बाल श्रम में रेस्क्यू से ज्यादा पूर्नवास पर ध्यान देने की आवश्यकता
उदयपुर 7 नवंबर 2019 ।बाल श्रम एवं तस्करी को जड़ से खत्म करने के लिए यह आवश्यक है कि रेस्क्यू किए गए बच्चो की विधिवत काउसंलिंग, मेडिकल एवं समझाइश कर मुख्यधारा से जोडे़, अन्यथा बच्चे पूनः बाल श्रम में संलग्न होने की सम्भावना के खतरे में रहेंगे।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राजस्थान सरकार की अध्यक्ष संगीता बेनिवाल के मार्गदर्शन में उच्च स्तरिय जांच कमेटी पूरे प्रदेश में बाल श्रम को जड़ से खत्म करने हेतु उदयपुर में हाल ही में रेस्क्यू हुए बच्चो के मामले की जांच में लगी है।
उक्त विचार राजस्थान बाल आयोग के सदस्य एवं जे. जे. प्रभारी डाॅ. शैलेन्द्र पण्ड्या ने अपनी उदयपुर यात्रा के दौरान उदयपुर जिला कलक्टर आनन्दी के साथ बैठक पश्चात् स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
डाॅ. पण्ड्या ने बताया कि जांच कमेटी में उदयपुर जिला प्रशासन से मान्धाता सिंह राणावत, मानव तस्करी विरोधी यूनिट से श्याम सिंह एवं बाल कल्याण समिति से डाॅ. राजकुमारी भार्गव सम्मिलित है।
झाड़ोल पंचायत समिति में बाल श्रम के कई मामलों को देखते हुए झाड़ोल उप जिला मजिस्ट्रेट (आई.ए.एस.) डाॅ. टी. शुभमंगला ने कल 08.11.2019 से ब्लाॅक स्तरिय बाल संरक्षण समिति का आमुखिकरण कार्यक्रम झाड़ोल पंचायत समिति सभागार में रखा है। जिसमें मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के तौर पर राजस्थान बाल आयोग के सदस्य डाॅ. शैलेन्द्र पण्ड्या एवं सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग मीना शर्मा उपस्थित होंगे।
कल आयोजित कार्यक्रम में पूरी पंचायत समिति अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंचायत प्रधान, ब्लाॅक स्तरिय अधिकारी एवं ब्लाॅक में कार्यरत स्वयं सेवी संगठन उपस्थित रहेंगे।
उदयपुर यात्रा एवं जांच में प्राप्त तथ्यों को 3 दिवस में जाँच कमेटी रिर्पोट बनाकर बाल आयोग अध्यक्ष को प्रस्तुत करेगी।