अब एक ही छत के नीचे मिलेगी बस, मेट्रो, नमो भारत और पॉड टैक्सी की सुविधा ! जाने लोगों को क्या-क्या मिलेंगे फायदे ?

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अब एक ही छत के नीचे मिलेगी बस, मेट्रो, नमो भारत और पॉड टैक्सी की सुविधा ! जाने लोगों को क्या-क्या मिलेंगे फायदे ?

Udaipur Times, Noida International Airport : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों की शुरुआत के साथ जेवर अब हवाई कनेक्टिविटी के नक्शे पर मजबूती से उभर चुका है। अब एयरपोर्ट को जमीन पर भी तेज, सुविधाजनक और बहुस्तरीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। आने वाले समय में यहां पहुंचने वाले यात्रियों के लिए सड़क परिवहन के साथ मेट्रो, नमो भारत और हाईस्पीड रेल जैसे विकल्प भी विकसित किए जाने की योजना है। 

केंद्र और राज्य स्तर पर एयरपोर्ट को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन के एकीकृत मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी योजना का अहम हिस्सा एयरपोर्ट परिसर में प्रस्तावित ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (GTC) है, जहां अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच यात्रियों को कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की तैयारी है।

एयरपोर्ट के पहले चरण में सालाना करीब 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित की जा रही है। भविष्य के चरणों में इसकी क्षमता बढ़ाकर सात करोड़ से अधिक यात्री प्रतिवर्ष करने की योजना है। इतनी बड़ी यात्री क्षमता के लिए केवल टर्मिनल और रनवे का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि एयरपोर्ट तक आने-जाने के लिए तेज और भरोसेमंद जमीनी परिवहन नेटवर्क भी जरूरी होगा।

क्या है GTC और क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?

GTC यानी Ground Transportation Centre एयरपोर्ट पर अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच इंटरचेंज की सुविधा देने वाला केंद्र होगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को एक ही स्थान से बस, टैक्सी, निजी वाहन और भविष्य में आने वाली रेल व मेट्रो सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विमान से उतरने के बाद यात्रियों को दूसरे परिवहन साधन के लिए एयरपोर्ट परिसर से दूर जाने की जरूरत कम होगी। अलग-अलग माध्यमों को एक जगह जोड़ने से यात्रा का समय बचाने और एयरपोर्ट से शहरों तक कनेक्टिविटी को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

गाजियाबाद से जेवर तक पहुंचेगा नमो भारत

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर से जोड़ने की योजना भी महत्वपूर्ण है। करीब 72.44 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के जरिए गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को जेवर एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना है।

इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कॉरिडोर तैयार होने के बाद एनसीआर के प्रमुख हिस्सों से एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए तेज क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी का विकल्प मिल सकता है।

दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल से भी जुड़ सकता है एयरपोर्ट

जेवर एयरपोर्ट को दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है। इस प्रस्ताव के तहत एयरपोर्ट को हाईस्पीड रेल नेटवर्क के प्रमुख स्टेशनों में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

अगर यह कनेक्टिविटी जमीन पर उतरती है तो भविष्य में दिल्ली-एनसीआर के अलावा लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी एयरपोर्ट तक तेज रेल परिवहन का विकल्प मिल सकता है। इससे जेवर एयरपोर्ट का कनेक्टिविटी नेटवर्क और व्यापक होने की उम्मीद है।

ग्रेटर नोएडा से जेवर तक मेट्रो कनेक्टिविटी का आगाज

नॉलेज पार्क-2 से जेवर एयरपोर्ट तक मेट्रो लाइन की योजना भी एयरपोर्ट की मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का अहम हिस्सा है। इस रूट के लिए पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।

यह मेट्रो लाइन विकसित होने पर जेवर एयरपोर्ट को ग्रेटर नोएडा और आगे एनसीआर के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे स्थानीय यात्रियों के साथ कर्मचारियों और एयरपोर्ट से जुड़े कारोबारियों के लिए भी आवागमन आसान हो सकता है।

फिल्म सिटी से एयरपोर्ट तक पॉड टैक्सी का प्रस्ताव चर्चा में

यमुना क्षेत्र में विकसित हो रही फिल्म सिटी और जेवर एयरपोर्ट के बीच पॉड टैक्सी जैसी आधुनिक परिवहन व्यवस्था का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इसका उद्देश्य कम दूरी के सफर के लिए तेज और सुविधाजनक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

फिल्म सिटी, औद्योगिक क्षेत्रों, व्यावसायिक परियोजनाओं और एयरपोर्ट के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होने से इस पूरे क्षेत्र में लोगों की आवाजाही आसान हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति और संचालन समय संबंधित मंजूरियों एवं निर्माण कार्य पर निर्भर करेगा।

यात्रियों की संख्या बढ़ेगी तो कारोबार को भी मिलेगा फायदा

मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का फायदा केवल एयरपोर्ट से यात्रा करने वाले यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, एयरपोर्ट के आसपास होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, पार्किंग, रिटेल और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा एयरपोर्ट के आसपास कार्गो और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के विस्तार से वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई-चेन से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबारी गतिविधियों के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

यमुना क्षेत्र के औद्योगिक और कारोबारी प्रोजेक्ट्स को भी फायदा

यमुना क्षेत्र में विकसित किए जा रहे औद्योगिक सेक्टर, फिल्म सिटी और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भी बेहतर परिवहन नेटवर्क महत्वपूर्ण होगा। निवेशकों, कर्मचारियों, कारोबारियों और पर्यटकों की आवाजाही आसान होने पर आसपास के बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

एयरपोर्ट के आसपास बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने से जेवर और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की भूमिका केवल एयरपोर्ट सिटी तक सीमित न रहकर एक बड़े आर्थिक और परिवहन क्षेत्र के रूप में भी विकसित हो सकती है।

सिर्फ उड़ान नहीं, एयरपोर्ट तक पहुंचना भी होगा आसान

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ने के साथ यात्रियों के लिए सिर्फ उड़ानों की संख्या और गंतव्य महत्वपूर्ण नहीं होंगे। एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय, किराया और उपलब्ध परिवहन विकल्प भी यात्रियों के अनुभव को प्रभावित करेंगे। 

अगर दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिक शहरों से सीधे या कम इंटरचेंज वाली कनेक्टिविटी उपलब्ध होती है, तो जेवर एयरपोर्ट का कैचमेंट क्षेत्र और बड़ा हो सकता है। इससे ज्यादा संख्या में यात्री एयरपोर्ट को अपने लिए सुविधाजनक विकल्प के रूप में चुन सकते हैं।

जेवर एयरपोर्ट की अगली उड़ान सिर्फ रनवे से नहीं होगी

कुल मिलाकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास की तस्वीर केवल रनवे और टर्मिनल तक सीमित नहीं है। GTC, मेट्रो, नमो भारत, हाईस्पीड रेल, बस और अन्य क्षेत्रीय परिवहन साधनों को एक नेटवर्क में जोड़ने की योजना जेवर को भविष्य में बड़े मल्टी-मॉडल परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है। 

इसका असर यात्रियों की सुविधा से आगे बढ़कर कारोबार, निवेश, रोजगार, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट के साथ विकसित होने वाला यह जमीनी परिवहन नेटवर्क ही तय करेगा कि जेवर कितनी तेजी से एनसीआर के बड़े आर्थिक और परिवहन केंद्रों से जुड़ पाता है।

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