1 दिसंबर से NHAI का हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए नया नियम होगा लागू ? जाने पूरी खबर
Udaipur Times, NHAI's new rule for highway projects : नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) के तहत आने वाले जरूरी स्ट्रक्चर जैसे बड़े पुल की क्वालिटी पक्की करने के लिए 'प्रूफ़-चेकिंग' सिस्टम को मज़बूत करने की कोशिशें चल रही हैं। NHAI ने ऐसे स्ट्रक्चर के डिज़ाइन और ड्रॉइंग की प्रूफ़-चेकिंग के लिए IIT, दूसरे नामी सरकारी टेक्निकल इंस्टिट्यूट और पुल व हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग में सर्टिफाइड एक्सपर्टाइज़ रखने वाली फ़र्मों को पैनल में शामिल करने का फ़ैसला किया है। कॉन्ट्रैक्टर फ़र्म इस पैनल में शामिल लिस्ट से प्रूफ़-चेकिंग के लिए किसी फ़र्म को चुन सकेंगी।
IIT और एक्सपर्ट इंस्टिट्यूट डिज़ाइन की जांच करेंगे
NHAI मानती है कि बड़े पुल और दूसरे जरूरी स्ट्रक्चर लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। स्ट्रक्चर की सुरक्षा, मजबूती और इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के नियमों और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का पूरा पालन पक्का करने के लिए उनके डिज़ाइन, साथ ही हाइड्रोलॉजिकल और हाइड्रोलिक स्टडीज़ की स्वतंत्र प्रूफ़-चेकिंग ज़रूरी है।
NHAI द्वारा पैनल में शामिल की गई संस्थाओं की लिस्ट उसके पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह नियम अलग-अलग तरीकों वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा, जैसे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC); बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर (BOT) और हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM)।
कॉन्ट्रैक्टर फ़र्म सबसे पहले एक डिज़ाइन डायरेक्टर नियुक्त करेगी, जो टेंडर की शर्तों के अनुसार डिज़ाइन और ड्रॉइंग तैयार करेगा। अथॉरिटी इंजीनियर या इंडिपेंडेंट इंजीनियर तय शर्तों के आधार पर उनकी समीक्षा करेंगे और उन्हें मंज़ूरी देंगे। मंज़ूर किए गए डिज़ाइन के साथ, कॉन्ट्रैक्टर फ़र्म पैनल में शामिल इंस्टिट्यूट की लिस्ट से तीन विकल्प जमा करेगी। इसके बाद NHAI का रीजनल ऑफ़िस इन विकल्पों में से एक या ज़रूरत पड़ने पर दो को चुनेगा।
1 दिसंबर, 2026 से सभी प्रोजेक्ट्स पर नया सिस्टम लागू होगा
NHAI की गाइडलाइंस और टेक्निकल नियमों का पालन करते हुए, एक्सपर्ट इंस्टिट्यूट दिए गए डॉक्यूमेंट्स और डेटा के आधार पर डिज़ाइन और ड्रॉइंग की स्वतंत्र प्रूफ़-चेकिंग करेगा। इस काम के लिए एक्सपर्ट इंस्टिट्यूट एक नोडल ऑफ़िसर नियुक्त करेगा।
प्रूफ़-चेकिंग प्रोसेस के दौरान दिए गए एनालिसिस या निर्देशों का पालन पक्का करने के बाद ही AE/IE (अथॉरिटी इंजीनियर/इंडिपेंडेंट इंजीनियर) द्वारा डिज़ाइन और ड्रॉइंग को अंतिम मंज़ूरी दी जा सकेगी।
NHAI ने कहा है कि यह सिस्टम 1 दिसंबर, 2026 से शुरू होने वाले सभी नए प्रोजेक्ट्स के लिए लागू होगा। यह उन प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होगा जिनके लिए टेंडर तो पहले ही दिए जा चुके हैं, लेकिन डिज़ाइन और ड्रॉइंग अभी तक जमा नहीं किए गए हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रूफ-चेकिंग का सिस्टम पहले से ही मौजूद है, लेकिन एजेंसी चुनने की प्रक्रिया पहले स्वतंत्र थी।