नए लेबर कोड नियमों ने कम कर दी सैलेरी ! इन कर्मचारियों पर पड़ेगा सीधा असर, देखें नया कैलकुलेशन ?

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नए लेबर कोड नियमों ने कम कर दी सैलेरी ! इन कर्मचारियों पर पड़ेगा सीधा असर, देखें नया कैलकुलेशन ?

Udaipur Times, New Labour Code : नए लेबर कोड नियमों के तहत सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। इस नियम के कारण कि 'वेज' (मूल वेतन) का हिस्सा कुल सैलरी का 50% होना चाहिए, 31 अगस्त 2026 से कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में हर महीने 5,000 से 22,000 रुपये तक की कमी आ सकती है। यह नियम उन सभी कर्मचारियों पर लागू होता है जिनकी सैलरी CTC (कॉस्ट टू कंपनी) मॉडल पर आधारित है।

10 लाख से 50 लाख रुपये सालाना पैकेज वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा प्रभाव

यह बदलाव सीधे तौर पर उन कर्मचारियों को प्रभावित करता है जिनका सालाना पैकेज 10 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है। हालांकि, इन-हैंड सैलरी में कमी के बावजूद, आपकी कुल CTC में कोई कमी नहीं आएगी। काटी गई रकम सीधे आपकी लॉन्ग-टर्म सेविंग्स खासकर प्रोविडेंट फंड (PF), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और ग्रेच्युटी में जमा की जाएगी, जिससे रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड तैयार होगा।

50% वेतन नियम और सेक्शन 2(y) के तहत शर्तें क्या हैं?

नए लेबर कोड के तहत सबसे अहम प्रावधानों में से एक 'वेतन' (wages) की परिभाषा से जुड़ा है। 'कोड ऑन वेजेज़' के सेक्शन 2(y) के अनुसार, किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) उनके कुल CTC (कॉस्ट टू कंपनी) का कम से कम 50% होना चाहिए।

पहले, कंपनियां PF (प्रोविडेंट फंड) का बोझ कम करने के लिए बेसिक सैलरी को कुल पैकेज का सिर्फ़ 30% से 40% रखती थीं और बाकी हिस्सा अलग-अलग भत्तों (allowances) में बांट देती थीं। नए नियमों के तहत, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), कन्वेंस, ओवरटाइम, कमीशन और PF/NPS में एम्प्लॉयर का योगदान जैसे कंपोनेंट्स को 'एक्सक्लूडेड कंपोनेंट्स' (excluded components) माना गया है।

कानून के अनुसार, अगर इन भत्तों का कुल योग कुल वेतन (remuneration) के 50% से ज़्यादा हो जाता है, तो 50% की इस सीमा से ज़्यादा वाली रकम को 'वेतन' माना जाएगा और PF व ग्रेच्युटी की गणना इसी नए, ज़्यादा वेतन आधार (wage base) पर की जाएगी।

10 लाख रुपये के सालाना CTC का ब्यौरा:

सैलरी के हिस्से: बेसिक सैलरी 4,00,000 रुपये (40%), HRA 2,00,000 रुपये (20%), मील कार्ड 1,05,600 रुपये और स्पेशल अलाउंस 1,38,686 रुपये।

कुल ग्रॉस कमाई: 8,44,286 रुपये सालाना (70,357 रुपये हर महीने)।

रिटायरमेंट के लिए योगदान: कंपनी का PF शेयर और NPS योगदान, जो सालाना 1,55,714 रुपये है।

महीने की इन-हैंड सैलरी: 70,357 रुपये की मंथली ग्रॉस सैलरी में से कर्मचारी का PF हिस्सा घटाने के बाद, अकाउंट में 65,381 रुपये जमा होंगे (नई टैक्स व्यवस्था के तहत छूट की वजह से इनकम टैक्स ज़ीरो होगा)। पुरानी व्यवस्था के तहत, यह टेक-होम अमाउंट 70,667 रुपये था; असल में, हर महीने 5,286 रुपये कम मिलेंगे।

15 लाख रुपये के सालाना CTC का ब्यौरा:

सैलरी के हिस्से: बेसिक सैलरी 6,00,000 रुपये (40%), HRA 3,00,000 रुपये (20%), मील कार्ड 1,05,600 रुपये (7%), स्पेशल अलाउंस 2,90,829 रुपये (19%)।

कुल ग्रॉस कमाई: सालाना 12,96,429 रुपये (1,08,036 रुपये प्रति महीना)।

रिटायरमेंट योगदान: कंपनी का PF हिस्सा 1,19,571 रुपये (8%) और NPS 84,000 रुपये (6%)।

महीने की इन-हैंड सैलरी: 1,08,036 रुपये की ग्रॉस सैलरी में से कर्मचारी का PF हिस्सा 9,964 रुपये घटाने के बाद, अकाउंट में 98,072 रुपये जमा होंगे (नई टैक्स व्यवस्था के तहत छूट की वजह से टैक्स ज़ीरो होगा)। पुरानी व्यवस्था के तहत, यह टेक-होम अमाउंट 1,06,000 रुपये था।  अब हर महीने 7,928 रुपये कम मिलेंगे।

25 लाख रुपये सालाना CTC का ब्यौरा:

सैलरी के हिस्से: बेसिक सैलरी 10,00,000 रुपये (40%), HRA 5,00,000 रुपये (20%), मील कार्ड 1,05,600 रुपये (4%), स्पेशल अलाउंस 5,55,114 रुपये (22%)।

कुल ग्रॉस कमाई: सालाना 21,60,714 रुपये (1,80,060 रुपये प्रति महीना)।

रिटायरमेंट कॉन्ट्रिब्यूशन: कंपनी PF 1,99,286 रुपये और NPS 1,40,000 रुपये।

महीने की इन-हैंड सैलरी: 1,80,060 रुपये की मंथली ग्रॉस सैलरी से PF (16,607 रुपये ) और इनकम टैक्स TDS (16,989 रुपये) काटने के बाद, नेट इन-हैंड सैलरी 1,46,464 रुपये होगी। पहले यह 1,58,047 रुपये थी, यानी महीने में 11,583 रुपये का अंतर है।

टैक्स नियमों और रीइम्बर्समेंट पर क्या असर पड़ेगा?

लेबर कोड में सिर्फ़ PF और सोशल सिक्योरिटी के लिए वेज बेस (वेतन का आधार) तय किया गया है; इसका इनकम टैक्स छूट से कोई सीधा संबंध नहीं है। टैक्स छूट इनकम टैक्स एक्ट के तहत ही तय होती रहेंगी।

नई टैक्स व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को मिलने वाली मुख्य राहतें:

कंपनी का NPS योगदान: बेसिक पे और DA का 14% तक का हिस्सा टैक्स-फ्री रहता है।

कंपनी का PF योगदान: PF, NPS और सुपरएनुएशन फंड में कुल मिलाकर सालाना 7.5 लाख रुपये तक का योगदान टैक्स-फ्री है।

रिटायरमेंट ग्रेच्युटी: 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री है।

लीव एनकैशमेंट: गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए, रिटायरमेंट पर 25 लाख रुपये तक का लीव एनकैशमेंट टैक्स-फ्री है।

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