दिल्ली-NCR का नया मौसम पूर्वानुमान, देखें कब-कब होगी बरसात ?
Udaipur Times, Delhi-NCR Weather : दिल्ली-NCR में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदला हुआ है। मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR का नया मौसम पूर्वानुमान जारी कर दिया है, अब तक दिल्ली में सामान्य से कम वर्षा हुई है। गौरतलब है, रविवार तक दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी। हालांकि, बादलों की कमी और लगातार अच्छी बारिश न होने के कारण अगले 4 से 5 दिनों तक दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
तेज बारिश की संभावना कम
मौसम विभाग के अनुसार इस समय दक्षिण राजस्थान, उत्तर गुजरात, उत्तर मध्य महाराष्ट्र, पश्चिम एवं मध्य एमपी, उत्तर छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार तक एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) फैला हुआ है। यह प्रणाली पूर्व-पश्चिम शियर ज़ोन (East-West Shear Zone) का हिस्सा है। इसी कारण मानसून ट्रफ दिल्ली से काफी दक्षिण की ओर चली गई है। Delhi-NCR Weather
विभाग के मुताबिक वर्तमान में मानसून ट्रफ जैसलमेर, कोटा, गुना होते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल तक फैली हुई है। चूंकि यह ट्रफ दिल्ली से काफी दूर है, इसलिए 23 से 26 जुलाई 2026 के बीच दिल्ली में किसी भी तरह की तेज बारिश की संभावना नहीं है। इस दौरान केवल हल्की से मध्यम, बिखरी हुई और थोड़े समय के लिए बारिश होने की उम्मीद है। Delhi-NCR Weather
27-28 जुलाई को बारिश
मौसम विशेषकोंने बताया है की 26 जुलाई की देर रात से इस शियर ज़ोन का पश्चिमी हिस्सा धीरे-धीरे उत्तर की ओर खिसकना शुरू करेगा। इसके बाद निचले स्तरों पर मानसून ट्रफ दिल्ली के उत्तर में पहुंच जाएगी। 28 जुलाई तक यह ट्रफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तराई वाले क्षेत्रों की ओर शिफ्ट हो सकती है, जिससे वहां मानसून गतिविधियां तेज होंगी। इसका असर दिल्ली-NCR पर भी देखने को मिल सकता है और 27 से 28 जुलाई के बीच बारिश की तीव्रता कुछ समय के लिए बढ़ सकती है। हालांकि, अगर पूरे क्षेत्र में भारी बारिश नहीं होती है, तो दिन का अधिकतम तापमान लगभग 36°C (±1°C) तक पहुंच सकता है, जो सामान्य से करीब 2°C अधिक रहेगा। पूर्वी हवाओं के कारण हवा में नमी भी बनी रहेगी, जिससे दिन के समय गर्म और उमस भरे मौसम का एहसास होगा Delhi-NCR Weather
विभाग से मिली जानकारी के लिए बता दें, शियर ज़ोन (Shear Zone) वह क्षेत्र होता है जहाँ अलग-अलग दिशाओं या अलग-अलग गति से चलने वाली हवाएँ आपस में मिलती हैं। इस वजह से वातावरण में अस्थिरता बढ़ती है और बादलों का विकास तेजी से होता है, जिससे बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं।
