नवदम्पत्ती ने विवाह समारोह में लिया जल बचाने का संकल्प
सोनल कोठारी ने अपने विवाह संस्कार मंे शहर को सुन्दर एवं विकसित बनाने के लिए ऐतिहासिक पहल की। सोनल कोठारी एवं उनके जीवन साथी यशवन्त बोकडि़या ने साझा निर्णय लेकर एक ओर समस्त विवाह की वर-वधु दोनों पक्षो के रिस्मो रिवाजो के साथ-साथ पाणी ग्रहण संस्कार एवं भोज का आयोजन एक साथ कर युवा पीढी को फिजुल खर्ची से बचने का उदाहरण प्रस्तुत किया।

सोनल कोठारी ने अपने विवाह संस्कार मंे शहर को सुन्दर एवं विकसित बनाने के लिए ऐतिहासिक पहल की। सोनल कोठारी एवं उनके जीवन साथी यशवन्त बोकडि़या ने साझा निर्णय लेकर एक ओर समस्त विवाह की वर-वधु दोनों पक्षो के रिस्मो रिवाजो के साथ-साथ पाणी ग्रहण संस्कार एवं भोज का आयोजन एक साथ कर युवा पीढी को फिजुल खर्ची से बचने का उदाहरण प्रस्तुत किया।
वही दूसरी ओर विवाह में आए सभी मेहमानो से शहर को स्वच्छ सुन्दर एवं व्यवस्थित बनाने के लिए अपना-अपना सहयोग समन्वय के साथ करने का अनुरोध किया। तथा जल का दुरूपयोग न करने का आग्रह किया कि किस प्रकार पानी को बचाया जा सकता है जैसे पानी को व्यर्थ न बहाए, पानी को रक्षित करे, नल को खुला ना छोड़े इस नव दम्पति ने विवाह समारोह मे जल बचाने के लिए अपने दैनिक जीवन मे विविध सुधारात्मक कदम उठाने के लिए आग्रह किया।
विवाह समारोह मंे आये सभी आगन्तुको ने युवा जोड़े के शहरी प्रेम का समर्पण की तालिया बजा कर जोर शोर से उत्साहवर्द्धन किया।
इस अवसर पर दूल्हा दूल्हन के साथ-साथ उनके माता-पिता श्रीमती साधना देवी एवं श्रीमान् चतरसिंह कोठारी एवं वर पक्ष के माता-पिता श्रीमती विमला देवी एवं श्रीमान् सुरेश जी बोकडिया द्वारा पधारे सभी आगन्तुकों से जल बचाव के उपायों का विनम्र अनुरोध किया जिसे बारातियों एवं मेहमानों ने सहर्ष समर्थन दिया गया। इस अनोखे प्रयास को सभी मेहमानों ने भाव-विभोर होकर जल ही देवता है के नारे के साथ जल बचाव की प्रतिज्ञा ली।