नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) ने 8.5 लाख पेड़ नहीं लगाने के मामले में सख्त रुख अपनाया

राजस्थान के PCCF (Principal Chief Conservator of Forests) को नोटिस, जवाब नहीं देने पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश

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NGT Bhopal hearing on failure of compensatory plantation by Rajasthan Forest Department

उदयपुर, 01 फरवरी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भोपाल ने नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया द्वारा राजस्थान में राजमार्गों के निर्माण एवं चोड़ा करने के दौरान काटे गये लाखों पेड़ों के बदले शर्तों के अनुसार 3 गुना, 5 गुना एवं 10 गुना, लगभग 8.5 लाख पेड़ नहीं लगाने के मामले में वन विभाग की उदासीनता पर कड़ा रुख अपनाया है।

पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू द्वारा अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा के मार्फत दायर जनहित याचिका 87/2025 की सुनवाई करते हुए NGT ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) जयपुर, को शीघ्र जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। माननीय न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि बार-बार निर्देशों के बावजूद प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जयपुर की ओर से अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया है।

NGT ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस की तामील कराए तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा वन विभाग में जमा की गई पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि के उपयोग का पूरा विवरण दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए। अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो प्रधान मुख्य वन संरक्षक को अगली सुनवाई दिनांक मार्च 19, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

याचिकाकर्ता बाबूलाल जाजू ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में सड़क मागों को चोड़ा करने के दौरान काटे गये विशालकाय लाखों पेड़ों के बदले पौधे लगाकर उनका रखरखाव के दिये गये निर्देशों की पूर्ण रूप से पालना नहीं करने पर जाजू को मजबूरन पुनः जनहित याचिका दायर करनी पड़ी।

Image Credit: Wikimedia Commons

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