अब बिना भट्टे रेगिस्तान की रेत से तैयार होंगी मजबूत ईंटें, जानिए इनकी खासियत ?
Udaipur Times, Strong bricks : UAE अपनी रेगिस्तानी रेत का कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल करने का एक नया तरीका खोज रहा है। रिसर्चर ऐसी ईंटें बना रहे हैं जो बिना ज़्यादा गर्म किए ही मज़बूत हो सकती हैं। शारजाह यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने UAE की रेगिस्तानी रेत और अल्कली-एक्टिवेटेड बाइंडर्स का इस्तेमाल करके ईंटें बनाई हैं।
ये ईंटें आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले पोर्टलैंड सीमेंट-बेस्ड कंस्ट्रक्शन मटीरियल का एक संभावित विकल्प हो सकती हैं। 'जर्नल ऑफ़ मटीरियल्स इन सिविल इंजीनियरिंग' में छपी इस रिसर्च में यह देखा गया कि क्या कंस्ट्रक्शन के लिए ज़रूरी मज़बूती और टिकाऊपन को बनाए रखते हुए रेगिस्तानी रेत को ईंटों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
रेगिस्तान की रेत से बनीं कंस्ट्रक्शन ईंटें
UAE में रेगिस्तान की रेत बहुत ज़्यादा मात्रा में मिलती है, लेकिन इसके बारीक कणों की वजह से पारंपरिक कंक्रीट और कंस्ट्रक्शन में इसके इस्तेमाल की कुछ सीमाएं हैं। इसलिए, रिसर्चर्स ने रेत को अल्कली-एक्टिवेटेड बाइंडर सिस्टम के साथ मिलाकर एक अलग तरीका आजमाया। ये बाइंडर फ्लाई ऐश और ग्राउंड ग्रेन्युलेटेड ब्लास्ट-फर्नेस स्लैग जैसे इंडस्ट्रियल बाय-प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे साधारण पोर्टलैंड सीमेंट पर निर्भरता कम हो जाती है। तैयार मटीरियल की मैकेनिकल मजबूती, पानी सोखने की क्षमता और टिकाऊपन जैसी खूबियों की जांच की गई।
एक खास बात यह पता चली कि ईंटों को सामान्य तापमान पर ही तैयार (क्योर) किया जा सकता है, यानी उन्हें सख्त होने के लिए अतिरिक्त गर्मी की ज़रूरत नहीं होती।
यह कंस्ट्रक्शन मटीरियल बनाने में लगने वाली ऊर्जा की ज़रूरत को कम करने के लिए अहम हो सकता है, खासकर उन प्रक्रियाओं की तुलना में जिनमें ज़्यादा तापमान की जरूरत होती है।
बिना भट्टे की तैयार होती है ये ईंटें
इस तकनीक से बनी ईंटों की एक खास बात यह है कि इन्हें सख्त होने के लिए भट्ठी या किसी हीटिंग प्रोसेस की ज़रूरत नहीं होती; ये कमरे के तापमान पर ही पूरी तरह सूखकर मज़बूत हो जाती हैं। इससे ईंट बनाने में आमतौर पर लगने वाली ऊर्जा और ईंधन की काफ़ी बचत होती है, साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होता।