सतत खाद्यान आपूर्ति हेतु अविरल हरित क्रांति की आवश्यकता – डॅा. नाग
दि इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) उदयपुर लोकल सेंटर तथा प्रौद्योगिकी एंव कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के सयुक्त तत्वावधान में कृषि अभियताओं की दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन आज दि इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया)स्थित स्वतंत्रता सैनानी एम.पी. बया सभागर में हुआ।

दि इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) उदयपुर लोकल सेंटर तथा प्रौद्योगिकी एंव कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में कृषि अभियंताओं की दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन आज दि इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया)स्थित स्वतंत्रता सैनानी एम.पी. बया सभागर में हुआ।
समारोह के विशिष्ट अतिथि एस.चन्द्रा, निदेशक, इंण्डियन सोसाईटी ऑफ एग्रोबिजनेस प्रोफेशनलस, नई दिल्ली ने बताया कि अब काश्तकार नवीन तकनीक अपनाने हेतु तत्पर हो रहें है, क्येांकि कृषि मे घटती श्रमिक उपलब्धता और बढती आदान लागत ने मशीनीकरण की ओर उन्हें आकृष्ट किया है।
इस समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. के.एन. नाग, पूर्व कुलपति, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने आयोजकों को इस राष्ट्रिय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए अपना उद्बोदन दिया।
डॉ. नाग ने बताया कि भारत वर्ष में स्वाधीनता के समय से अब तक लगभग साढे छः गुणा अनाज उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है। इस उपलब्धि के बावजूद भी जनंसख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप सतत खाद्यान्न आपूर्ति में कमी की संभावना है। इन परिस्थितियों को अवरिल हरितक्रांति के द्वारा ही दूर किया जा सकता है।
इस संगोष्ठी का मुख्य विषय के अन्तर्गत चार सत्रों मे आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में परिशुद्ध कृषि, द्वितीय सत्र मूल्य सर्वधन एवं नवीनीकरण ऊर्जा, तृतीय सत्र कृषि शक्ति एवं यंत्र और अंतिम सत्र मृदा एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी के कुल 53 शोघ पत्रों में से 37 का वाचन किया गया।
