नोएडा से भी काफी बड़ा होगा न्यू नोएडा, टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित होने की उम्मीद
Udaipur Times, New Noida : न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (NOIDA) ने 'न्यू नोएडा' नाम से एक बड़ा विस्तार प्लान तैयार किया है। इसका मकसद इस इलाके को देश और दुनिया के लिए एक प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में विकसित करना है। औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए लगभग 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इस नए इलाके को विकसित किया जाएगा।
अथॉरिटी का लक्ष्य है कि विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विस्तार और वैश्विक निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ, 2030 तक 500,000 से 600,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं।
जमीन अधिग्रहण का काम जल्द ही चरणों में शुरू होने की उम्मीद
नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कृष्ण करुणेश ने बताया कि 1976 में दिल्ली के पास एक औद्योगिक टाउनशिप के रूप में बसा नोएडा, अब उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में से एक बन गया है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय राजधानी के करीब होने की वजह से यहां मैन्युफैक्चरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और कमर्शियल सेक्टर में निवेश आकर्षित करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि अथॉरिटी 'न्यू नोएडा' को विकसित करने की तैयारी कर रही है, क्योंकि मौजूदा शहरी इलाके में जमीन की उपलब्धता सीमित हो गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम जल्द ही चरणों में शुरू होने की उम्मीद है।
नोएडा में 'फ्लोर एरिया रेशियो' (FAR) बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम
राज्य सरकार मौजूदा नोएडा में 'फ्लोर एरिया रेशियो' (FAR) बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम कर रही है। करुणेश ने बताया कि कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर की योजना भी तैयार की जा रही है। ये कॉरिडोर शहर को बोडाकी में मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब, बॉटनिकल गार्डन और चार मूर्ति के रास्ते गौर सिटी से जोड़ेंगे।
नोएडा पहले से ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट (DND) फ्लाईवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए जुड़ा हुआ है। करुणेश के अनुसार, आगामी पांचवें 'ग्राउंड-ब्रेकिंग सेरेमनी' (GBC) में लगभग 35,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले करीब 120 प्रोजेक्ट्स की शुरुआत होने की उम्मीद है। इनमें डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कमर्शियल रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
90 प्रतिशत हिस्से का विकास पहले ही हो चुका
उन्होंने बताया कि नोएडा का मौजूदा इलाका लगभग 20,000 हेक्टेयर में फैला है और 168 सेक्टरों में बंटा हुआ है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत हिस्से का विकास पहले ही हो चुका है। पिछले तीन दशकों में, शहर में लगभग 9,500 औद्योगिक, 5,000 व्यावसायिक और 250 से अधिक संस्थागत आवंटन किए गए हैं। इन गतिविधियों से पिछले 30-35 वर्षों में 12 लाख (1.2 मिलियन) से अधिक नौकरियां पैदा हुई हैं। CEO के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में नोएडा का योगदान लगभग 10 प्रतिशत है।
राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी निर्यात में नोएडा की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है, और परिधान (कपड़ों) के निर्यात में यह लगभग 80 प्रतिशत है। सैमसंग, डिक्सन, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, HCL, माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और एडोब जैसी कंपनियों की नोएडा में मौजूदगी है। सिफी (Sify) और अडानीकनेक्स (AdaniConneX) द्वारा डेटा सेंटर में किए गए निवेश ने भी यहां के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
टेक्नोलॉजी हब के रूप में और मजबूत होने की उम्मीद
अथॉरिटी सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बैटरी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट को भी बढ़ावा दे रही है। करुणेश ने बताया कि 'न्यू नोएडा' के तहत होने वाले विस्तार से उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के और अधिक अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ, इस पहल से राज्य की स्थिति एक प्रमुख विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और टेक्नोलॉजी हब के रूप में और मजबूत होने की उम्मीद है।