अब नहीं कटेगी बिजली ! यहां लगेगा 800 मेगावाट का नया पावर प्लांट, जाने सरकार का पूरा प्लान ?

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अब नहीं कटेगी बिजली ! यहां लगेगा 800 मेगावाट का नया पावर प्लांट, जाने सरकार का पूरा प्लान ?

Udaipur Times, New Power Plant: बिहार की बिजली व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी ऊर्जा कंपनी NTPC Limited ने बरौनी में 800 मेगावाट क्षमता की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर यूनिट स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस परियोजना पर फिलहाल प्रारंभिक स्तर पर फीजिबिलिटी स्टडी (संभाव्यता अध्ययन) चल रहा है। यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए ऊर्जा मंत्रालय के पास जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस परियोजना पर औपचारिक रूप से काम शुरू किया जाएगा।

फीजिबिलिटी स्टडी से तय होगा भविष्य

फिलहाल परियोजना का सबसे अहम चरण फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करना है। इस रिपोर्ट में यह आकलन किया जा रहा है कि मौजूदा साइट पर कितना तकनीकी ढांचा उपलब्ध है, निर्माण लागत कितनी आएगी, पर्यावरणीय मंजूरी की क्या स्थिति होगी, ग्रिड कनेक्टिविटी और लोड क्षमता कितनी होगी। अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट पूरी होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जिसके बाद आगे की दिशा तय होगी।

पुराने संयंत्र की जमीन पर नया प्लांट

यह प्रस्ताव बरौनी के उसी स्थान पर है जहां पहले एक पुराना थर्मल पावर प्लांट बंद किया जा चुका है। इससे परियोजना को बड़ा फायदा यह मिलेगा कि अतिरिक्त जमीन अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी, पुनर्विकास (redevelopment) मॉडल अपनाया जा सकेगा, निर्माण की प्रक्रिया तेज हो सकती है और लागत में भी कमी आने की संभावना है। 

बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी प्रस्ताव में शामिल

इस परियोजना की एक खास बात यह है कि इसके साथ ही बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। इस तकनीक का उपयोग कम मांग वाले समय में अतिरिक्त बिजली स्टोर करने में होगा, पीक डिमांड के समय उसी बिजली को सप्लाई किया जाएगा, ग्रिड पर दबाव कम होगा और स्थिरता बढ़ेगी।  यह पहल बिहार में ऊर्जा भंडारण तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अभी पूरे बिहार में एनटीपीसी की सिर्फ एक 800 मेगावाट वाली यूनिट है, जो औरंगाबाद के नवीनगर में है।

अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक: ज्यादा उत्पादन, कम प्रदूषण

प्रस्तावित यूनिट में अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो पारंपरिक कोयला आधारित संयंत्रों की तुलना में अधिक उन्नत मानी जाती है। इस तकनीक के प्रमुख फायदे 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक कम कोयला खपत, अधिक बिजली उत्पादन दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों में कमी और पानी की खपत में भी गिरावट होगी। इससे बिजली उत्पादन अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनता है।

बिहार में बिजली उत्पादन क्षमता को मिलेगा बढ़ावा

वर्तमान में NTPC बिहार में कई बड़े थर्मल पावर स्टेशनों का संचालन कर रहा है, जिनकी कुल क्षमता लगभग 9,500 मेगावाट है। इनमें बरह (Barh), औरंगाबाद (Nabinagar), बरौनी (Barauni), कांटी (Kanti) और काहलगांव (Kahalgaon) शामिल हैं। इन संयंत्रों के जरिए राज्य और आसपास के क्षेत्रों की बिजली जरूरतें पूरी की जाती हैं।

अन्य स्थानों पर भी विस्तार की संभावना

NTPC की योजना केवल बरौनी तक सीमित नहीं है। कंपनी काहलगांव में तीसरे चरण की 800 मेगावाट यूनिट पर भी विचार कर रही है। साथ ही कांटी प्लांट पर भी इसी तरह की क्षमता विस्तार योजना प्रस्तावित है। हालांकि इन दोनों परियोजनाओं पर अभी शुरुआती अध्ययन या सर्वे का चरण ही पूरा हुआ है।

बिहार के लिए क्या होगा असर?

अगर बरौनी परियोजना को मंजूरी मिल जाती है तो इससे राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी, बिजली आपूर्ति में स्थिरता, औद्योगिक विकास को बढ़ावा, रोजगार के नए अवसर (निर्माण और संचालन दोनों चरणों में) और ऊर्जा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का विस्तार होगा।

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