अब किसानों को मिलेगा महंगे डीजल से छुटकारा ! आ गया नया सोलर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, खेतों में चलते-चलते ऐसे होगा चार्ज ?

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अब किसानों को मिलेगा महंगे डीजल से छुटकारा ! आ गया नया सोलर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, खेतों में चलते-चलते ऐसे होगा चार्ज ?

Udaipur Times, New Delhi : खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर अब डीजल के अलावा बिजली और सौर ऊर्जा से भी चलने की दिशा में बढ़ रहे हैं। अमेरिका की क्लीन-एनर्जी कंपनी GoSun ने अपना नया Moonrider 27 इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पेश किया है। इसकी खासियत यह है कि इसमें रिमूवेबल सोलर पैनल लगाया जा सकता है, जिससे खेत में काम करते समय भी बैटरी को सूरज की रोशनी से चार्ज किया जा सकेगा।

कंपनी के मुताबिक, Moonrider 27 को छोटे खेतों, मॉडर्न फार्मिंग और होमस्टेडिंग जैसे कामों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ट्रैक्टर में इलेक्ट्रिक मोटर के साथ 24kWh की LFP बैटरी दी गई है। कंपनी का दावा है कि एक बार चार्ज होने पर यह करीब 5 घंटे तक काम कर सकता है।

खेत में काम करते समय कर सकते हो चार्जिंग

GoSun Moonrider की सबसे बड़ी खासियत इसका सोलर चार्जिंग सिस्टम है। इसमें हाई-एफिशिएंसी फोल्ड-आउट सोलर पैनल का विकल्प मिलता है। कंपनी के अनुसार, यह पैनल ट्रैक्टर के काम करने या खड़े रहने के दौरान सूरज की रोशनी से बैटरी को चार्ज करने में मदद करता है।

सोलर पैनल रिमूवेबल है, यानी जरूरत के हिसाब से इसे अलग किया जा सकता है और ट्रैक्टर की छत पर भी रखा जा सकता है। इसमें 1,100 वॉट का ऑप्शनल सोलर चार्जर उपलब्ध है।

27 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर करेगा काम

Moonrider 27 में हाई-टॉर्क इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन दिया गया है। इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से पावर तुरंत मिलती है, जिससे ट्रैक्टर भारी सामान खींचने, जुताई, घास काटने और खराब रास्तों पर काम करने में सक्षम होता है।

इसमें फोर-व्हील ड्राइव सिस्टम दिया गया है। ट्रैक्टर में 9 फॉरवर्ड और 3 रिवर्स स्पीड का विकल्प मिलता है। इसका वजन करीब 1,095 किलोग्राम और ग्राउंड क्लीयरेंस 270 मिलीमीटर है।

2.5 घंटे में 80 फीसदी चार्ज

ट्रैक्टर में लगी 24kWh LFP बैटरी को 220V AC चार्जर से 0 से 80 फीसदी तक करीब 2.5 घंटे में चार्ज किया जा सकता है। इसके अलावा सोलर चार्जिंग सिस्टम अतिरिक्त रन टाइम देने में मदद करता है।

कंपनी का दावा है कि इलेक्ट्रिक मोटर में पारंपरिक डीजल इंजन की तुलना में कम मूवेबल पार्ट्स होते हैं। इससे नियमित सर्विस और मेंटेनेंस की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही डीजल ईंधन पर होने वाला खर्च भी बच सकता है।

शोर और धुएं से भी मिलेगी राहत 

डीजल ट्रैक्टरों की तुलना में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर काफी कम शोर करता है और इससे सीधे तौर पर धुआं नहीं निकलता। इससे खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए शांत वातावरण मिलने के साथ प्रदूषण कम करने में भी मदद मिल सकती है।

GoSun का कहना है कि Moonrider 27 को कम रनिंग कॉस्ट और कम मेंटेनेंस वाले विकल्प के तौर पर विकसित किया गया है।

मोबाइल पावर हब की तरह भी होगा इस्तेमाल

Moonrider 27 को सिर्फ खेती के काम तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें ऑफ-ग्रिड ऑक्जिलरी पावर आउटलेट और ऑप्शनल पावर जनरेटर की सुविधा भी दी गई है।

इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक टूल्स, पानी के पंप और जरूरत पड़ने पर दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलाने के लिए किया जा सकता है। यानी खेत में बिजली उपलब्ध न होने की स्थिति में ट्रैक्टर की बैटरी अतिरिक्त पावर सोर्स का काम भी कर सकती है।

GPS और स्मार्ट फीचर्स भी मौजूद

ट्रैक्टर में जियो-फेंसिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और GPS नेविगेशन जैसे स्मार्ट फीचर्स भी दिए गए हैं। करीब 1.4 मीटर के टर्निंग रेडियस के कारण इसे छोटे खेतों और सीमित जगहों में भी आसानी से मोड़ने का दावा किया गया है।
Moonrider 27 की प्रमुख खूबियां
पावर: 27 हॉर्सपावर

बैटरी: 24kWh LFP

ड्राइव: फोर-व्हील ड्राइव

रन टाइम: करीब 5 घंटे

सोलर चार्जर: 1,100 वॉट तक

चार्जिंग: 220V AC से करीब 2.5 घंटे में 80% तक

वजन: करीब 1,095 किलोग्राम

ग्राउंड क्लीयरेंस: 270 मिमी

स्मार्ट फीचर्स: GPS, जियो-फेंसिंग और मोबाइल कनेक्टिविटी

कीमत करीब 19 लाख रुपये रखी  गयी

GoSun ने Moonrider 27 की शुरुआती कीमत 19,995 डॉलर रखी है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 19 लाख रुपये के आसपास बैठती है। हालांकि भारतीय बाजार में इसकी कीमत और उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है।

कंपनी ने अमेरिकी बाजार के लिए इसकी बुकिंग शुरू कर दी है। ग्राहक शुरुआती बुकिंग के लिए 50 डॉलर का भुगतान कर सकते हैं। GoSun के मुताबिक, ट्रैक्टर की बिक्री अगले साल से शुरू होने की उम्मीद है।

फिलहाल यह ट्रैक्टर अमेरिका के बाजार को ध्यान में रखकर पेश किया गया है। अगर भविष्य में ऐसी तकनीक भारत जैसे बड़े कृषि बाजार में पहुंचती है, तो छोटे किसानों के लिए डीजल पर निर्भरता कम करने और खेती की लागत घटाने की दिशा में यह एक दिलचस्प विकल्प साबित हो सकता है।

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