अब बिना कंप्रेसर पानी से कूलिंग करेगी AC ! जाने कैसे काम करेगी ये नई तकनीक

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अब बिना कंप्रेसर पानी से कूलिंग करेगी AC ! जाने कैसे काम करेगी ये नई तकनीक 

Udaipur Times, Centralised Cooling System : अभी देश अधिकतर राज्यों में भंयकर गर्मी पड़ रही है भीषण गर्मी से उमस से राहत पाने के लिए एकमात्र सहारा एयर कंडीशनर (AC) है। हालांकि, AC के साथ भारी बिजली बिल, आउटडोर यूनिट की देखभाल, रिपेयरिंग और शोर जैसी कई परेशानियां भी आती हैं। इन समस्याओं का समाधान देने के लिए अब सेंट्रलाइज्ड कूलिंग सिस्टम (Centralised Cooling System) (CCS) तेजी से चर्चा में है।

यह तकनीक सिर्फ अवधारणा नहीं है, बल्कि सिंगापुर के आधुनिक ग्रीन टाउन टेंगाह  (Tengah) में इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी मदद से कई घरों को एक ही सिस्टम से ठंडा किया जाता है।

क्या है Centralised Cooling System?

सेंट्रलाइज्ड कूलिंग सिस्टम Centralised Cooling System (CCS) एक ऐसी तकनीक है, जिसमें हर घर के लिए अलग-अलग AC लगाने की जरूरत नहीं होती। इसके बजाय पूरी बिल्डिंग या आवासीय परिसर के लिए एक केंद्रीय कूलिंग सिस्टम लगाया जाता है।

इस सिस्टम में बिल्डिंग की छत पर बड़े इंडस्ट्रियल चिलर्स  (Industrial Chillers) लगाए जाते हैं, जो पानी को बहुत कम तापमान तक ठंडा करते हैं। इसके बाद यह ठंडा पानी विशेष पाइपों के जरिए अलग-अलग घरों तक पहुंचाया जाता है। घरों में लगे इनडोर यूनिट इस ठंडे पानी की मदद से हवा को ठंडा करते हैं, जिससे कमरा ठंडा हो जाता है।

कैसे अलग है सामान्य AC से?

पारंपरिक Split AC या Window AC में हर घर के बाहर अलग Outdoor Unit लगती है, जबकि CCS में इसकी जरूरत नहीं होती। इस तकनीक में हर घर के बाहर Outdoor Unit लगाने की जरूरत नहीं, कंप्रेसर का शोर और कंपन लगभग खत्म, बिजली की खपत कम होने से बिजली बिल में कमी, एक ही सिस्टम से कई घरों को कूलिंग, रिपेयर और मेंटेनेंस का झंझट कम और शहरों में AC से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी (Heat Island Effect) भी कम होती है।

बिजली बिल में भी होती है बचत

रिपोर्ट्स के अनुसार, CCS में पानी को ठंडा करने की लागत अपेक्षाकृत कम रहती है। सिंगापुर में इस तकनीक को अपनाने के बाद कई घरों का मासिक बिजली खर्च पहले की तुलना में कम हुआ है।

ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) के कारण यह तकनीक पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जाती है और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करती है।

शुरुआती चुनौतियां भी आईं

शुरुआत में इस सिस्टम में इनडोर यूनिट्स में पानी के रिसाव (Water Leakage) और कंडेनसेशन जैसी कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं। हालांकि, बाद में टेस्टिंग और इंस्टॉलेशन प्रक्रिया में सुधार किए गए, जिससे इन समस्याओं को काफी हद तक दूर कर लिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेंगाह  में इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले अधिकांश लोग इससे संतुष्ट हैं और बड़ी संख्या में निवासी इसे दूसरों को अपनाने की सलाह भी दे रहे हैं।

क्या भारत में संभव है?

फिलहाल भारत में सेंट्रलाइज्ड कूलिंग सिस्टम (Centralised Cooling System) का उपयोग सीमित स्तर पर ही देखने को मिलता है। हालांकि, बड़े टाउनशिप, स्मार्ट सिटी और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में भविष्य में इस तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ रही हैं। यदि इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो यह बिजली की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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