अब आदिवासी क्षेत्रों में तय करनी होगी प्रौढ़ों की शिक्षा
भारतीय प्रौढ शिक्षा संघ के अध्यक्ष प्रो. भवानीशंकर गर्ग ने कहा है कि प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे समर्पित, निष्ठावान एवं कार्यशील लोगों को साथ जोडक़र प्रौढ़ शिक्षा के कार्यक्रम को और अधिक सफल बनाया जा सकता है।
भारतीय प्रौढ शिक्षा संघ के अध्यक्ष प्रो. भवानीशंकर गर्ग ने कहा है कि प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे समर्पित, निष्ठावान एवं कार्यशील लोगों को साथ जोडक़र प्रौढ़ शिक्षा के कार्यक्रम को और अधिक सफल बनाया जा सकता है।
भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ की राजस्थान राज्य शाखा द्वारा सोमवार को राजस्थान विद्यापीठ के जनपद मीडिया सेंटर पर आजीवन व संस्थागत सदस्यों की सेमिनार में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि राजस्थान विद्यापीठ सहित प्रदेश की अनेक स्वयंसेवी शिक्षण संस्थाएं ग्रामीण अंचलों में इस दिशा में कार्य कर रही है और इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं।
राज्य शाखा के कार्यों की सराहना करते हुए प्रो. गर्ग ने कहा कि देश के पांच राज्यों में प्रायौगिक रूप से शाखाओं की स्थापना भी की गई है। उनमें राजस्थान राज्य शाखा अच्छा कार्य कर रही है। हमें हिंदी भाषी क्षेत्रों तथा राज्य के अन्य आदिवासी पिछड़े क्षेत्रों में भी इस कार्यक्रम को पहुंचाना है।
भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ के महासचिव कैलश चौधरी ने कहा कि आजादी के पहले प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम का मतलब प्रौढ़ों को साक्षर करना तथा जन जागृति लाना था , किंतु अब परिस्थितियां बदल गई है। अब यह सोचना और करना होगा कि प्रौढ़ों की शिक्षा क्या हो। उन्होंने कहा कि जनशिक्षण संस्थान लोगों को व्यवसायिक कौशल में वृद्धि के लिए कार्य कर रहे हैं तथा भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ भी साहित्य सृजन, डोक्यूमेंटेशन तथा सम्मेलन आदि का आयोजन कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दे रहा है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्य शाखा समन्वयक श्यामसुंदर नंदवाना द्वारा राज्य शाखा द्वारा किए गए कार्यों एवं प्रस्तावित भावी कार्यक्रम की जानकारी दी गई। अंत में डॉ. लक्ष्मीनारायण नंदवाना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ के उपाध्यक्ष डॉ. एमएस राणावत सहित डॉ. सरोज गर्ग, डॉ. एसएल शर्मा, कुलपति प्रो. एसएस सारंगदेवोत, डॉ. हरीश शर्मा, डॉ. शशि चित्तौड़ा, डॉ. प्रकाश शर्मा सहित करीब 35 से अधिक सदस्य उपस्थित थे।
