हो सकती है।
इस बदलाव का असर सिर्फ आने-जाने पर नहीं पड़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी के साथ NCR में रियल एस्टेट, रोजगार, कारोबार और कमर्शियल गतिविधियों के नए केंद्र भी विकसित हो सकते हैं।

2047 तक कैसी होगी दिल्ली की कनेक्टिविटी?

मास्टर प्लान की बड़ी सोच दिल्ली को सिर्फ एक शहर के रूप में विकसित करने के बजाय उसे आसपास के NCR शहरों के साथ एक जुड़े हुए शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित करने की है।

इसके तहत मेट्रो, नमो भारत, रीजनल रेल और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के बीच बेहतर इंटरकनेक्टिविटी पर जोर दिया जा रहा है।

इसका फायदा यह होगा कि दिल्ली आने वाले यात्रियों को हर बार शहर के अंदर तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। NCR के अलग-अलग शहरों के बीच भी सीधे यात्रा के विकल्प बढ़ सकते हैं।

दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में बड़ा विस्तार

दिल्ली मेट्रो इस पूरे नेटवर्क की रीढ़ बनी रहेगी। मौजूदा नेटवर्क करीब 416 किलोमीटर का है और इसमें 300 से ज्यादा स्टेशन हैं।

मास्टर प्लान के तहत आने वाले वर्षों में मेट्रो नेटवर्क में करीब 279 किलोमीटर का और विस्तार प्रस्तावित है। इसमें करीब 104 किलोमीटर के रूट पर काम चल रहा है, जबकि लगभग 175 किलोमीटर अतिरिक्त विस्तार की योजना बताई गई है।

एयरोसिटी से तुगलकाबाद तक गोल्डन लाइन

फेज-4 की गोल्डन लाइन के तहत एयरोसिटी से तुगलकाबाद तक करीब 23.6 किलोमीटर का कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।

इससे दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों को IGI एयरपोर्ट के साथ बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के साथ आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

जनकपुरी वेस्ट से आरके आश्रम तक मजेंटा लाइन

मजेंटा लाइन का जनकपुरी वेस्ट-आरके आश्रम विस्तार करीब 29 किलोमीटर का है।

इसके पूरा होने के बाद पश्चिमी दिल्ली और मध्य दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही मौजूदा मेट्रो नेटवर्क पर यात्रियों के दबाव को अलग-अलग रूटों में बांटने में मदद मिल सकती है।

पिंक लाइन से बनेगा रिंग मेट्रो नेटवर्क

मजलिस पार्क से मौजपुर तक पिंक लाइन का करीब 12.5 किलोमीटर विस्तार दिल्ली के मेट्रो नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके पूरा होने के बाद दिल्ली को एक बड़े रिंग मेट्रो नेटवर्क का फायदा मिल सकता है। इससे यात्रियों को हर यात्रा के लिए केंद्रीय दिल्ली की ओर जाने की जरूरत कम होगी और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों के बीच सीधे कनेक्शन बढ़ेंगे।

इसके अलावा इंदरलोक-इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर करीब 12.3 किलोमीटर और लाजपत नगर-साकेत जी-ब्लॉक कॉरिडोर करीब 8.4 किलोमीटर का प्रस्तावित विस्तार है।

दिल्ली से हरियाणा तक बढ़ेगी मेट्रो की पहुंच

फेज-5ए के तहत रिठाला-नरेला-कुंडली रेड लाइन एक्सटेंशन करीब 26.5 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है।

इसका महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि इससे दिल्ली की मेट्रो कनेक्टिविटी हरियाणा के कुंडली तक पहुंच सकती है। दिल्ली-हरियाणा सीमा के आसपास रहने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मजबूत होगा।

इसी तरह नोएडा सेक्टर-62 से साहिबाबाद तक करीब 5.1 किलोमीटर और वैशाली से मोहन नगर तक करीब 5 किलोमीटर के मेट्रो विस्तार की योजनाएं भी NCR की कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकती हैं।

नमो भारत से बदलेगा पूरा NCR

मेट्रो के साथ नमो भारत यानी रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) NCR के लिए सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

नमो भारत का उद्देश्य दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच तेज और नियमित कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इसकी मदद से लोग NCR के दूर स्थित शहरों में रहकर भी दिल्ली में नौकरी या कारोबार कर सकेंगे।

आने वाले समय में हापुड़, बागपत, सोनीपत, गुरुग्राम, मानेसर और अन्य NCR क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से इन शहरों का दिल्ली से जुड़ाव और मजबूत हो सकता है।

दिल्ली से बाहर रहकर भी आसान होगा रोजाना सफर

इस पूरे नेटवर्क का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि लोगों को दिल्ली में घर खरीदना ही जरूरी नहीं रहेगा।

अगर कोई व्यक्ति सोनीपत, बागपत, हापुड़, गुरुग्राम या मानेसर में रहता है और तेज सार्वजनिक परिवहन के जरिए करीब एक से डेढ़ घंटे में दिल्ली पहुंच सकता है, तो वह NCR के दूसरे शहरों में रहकर भी दिल्ली में काम कर सकता है।

