550 करोड़ के निवेश से यहां बनेंगे नए प्लांट ! गन्ना, गोबर और नेपियर ग्रास से तैयार होगी CNG, लोगों को मिलेगा बड़ा लाभ ?
Udaipur Times, Bijnor CNG Plant : उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला आने वाले समय में सीएनजी और सीबीजी उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है। जिले में जैविक कच्चे माल से गैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 550 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की योजना है। इसमें करीब 138 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही धरातल पर उतर चुका है। जिले में गन्ने की प्रेस मड यानी मैली, सुपर नेपियर ग्रास और पशुओं के गोबर जैसे कच्चे माल से सीएनजी/सीबीजी बनाने की तैयारी की जा रही है।
जिले में उपलब्ध कृषि और पशुपालन आधारित कच्चे माल को देखते हुए यहां प्रतिदिन करीब 60 टन सीएनजी उत्पादन की क्षमता विकसित होने की संभावना जताई जा रही है। इससे बिजनौर के अलावा आसपास के जिलों की जरूरत पूरी करने में भी मदद मिल सकती है। इस तरह के प्लांट शुरू होने से एक तरफ पेट्रोल-डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर किसानों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी बन सकते हैं।।
550 करोड़ से ज्यादा के निवेश की तैयारी
बिजनौर में सीएनजी और सीबीजी उत्पादन से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रिलायंस के अलावा उत्तराखंड की एक प्रमुख कंपनी और अन्य कंपनियां भी जिले में निवेश की तैयारी कर रही हैं। इन परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अवशेष और जैविक सामग्री को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। जिले में दस चीनी मिलें होने के कारण गन्ने की प्रेस मड की उपलब्धता को इस क्षेत्र की बड़ी ताकत माना जा रहा है। इसके अलावा नेपियर ग्रास और पशुओं के गोबर का इस्तेमाल भी गैस उत्पादन में किया जा सकता है।
पश्चिमी यूपी में CNG उत्पादन की बड़ी संभावना
हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, देश में सीएनजी/सीबीजी उत्पादन की संभावित क्षमता का करीब 24 फीसदी हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकसित किया जा सकता है। इसमें बिजनौर को महत्वपूर्ण जिलों में शामिल किया गया है। इसकी एक बड़ी वजह यहां मौजूद चीनी मिलें और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है। गन्ने की पेराई के बाद निकलने वाली प्रेस मड जैसे पदार्थ को गैस उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कृषि और चीनी उद्योग से निकलने वाले जैविक अवशेषों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में करने का रास्ता खुलता है।
बुंदकी चीनी मिल के पास 100 करोड़ का प्लांट
युवा बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बुंदकी चीनी मिल के पास करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से सीएनजी उत्पादन प्लांट तैयार किया जा रहा है। इस प्लांट में प्रतिदिन करीब 10 टन सीएनजी उत्पादन की क्षमता विकसित करने की योजना है।कंपनी ने कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बुंदकी और बहादरपुर चीनी मिलों के साथ प्रेस मड को लेकर एमओयू भी साइन किया है। यहां 31 अक्टूबर से सीएनजी उत्पादन शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
नेपियर ग्रास से भी बनेगी गैस
सीएनजी उत्पादन में गन्ने की प्रेस मड के साथ सुपर नेपियर ग्रास को भी महत्वपूर्ण कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। उत्तराखंड की एक प्रमुख कंपनी नजीबाबाद में करीब 10 टन प्रतिदिन क्षमता वाला सीबीजी प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इस प्लांट में सुपर नेपियर ग्रास से गैस बनाने की योजना है। जरूरत के अनुसार चीनी मिलों की प्रेस मड और पशुओं के गोबर का इस्तेमाल भी कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है। खास बात यह है कि गैस बनने के बाद बचने वाले जैविक पदार्थ का इस्तेमाल जैविक खाद के तौर पर किया जा सकता है। इससे एक ओर कचरे का उपयोग होगा, वहीं किसानों को खाद के रूप में भी इसका फायदा मिल सकता है।
ऐसे बनती है CNG और PNG
सीएनजी/सीबीजी बनाने की प्रक्रिया में जैविक पदार्थ से गैस तैयार की जाती है। गन्ने की प्रेस मड, गोबर या अन्य जैविक सामग्री को एक प्रक्रिया के जरिए विघटित किया जाता है, जिससे मीथेन गैस निकलती है। इस गैस को शुद्ध करने के बाद अधिक दबाव पर कंप्रेस किया जाता है। इसी तरह तैयार गैस का इस्तेमाल वाहनों में सीएनजी के रूप में किया जा सकता है। वहीं गैस को अलग दबाव और वितरण प्रणाली के जरिए घरेलू इस्तेमाल के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बिजनौर में शुरुआती स्तर पर सीएनजी उत्पादन पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
कई चीनी मिलों ने शुरू की तैयारी
बिजनौर की कई चीनी मिलें भी सीबीजी प्लांट लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। स्योहारा और बिलाई चीनी मिल ने सीबीजी प्लांट लगाने का प्रस्ताव भेजा है। वहीं चांगीपुर चीनी मिल की ओर से भी जल्द प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है। चांदपुर चीनी मिल में भी सीबीजी प्लांट लगाए जाने की योजना है। धामपुर चीनी मिल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ, जबकि अफजलगढ़ और बुंदकी ने युवा बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के साथ एमओयू साइन किए हैं। बिजनौर चीनी मिल अपनी सहइकाई में इस्तेमाल के लिए धनौरा स्थित इकाई में प्रेस मड भेजेगी। इसके अलावा मथुरा की एक कंपनी जिले में करीब एक हजार गायों की डेयरी स्थापित कर वहां से निकलने वाले गोबर के इस्तेमाल से सीएनजी प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा संभावित फायदा स्थानीय किसानों और पशुपालकों को हो सकता है। गन्ने की प्रेस मड, नेपियर ग्रास और पशुओं के गोबर जैसे कच्चे माल की मांग बढ़ने से इनके लिए बाजार तैयार हो सकता है। खासकर पशुपालकों के लिए गोबर को केवल अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय उसे ऊर्जा उत्पादन के कच्चे माल के रूप में बेचने का विकल्प मिल सकता है। इसी तरह नेपियर ग्रास की खेती करने वाले किसानों के लिए भी अतिरिक्त बाजार तैयार होने की संभावना है। गैस उत्पादन के बाद बचने वाले जैविक पदार्थ से खाद तैयार होने पर कृषि क्षेत्र को भी इसका लाभ मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद
बायोगैस आधारित सीएनजी/सीबीजी को परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक ईंधनों के विकल्प के तौर पर देखा जाता है। ऐसे प्लांटों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बढ़ सकती है।पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत में भी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर दिया जा रहा है। चीनी मिलों में गन्ने से एथनॉल उत्पादन के साथ अब जैविक कचरे से गैस उत्पादन को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
डीएम ने क्या कहा?
बिजनौर की डीएम जसजीत कौर के मुताबिक, जिले में आने वाली विभिन्न परियोजनाओं के बाद सीएनजी उत्पादन की क्षमता में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिला अपनी जरूरत पूरी करने के साथ दूसरे जिलों को भी सीएनजी उपलब्ध कराने की स्थिति में पहुंच सकता है। उनके अनुसार, जिले में सीबीजी प्लांट लगाने के लिए कई बड़ी कंपनियां आगे आ रही हैं। इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है और किसानों के लिए भी आर्थिक लाभ के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।