PM प्रोजेक्ट्स पर NHAI की रहेगी सख्त निगरानी, हर कमी पर होगी तुरंत कार्रवाई
Udaipur Times, NHAI New SOP : पीएम द्वारा लोकार्पित की जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निगरानी व्यवस्था और सख्त करने का फैसला किया है। नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अब पीएम के हाथों उद्घाटन या यातायात के लिए खोली गई परियोजनाओं की पहले छह महीने तक विशेष निगरानी की जाएगी। इस दौरान सड़क की गुणवत्ता, जल निकासी, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य हिस्सों में कोई कमी सामने आने पर उसे तत्काल ठीक कराने की व्यवस्था की गई है।
दरअसल, हाल के कुछ मामलों में उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क या परियोजना में खामियां सामने आईं। PM के नाम से जुड़ी होने के कारण इन मामलों ने सोशल मीडिया और राजनीतिक स्तर पर भी काफी ध्यान खींचा। इन्हीं अनुभवों से सबक लेते हुए NHAI ने अपनी SOP में अतिरिक्त दिशा-निर्देश शामिल किए हैं।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे में आई दरारों के चलते उठाए सख्त कदम
इसी वर्ष अप्रैल में PM नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। इसके करीब तीन महीने बाद एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में दरारें सामने आने की खबरें आईं। परियोजना NHAI से जुड़ी होने और PM द्वारा इसके लोकार्पण किए जाने के कारण मामला काफी चर्चा में रहा।
इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे समेत कुछ अन्य परियोजनाओं में भी निर्माण और गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे सामने आने पर राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए। NHAI ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में PM द्वारा लोकार्पित होने वाली परियोजनाओं के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।
PM के लोकार्पण वाली परियोजनाओं के लिए बदली SOP
NHAI में परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण को लेकर SOP पहले से लागू है। PM द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन से संबंधित विशेष SOP पहली बार 5 अप्रैल 2023 को तैयार की गई थी। इसके बाद अक्टूबर 2023, 2024 और 2025 में इसमें समय-समय पर बदलाव और नए दिशा-निर्देश जोड़े गए।
हालांकि, पिछली SOP में परियोजना को लोकार्पण के बाद लगातार मॉनिटर करने का अलग प्रावधान नहीं था। अब नई SOP में इस व्यवस्था को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसमें हाल के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रमों से मिले अनुभवों और सीख के आधार पर अतिरिक्त दिशा-निर्देश जोड़े जाने की बात कही गई है।
पहले 3 महीने साप्ताहिक, अगले 3 महीने पाक्षिक निरीक्षण
नई व्यवस्था के तहत परियोजना के उद्घाटन या यातायात के लिए खोले जाने के बाद पहले तीन महीनों तक हर सप्ताह निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन महीनों तक हर 15 दिन में निरीक्षण किया जाएगा। यह निरीक्षण कंसेसनेयर के संबंधित परियोजना प्रबंधक और पर्यवेक्षण परामर्शदाता यानी अथॉरिटी इंजीनियर या इंडिपेंडेंट इंजीनियर की टीम के लीडर द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान सड़क की पेवमेंट और राइडिंग क्वालिटी, जल निकासी व्यवस्था, सुरक्षा प्रतिष्ठानों, तटबंध और उसकी ढाल समेत परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य शुरुआती चरण में ही किसी भी कमी या खराबी की पहचान कर उसे गंभीर समस्या बनने से पहले ठीक करना है।
पेट्रोलिंग वाहनों से भी होगी लगातार निगरानी
नई SOP में हाईवे पेट्रोलिंग को भी निगरानी व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया है। परियोजना के यातायात के लिए खुलने के बाद रूट पेट्रोलिंग वाहन नियमित रूप से राजमार्ग पर गश्त करेंगे और संभावित खामियों पर नजर रखेंगे।
अगर निरीक्षण या पेट्रोलिंग के दौरान कोई दोष, क्षति या सड़क की गुणवत्ता में गिरावट दिखाई देती है तो उसकी जियो-टैगिंग की जाएगी। इसके बाद इसकी जानकारी तत्काल परियोजना निदेशक, कंसेसनेयर और अथॉरिटी इंजीनियर/इंडिपेंडेंट इंजीनियर को दी जाएगी। NHAI की परियोजना कार्यान्वयन इकाई को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित कमी का समय पर निवारण किया जाए।
बड़े एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले हो सकता है स्वतंत्र ऑडिट
नई SOP में महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए उद्घाटन से पहले स्वतंत्र ऑडिट का भी प्रावधान सुझाया गया है। इसमें ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड कॉरिडोर, विशिष्ट महत्व वाली परियोजनाएं और 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की कुल पूंजीगत लागत वाली परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं।
ऐसी परियोजनाओं के लिए किसी प्रतिष्ठित तीसरे पक्ष की संस्था से स्वतंत्र ऑडिट कराया जा सकता है। इसमें संभावित यातायात दबाव, जल निकासी और परियोजना के अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सकती है। इसके लिए IIT और NIT जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञता लेने का सुझाव दिया गया है।
गुणवत्ता में कमी पर तुरंत कार्रवाई का लक्ष्य
NHAI की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बड़े हाईवे या एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद शुरुआती महीनों में सामने आने वाली छोटी तकनीकी खामी आगे चलकर बड़ी समस्या न बने। छह महीने की नियमित निगरानी, जियो-टैगिंग और समयबद्ध सुधार के जरिए परियोजनाओं की गुणवत्ता पर जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की गई है।
PM द्वारा लोकार्पित परियोजनाओं को लेकर विशेष निगरानी व्यवस्था लागू होने से आने वाले समय में हाईवे और एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर ज्यादा सख्ती देखने को मिल सकती है।