इससे दिल्ली के अत्यधिक महंगे आवासीय बाजार पर दबाव कम होने के साथ आसपास के शहरों में मांग बढ़ सकती है।

NCR में बनेगा नया ग्रोथ कॉरिडोर

रियल एस्टेट सेक्टर के जानकारों के मुताबिक, बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी से NCR में विकास का केंद्र धीरे-धीरे दिल्ली से बाहर की ओर फैल सकता है।

जहां आज दिल्ली के आसपास के कुछ इलाकों में कनेक्टिविटी की कमी के कारण विकास सीमित है, वहीं तेज रेल और मेट्रो कनेक्शन मिलने के बाद वहां नए आवासीय और कमर्शियल हब विकसित हो सकते हैं।

इसका असर खास तौर पर उन इलाकों पर पड़ सकता है इसप्रकारनमो भारत स्टेशन बन रहे हैं या प्रस्तावित हैं।

मेट्रो कॉरिडोर का विस्तार हो रहा है।

हाईवे और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी मौजूद है।

रोजगार और औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

बड़े कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं।

अलवर, पानीपत और दूसरे शहर भी जुड़ेंगे

2047 की व्यापक NCR कनेक्टिविटी का उद्देश्य दिल्ली को सिर्फ नजदीकी शहरों से जोड़ना नहीं है। लंबी दूरी की रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ अलवर, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम, मानेसर, बहादुरगढ़, हापुड़ और बागपत जैसे शहरों के बीच आवागमन आसान बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

इसका मतलब है कि NCR भविष्य में सिर्फ दिल्ली के आसपास का इलाका नहीं रहेगा, बल्कि कई शहरों को जोड़ने वाला एक बड़ा आर्थिक और परिवहन क्षेत्र बन सकता है।

दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन से हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

रीजनल ट्रांसपोर्ट के अलावा दिल्ली को देश के दूसरे बड़े शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क भी महत्वपूर्ण होगा।

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल जैसी परियोजनाएं पूरी होने पर दिल्ली से दूर के शहरों तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है।

इससे दिल्ली की कनेक्टिविटी सिर्फ NCR तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के प्रमुख आर्थिक और धार्मिक केंद्रों के साथ भी तेज परिवहन नेटवर्क विकसित होगा।

24 घंटे सक्रिय शहर की ओर दिल्ली

मास्टर प्लान 2047 में ट्रांसपोर्ट के साथ नाइट-टाइम इकोनॉमी को भी बढ़ावा देने की सोच दिखाई देती है।

अगर सार्वजनिक परिवहन, कमर्शियल गतिविधियां, मनोरंजन और जरूरी सेवाएं ज्यादा समय तक उपलब्ध रहती हैं, तो दिल्ली की अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त गति मिल सकती है।

मुंबई की तरह दिल्ली में भी भविष्य में ऐसे इलाके विकसित किए जा सकते हैं जहां रात के समय भी कारोबार, मनोरंजन, रेस्टोरेंट और दूसरी आर्थिक गतिविधियां सक्रिय रहें।

हालांकि इसके लिए सिर्फ मेट्रो या नमो भारत पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षा, स्ट्रीट लाइटिंग, पुलिसिंग, सार्वजनिक सुविधाओं और 24 घंटे चलने वाली परिवहन व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी होगा।

प्रॉपर्टी बाजार के बढ़ने के रहेंगे आसार ?

इस पूरे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का सबसे बड़ा असर NCR के रियल एस्टेट बाजार पर पड़ सकता है।

दिल्ली में जमीन और घरों की कीमतें पहले से काफी ज्यादा हैं। ऐसे में तेज सार्वजनिक परिवहन लोगों को आसपास के शहरों में घर खरीदने के लिए आकर्षित कर सकता है।

नमो भारत और मेट्रो स्टेशन के आसपास आने वाले समय में:

रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट, किराये के मकान, ऑफिस, शॉपिंग सेंटर, होटल और मिश्रित उपयोग वाले डेवलपमेंट बढ़ सकते हैं।

लेकिन प्रॉपर्टी खरीदारों को केवल भविष्य की घोषणा के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए। किसी भी इलाके में निवेश से पहले परियोजना की मंजूरी, वास्तविक निर्माण की स्थिति, स्टेशन का फाइनल अलाइनमेंट, कनेक्टिविटी और समयसीमा की जांच करना जरूरी होगा।

2047 तक दिल्ली की तस्वीर कितनी बदल सकती है?

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दिल्ली को एक अकेले शहर के बजाय पूरे NCR के केंद्र में मौजूद एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में देखने की कोशिश की जा रही है।

मेट्रो दिल्ली के भीतर तेज कनेक्टिविटी देगी, नमो भारत NCR के शहरों को जोड़ेगा और हाई-स्पीड रेल दिल्ली को देश के दूर-दराज के शहरों से जोड़ने में भूमिका निभा सकती है।

अगर इन योजनाओं का क्रियान्वयन तय दिशा में होता है, तो आने वाले दो दशकों में दिल्ली-NCR में रहने, काम करने और यात्रा करने का तरीका काफी बदल सकता है।

यानी 2047 की दिल्ली सिर्फ एक राजधानी नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के आसपास के शहरों को तेज रेल और सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाला एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र बन सकती है।

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