नेचुरल डाइंग निर्मित वस्त्रो की नॉन वायलेंट फैशन कार्यशाला

अहमदाबाद की Biome संस्था और उदयपुर के शिक्षांतर संस्था के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के फतेहपुरा स्थित शिक्षांतर कार्यालय में एक कार्यशाला आयोजित की गई जिसका उद्देश्य लोगो में प्राकृतिक तरीके से निर्मित और डाइंग किये गए कपड़ो के इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने और जागरूकता फ़ैलाने के लिए किया गया। कार्यशाला में बायोम संस्था, अहमदाबाद की नम्रता मनोत, औरा हर्बल टेक्सटाइल लिमिटेड, अहमदाबाद के अरुण बैद और शिक्षांतर संसथान के मनीष जैन और साधना-ए वीमेन हेंडीक्राफ्ट के सदस्यों, कारोबारियों और अन्य गणमान्य नागरिको ने हिस्सा लिया।

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नेचुरल डाइंग निर्मित वस्त्रो की नॉन वायलेंट फैशन कार्यशाला

अहमदाबाद की Biome संस्था और उदयपुर के शिक्षांतर संस्था के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के फतेहपुरा स्थित शिक्षांतर कार्यालय में एक कार्यशाला आयोजित की गई जिसका उद्देश्य लोगो में प्राकृतिक तरीके से निर्मित और डाइंग किये गए कपड़ो के इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने और जागरूकता फ़ैलाने के लिए किया गया। कार्यशाला में बायोम संस्था, कोलकाता की नम्रता मनोत, औरा हर्बल टेक्सटाइल लिमिटेड, अहमदाबाद के अरुण बैद और शिक्षांतर संसथान के मनीष जैन और साधना-ए वीमेन हेंडीक्राफ्ट के सदस्यों, कारोबारियों और अन्य गणमान्य नागरिको ने हिस्सा लिया।

 

बायोम की नम्रता मनोत ने बताया की नेचुरल तरीके से कपडे डाइंग से प्रकृति का कम से कम नुक्सान होता है। जबकि सिंथेटिक प्रोसेसर से कपडे डाइंग करने में प्रकृति को बहुत ज़्यदा नुकसान होता है, बल्कि यह शरीर के लिए हानिकारक है क्यूंकि सिंथेटिक तरीके से कपडे डाइंग करने के लिए अत्यधिक केमिकल इस्तेमाल किया जाता है तकरीबन आठ हज़ार प्रकार के केमिकल इस्तेमाल होते है है जो त्वचा के लिए हानिकारक है।

नेचुरल डाइंग निर्मित वस्त्रो की नॉन वायलेंट फैशन कार्यशाला

नम्रता मनोत के अनुसार नेचुरल तरीके से बनाये गए कपड़ो की लागत सिंथेटिक कपड़ो की तुलना में कुछ महंगी भी होती है और इसके अलावा इसमें बहुत कलर के शेड्स अवेलेबल नहीं होते है फिर भी हमने कोशिश की है की और इनकी डिज़ाइनिंग पर ध्यान दिया है ताकि यह आने वाले वक़्त में फैशन के तौर पर जनमानस को अपनी ओर आकर्षित कर सके।

नेचुरल डाइंग निर्मित वस्त्रो की नॉन वायलेंट फैशन कार्यशाला

औरा हर्बल टेक्सटाइल लिमिटेड अहमदाबाद के अरुण बैद ने बताया की सिंथेटिक कपड़ो के निर्माण में काफी मात्रा में पानी का दुरूपयोग हो जाता है और यह पानी इतना प्रदूषित हो जाता है के इनको दुबारा प्रयोग नहीं किया जा सकता है। जबकि नेचुरल तरीके से डाइंग किये गए कपड़ो के निर्माण में पानी का बहुत कम उपयोग होता है और यह पानी वापिस उपयोग में भी लिया जा सकता है। नेचुरल तरीके के कपड़ो की ज़्यादा लागत पर बोलते हुए अरुण कहते है की यदि हमे अपनी त्वचा को होने वाले नुकसान और प्रदूषण से बचने के लिए कुछ दाम ज़्यादा देने पड़े तो कोई हर्ज नहीं होना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में शिक्षांतर के मनीष जैन ने सभी का धन्यवाद दिया।

नेचुरल डाइंग निर्मित वस्त्रो की नॉन वायलेंट फैशन कार्यशाला

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