हरियाणा में अब कोई बच्चा पढ़ाई में नहीं रहेगा पीछे, अगस्त से स्कूलों में शुरू होगा ये नया अभियान
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखरी आई है। सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के अधिगम स्तर को मजबूत बनाने और सीखने के अंतर लर्निंग गैप को समाप्त करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक कैच-अप शिक्षण कार्यक्रम लागू करेगा। इस संबंध में कार्यालय महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा विभाग हरियाणा के उप-निदेशक जितेंद्र गौड़ ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी जींद व सोनीपत और डाइट ईक्कस और बिस्वामील के प्राचार्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी सीखने की क्षमता के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सके और कोई भी बच्चा अधिगम की दौड़ में पीछे नहीं रह जाए। कार्यक्रम के पहले चरण में अगस्त के दौरान सभी सरकारी विद्यालयों में 15 दिवसीय विशेष पुनरावृत्ति अभियान चलाया जाएगा। इसमें भाषा, पठन, लेखन तथा बुनियादी गणितीय दक्षताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के वर्तमान अधिगम स्तर का आकलन कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
इसके बाद अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक नियमित समय-सारिणी में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का विशेष कैच-अप सत्र शामिल किया जाएगा। प्रत्येक सप्ताह फॉर्मेटिव असेसमेंट के आधार पर उन विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी, जिन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की जरूरत होगी। दक्षता प्राप्त कर चुके विद्यार्थी सामान्य शिक्षण प्रक्रिया में आगे बढ़ेंगे, जबकि अन्य बच्चों को अतिरिक्त अभ्यास और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलेगा।
योजना के तहत शिक्षण को बच्चों के स्थानीय परिवेश, दैनिक जीवन और पूर्व अनुभवों से जोड़ने पर जोर दिया गया है। कक्षाओं में बिग बुक्स, वार्तालाप चार्ट, कहानी पोस्टर, पुस्तकालय की पुस्तकें, चित्र आधारित सामग्री, गणित किट तथा टीचिंग लर्निंग मटेरियल टीएलएम का उपयोग किया जाएगा। भाषा और गणित की पढ़ाई सरल से कठिन क्रम में कराई जाएगी जबकि त्रुटि विश्लेषण के माध्यम से बच्चों की कठिनाइयों को समझकर व्यक्तिगत फीडबैक दिया जाएगा।
भयमुक्त शिक्षण वातावरण तैयार होगा
जारी पत्र के अनुसार विद्यालयों में भयमुक्त शिक्षण वातावरण तैयार किया जाएगा। विद्यार्थियों को गलती करने पर डांटने के बजाय उसे सीखने का अवसर माना जाएगा। शिक्षकों को जीआरआर मॉडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत पहले शिक्षक स्वयं गतिविधि करके दिखाएंगे, फिर विद्यार्थियों के मिलकर अभ्यास करेंगे और अंत में विद्यार्थी स्वयं कार्य करेंगे। समूह आधारित गतिविधियों के माध्यम से भी सीखने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कक्षा तीन से आठ तक के विद्यार्थियों का बेसलाइन और कार्यक्रम समाप्त होने पर एंडलाइन मूल्यांकन किया जाएगा। निपुण एप के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रगति का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा और इसकी समीक्षा होगी। पीटीएम के माध्यम से अभिभावकों को भी जोड़ा जाएगा।
राजेश वशिष्ठ, जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर, जींद
