अपने ग्राहक को कभी हाथ से नहीं जाने दे
“एक ढाबे पर खाने में तथा एक पांच सितारा होटल में खाना खाने में क्या अन्तर है ? इसका जवाब यह है कि ढाबे में जाने वाले ग्राहक की अपेक्षाएं सीमित होती है जबकि पांच सितारा होटल में जाने वाला ग्राहक खाने की गुणवत्ता, स्वाद, स्वच्छता, परोसे जाने का ढंग आदि को लेकर बहुत ज्यादा […]
“एक ढाबे पर खाने में तथा एक पांच सितारा होटल में खाना खाने में क्या अन्तर है ? इसका जवाब यह है कि ढाबे में जाने वाले ग्राहक की अपेक्षाएं सीमित होती है जबकि पांच सितारा होटल में जाने वाला ग्राहक खाने की गुणवत्ता, स्वाद, स्वच्छता, परोसे जाने का ढंग आदि को लेकर बहुत ज्यादा सजग होता है तथा इन्हीं सेवाओं का वह भुगतान अदा करता है।’’ उपरोक्त विचार श्री संजय सिंघल ने यूसीसीआई में व्यक्त किये।
उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा यूसीसीआई भवन के पायरोटेक टेम्पसन्स सभागार में क्वालिटी पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में सिक्योर मिटर्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री संजय सिंघल मुख्य वक्ता थे। श्री संजय सिंघल ने क्वालिटी विषय पर अपने सम्बोधन में प्रतिभागियों को निम्नानुसार जानकारी दी
अपने ग्राहक को कभी हल्के से न ले और हाथ से नहीं जाने दवें। ग्राहक को खोने का अर्थ व्यवसाय में नुकसान उठाना है जिसकी भरपाई संभवतः संभव नहीं है। यदि आप व्यवसाय में गुणवत्ता से समझौता करते है तो आप अपने लाभ को खतरे में डालते है। आपके उत्पाद में दो प्रतिशत डिफेक्ट को दूर करने के लिये सामान्यतया आपको सिर्फ 0.1 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है लेकिन अन्ततः इससे आपके लाभ में वृद्धि ही होगी। यदि अपने उत्पाद अथवा सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना चाहते है तो प्रत्येक प्रक्रिया आपके नियंत्रण में होनी चाहिए। इसके लिये आपको योजनाबद्ध प्रक्रिया तैयार करनी होगी।
व्यवसाय का अर्थ लगातार लाभ अर्जित करना है। अतः यदि व्यवसाय में लगातार लाभ अर्जित करना चाहते है तो गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करें। यदि आप सर्विस व्यवसाय में है तो यह महत्त्वपूर्ण है कि आप ग्राहक से कैसे व्यवहार करते है। कई बार सेवा व्यवसाय में गलती हो जाने पर उन गलतियों से सीख कर अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास करें। सेवा व्यवसाय में उपयुक्त कर्मचारी को नौकरी पर रखने के साथ प्रशिक्षण प्रदान कर ऐसा वर्क कल्चर तैयार करें जिससे आपकी ब्रांड ईमेज बन सके।
कार्य स्थल के वातावरण में इस प्रकार का माहौल तैयार करें कि कर्मचारी सावधानी से बिना लापरवाही के सहजता से कार्य कर सके। कोई नई तकनीक बाजार में आने पर तुरन्त अपनाने के बजाय कुछ समय उसकी उपयुक्तता पर गौर करें। रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन से लागत में कमी नहीं आती है। हालांकि इससे आपके प्रोडक्ट में निरन्तरता बनी रहती है। गलती हो जाने पर अपना समय एवं ऊर्जा गलती करने वाले को ढूंढने और सजा देने में बर्बाद करने के बजाय गलती से होने वाले कारण के समाधान पर ध्यान दे तथा ऐसी प्रक्रिया तैयार करें कि उस गलती की पुर्नरावृत्ति न हो।
सेमिनार के आरंभ में अध्यक्ष श्री हंसराज चौधरी ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री आशीष छाबड़ा ने किया। सेमिनार में पूर्वाध्यक्ष श्री बी.एच. बापना, श्री पी.एस. तलेसरा, श्री वी.पी. राठी, श्रीमति नन्दिता सिंघल, श्री जी.एस. सिसोदिया, श्री हेमन्त जैन, श्री अरविन्द मेहता, श्री विजय जैन, श्री आर.वी. पारीक, श्री पंकज माण्डावत, श्री कमलेश तलेसरा, श्री ललित सिंघल, श्री राज सुराना, श्री भार्गव मिस्त्री, ले. कर्नल सिराजुद्दीन, श्री डी.एन. शर्मा, श्री प्रशांत जैन, श्री यशवन्त मण्डावरा आदि सहित 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के पश्चात इच्छुक प्रतिभागियों को दस-दस के बैच में सिक्योर मीटर्स की फैक्ट्री के अवलोकन हेतु भी आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के अन्त में उपाध्यक्ष श्री रमेश सिंघवी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
