अब इंतकाल प्रिंट में खसरा नहीं केवल खेवट ही दिखेगी, एसोसिएशन से वार्ता के बाद निदेशालय की पहल
Udaipur Times, Chandigarh News : राजस्व विभाग से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। पटवार व कानूनगो एसोसिएशन के साथ हुई वार्ता के बाद भू-अभिलेख निदेशालय ने कुछ बिंदुओं पर सुधार की शुरुआत की है।
अभी इंतकाल की रिपोर्ट में खसरे के अनुसार कई पेज के प्रिंट आने से लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। अब समाधान के लिए निदेशालय ने निर्णय लिया है कि खसरे के बजाय खेवट में रिपोर्ट आएगी।
भू-अभिलेख निदेशालय के निदेशक डॉ. यशपाल की मौजूदगी में पटवारी एसोसिएशन के साथ वीरवार को बैठक हुई थी। इसमें एसोसिएशन के प्रधान जयबीर चहल और राज्य महासचिव सन्नी दहिया ने साक्ष्यों के साथ इंतकाल की रिपोर्ट खसरे में आने से लोगों को होने वाली परेशानी को बताया था।
एसोसिएशन का तर्क था कि खेवट में दो पेज में काम हो जाता है मगर खसरे के अनुसार जितनी जमीन के किले बढ़ते जाएंगे उतने ही पेज बढ़ेंगे। इन पेजों की संख्या 20, 50 से लेकर 200 पेज से भी अधिक हो सकती है। ऐसे में प्रति पेज 25 रुपये शुल्क का बोझ बढ़ रहा था।
निदेशालय ने स्पष्ट किया कि इंतकाल की प्रति में खसरे का विभाजन न होने पर अब केवल खेवट ही प्रदर्शित होगी। इसी तरह से निदेशालय ने बताया कि राजस्व विभाग के पोर्टल में डेटा अंतरण पूरी तरह सही है। यदि डेटा अंतरण के बाद किसी इंतकाल के कारण कोई विसंगति आती है तो उसकी जिम्मेदारी निदेशालय की होगी। ऐसे इंतकालों को आवश्यकतानुसार वापस लिया या सुधारा जा सकता है।
बैठक में स्पष्ट किया कि इंतकाल के लिए आधार अनिवार्य नहीं है, खासकर व्यक्तिगत, एकतरफा और मृत्यु से संबंधित मामलों को लेकर। निदेशालय ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर इनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। खसरा गिरदावरी में सुधार और भूमि प्रकार परिवर्तन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।