अब कूलर देगा AC जैसी ठंडी-ठंडी हवा ! इन ट्रिक्स का इस्तेमाल कर आप भी कर सकते है गर्म हवा और उमस की छुट्टी

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अब कूलर देगा AC जैसी ठंडी-ठंडी हवा ! इन ट्रिक्स का इस्तेमाल कर आप भी कर सकते है गर्म हवा और उमस की छुट्टी 

Udaipur Times, How To Get Rid Of Humidity Due To Cooler : देश के अधिकांश राज्यों में अब मानसून ने दस्तक दे दी है। इस मौसम में बढ़ी हुई गर्मी से थोड़ी निजात तो मिल जाती है लेकिन इस मौसम में नमी बढ़ जाती है और साथ ही उमस भी। ऐसे मौसम में आमतौर पर लोगों की शिकायत होती है कि उनका कूलर ठंडी हवा नहीं दे रहा है। अगर सही तरीके से इस्तेमाल और नियमित रखरखाव के जरिए एयर कूलर मानसून में भी बेहतर कूलिंग दे सकता है। 

एयर कूलर की कार्यप्रणाली वाष्पीकरण (इवेपोरेटिव कूलिंग) पर आधारित होती है। इसमें गर्म हवा पानी से भीगे कूलिंग पैड से गुजरती है और ठंडी होकर कमरे में पहुंचती है। लेकिन बारिश के मौसम में हवा में पहले से ही नमी अधिक होती है, जिससे वाष्पीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और कूलर की क्षमता प्रभावित होती है। कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। आइए जानते हैं- 

वेंटिलेशन सबसे जरूरी

मानसून के दौरान एयर कूलर चलाते समय कमरे में उचित वेंटिलेशन होना बेहद जरूरी है। अगर कमरा पूरी तरह बंद रहेगा तो उसमें नमी बढ़ती जाएगी और कूलर की ठंडक कम महसूस होगी। इसलिए कूलर चलाते समय खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला रखना चाहिए, ताकि ताजी हवा का प्रवाह बना रहे और कमरे की अतिरिक्त नमी बाहर निकल सके। इसके अलावा कमरे में क्रॉस वेंटिलेशन होने से कूलिंग बेहतर होती है।

नियमित सफाई से बढ़ेगी कूलिंग

बारिश के मौसम में कूलर के पानी की टंकी और कूलिंग पैड में फफूंदी, बैक्टीरिया और काई जमने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न केवल कूलिंग प्रभावित होती है, बल्कि दुर्गंध की समस्या भी पैदा हो सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सप्ताह में कम से कम एक बार कूलिंग पैड और पानी की टंकी की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। यदि कूलिंग पैड खराब हो गए हों, तो उन्हें बदल देना चाहिए।

ताजा और ठंडे पानी का करें इस्तेमाल

कूलर में लंबे समय तक रखा पानी बैक्टीरिया पैदा कर सकता है। इसलिए रोजाना ताजा पानी भरना बेहतर माना जाता है। इसके अलावा ठंडे पानी या बर्फ का इस्तेमाल करने से कूलिंग और बेहतर हो सकती है। कई आधुनिक कूलरों में इसके लिए अलग आइस चैंबर भी दिया जाता है।

डीह्यूमिडिफायर और पंखे का लें सहारा

जिन क्षेत्रों में नमी बहुत अधिक रहती है, वहां कूलर के साथ डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। यह हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को कम करता है, जिससे कूलर अधिक प्रभावी तरीके से काम करता है। इसके अलावा कूलर के साथ सीलिंग फैन चलाने से कमरे में ठंडी हवा तेजी से फैलती है और उमस कम महसूस होती है।

सही फैन स्पीड का करें इस्तेमाल

मानसून के दौरान जरूरत के अनुसार कूलर की फैन स्पीड बदलते रहना चाहिए। अधिक नमी होने पर तेज स्पीड से हवा का प्रवाह बढ़ता है और कूलिंग बेहतर महसूस होती है।

बिजली की बचत में भी फायदेमंद

एयर कूलर एयर कंडीशनर की तुलना में काफी कम बिजली खर्च करते हैं। यही वजह है कि मानसून में भी यह एक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बने रहते हैं।

मानसून में एयर कूलर चलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

बंद कमरे में कूलर न चलाएं।

खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला रखें।

पानी की टंकी और कूलिंग पैड की नियमित सफाई करें।

ताजा और साफ पानी का इस्तेमाल करें।

जरूरत पड़ने पर बर्फ का इस्तेमाल करें।

सीलिंग फैन या डीह्यूमिडिफायर का सहारा लें।

समय-समय पर कूलर की सर्विस कराते रहें।

थोड़ी सावधानी और सही रखरखाव से मानसून के दौरान भी एयर कूलर प्रभावी ढंग से काम कर सकता है और उमस भरे मौसम में घर को ठंडा और आरामदायक बनाए रख सकता है।

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