अब विदेशों तक पहुंचेगा दुकान और फैक्ट्री में बना माल ! जाने सरकार के नए प्लान का कैसे उठाएं लाभ ?
Udaipur Times, New Delhi : उत्तर प्रदेश में कारोबार करने वाले छोटे और मझोले उद्यमियों के लिए विदेश में अपने उत्पाद बेचने का रास्ता आसान बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार की ओर से ‘यूपी निर्यात वृद्धि अभियान’ (UP Niryat Vriddhi Abhiyaan) शुरू किया गया है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के ऐसे कारोबारियों और MSME को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करना है, जो अपने उत्पादों को विदेशों तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन एक्सपोर्ट की प्रक्रिया, विदेशी खरीदारों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री को लेकर पूरी जानकारी नहीं रखते।
सरकारी पोर्टल के मुताबिक इस अभियान के जरिए 1000 से ज्यादा MSME को वैश्विक बाजार के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में कारोबारियों को सिर्फ निर्यात से जुड़ी सामान्य जानकारी देने के बजाय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप तैयार करने, उसकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग सुधारने, डिजिटल माध्यमों से बिक्री बढ़ाने और विदेशी खरीदारों से संपर्क स्थापित करने जैसी चीजों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
जाने किन कारोबारियों को मिलेगा फायदा?
फिलहाल इस कार्यक्रम के लिए उत्तर प्रदेश के होम डेकोर, हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े निर्माता और उत्पादक पात्र बताए गए हैं। यानी इन क्षेत्रों में काम करने वाले ऐसे कारोबारी जो अपने उत्पाद को विदेशों में बेचने की तैयारी कर रहे हैं, इस पहल का हिस्सा बन सकते हैं।
इसके लिए कारोबारी के पास उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इसके अलावा सालाना कारोबार कम से कम 50 लाख रुपये होना चाहिए। कारोबार कम से कम 3 साल से संचालित होना भी जरूरी है। साथ ही संबंधित उत्पाद ऐसा होना चाहिए जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक्सपोर्ट किया जा सके।
एक्सपोर्ट शुरू करने से पहले मिलेगी तैयारी की पूरी जानकारी
कई छोटे कारोबारी अपने उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन के मामले में मजबूत होते हैं, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश करने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती। इसी समस्या को दूर करने के लिए यूपी निर्यात वृद्धि अभियान के तहत कारोबारियों को एक्सपोर्ट से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी देने पर जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों की मदद और व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे कारोबारी यह समझ सकेंगे कि किसी विदेशी बाजार में अपने उत्पाद को किस तरह पेश करना है, किन मानकों और जरूरतों का ध्यान रखना है और विदेशी ग्राहकों तक कैसे पहुंच बनाई जा सकती है।
पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी होगा अब पूरा फोकस
विदेशी बाजार में सिर्फ अच्छा उत्पाद होना ही पर्याप्त नहीं है। उत्पाद की पैकेजिंग, उसकी प्रस्तुति और ब्रांड की पहचान भी खरीदार के फैसले को प्रभावित करती है। इसी वजह से अभियान में क्वालिटी, पैकेजिंग और ब्रांडिंग को बेहतर बनाने पर भी काम किया जाएगा।
कारोबारियों को पेशेवर उत्पाद कैटलॉग तैयार करने और अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने में मदद दी जाएगी। इससे छोटे कारोबारियों को अपने स्थानीय या घरेलू उत्पादों को ग्लोबल मार्केट के हिसाब से तैयार करने में सहायता मिल सकती है।
ऑनलाइन बिक्री के जरिए विदेशों तक होगी पहुंच
डिजिटल कॉमर्स आज विदेशी बाजार तक पहुंच बनाने का बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में इस अभियान में B2C और D2C ई-कॉमर्स के जरिए सीधे ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाने की जानकारी भी दी जाएगी।
कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन मार्केटप्लेस और डिजिटल बिक्री के तरीकों को समझने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य यह है कि छोटे और मझोले कारोबारी सिर्फ पारंपरिक माध्यमों पर निर्भर न रहें, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी विदेशी ग्राहकों तक पहुंच बना सकें।
विदेशी खरीदारों से सीधे जुड़ने का मिलेगा मौका
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से संपर्क स्थापित करना भी है। कार्यक्रम के जरिए कारोबारियों को B2B अवसरों की तलाश करने और संभावित विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाने में सहायता दी जाएगी।
इसका मतलब यह है कि अभियान सिर्फ एक्सपोर्ट के नियम-कायदे समझाने तक सीमित नहीं रहेगा। कोशिश यह होगी कि पात्र कारोबारी वास्तविक अंतरराष्ट्रीय कारोबारी अवसर तलाश सकें और अपने उत्पादों के लिए विदेशी बाजार तैयार कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने में भी मिलेगी मदद
विदेशी बाजार में अपने उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में हिस्सा लेना भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पहल के तहत कारोबारियों को ऐसी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए उपलब्ध सहायता और संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
इसके साथ ही पहली बार निर्यात करने वाले कारोबारियों को उपलब्ध सरकारी सहायता और एक्सपोर्ट से जुड़ी सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे ऐसे कारोबारी, जो पहली बार विदेशी बाजार में प्रवेश करना चाहते हैं, उनके लिए शुरुआती प्रक्रिया कुछ आसान हो सकती है।
1000 से ज्यादा MSME को ग्लोबल मार्केट के लिए तैयार करने का लक्ष्य
यूपी निर्यात वृद्धि अभियान का बड़ा लक्ष्य प्रदेश के 1000 से ज्यादा MSME को एक्सपोर्ट के लिए तैयार करना है। सरकार का फोकस खास तौर पर छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर है।
इस पहल में डिजिटल टूल्स और ई-कॉमर्स के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश के बाहर नए ग्राहक और नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोई फीस निर्धारित नहीं
कारोबारियों के लिए इस कार्यक्रम की एक खास बात यह है कि प्रवेश निशुल्क रखा गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि आवेदन करने वाले हर कारोबारी का चयन अपने आप हो जाएगा। सरकारी पोर्टल के अनुसार कार्यक्रम में चयन के आधार पर नामांकन किया जाएगा।
इसलिए इच्छुक कारोबारियों को पात्रता शर्तों को ध्यान से जांचने और आवेदन से पहले जरूरी दस्तावेज तैयार रखने की जरूरत होगी।
छोटे कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में MSME, हस्तशिल्प, हथकरघा और छोटे विनिर्माण कारोबार हैं। इनमें से कई कारोबारी अपने उत्पादों को स्थानीय और राष्ट्रीय बाजार में बेचते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
एक्सपोर्ट के लिए बाजार की मांग समझना, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना, पैकेजिंग बदलना, विदेशी खरीदारों से संपर्क करना, डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की प्रक्रिया समझना जरूरी होता है। यूपी निर्यात वृद्धि अभियान इसी पूरी प्रक्रिया में कारोबारियों को तैयार करने पर केंद्रित है।
जाने कैसे उठा सकते है स्किम का पूरा फायदा ?
अगर उत्तर प्रदेश में कोई पात्र कारोबारी होम डेकोर, हस्तशिल्प या हथकरघा क्षेत्र में काम करता है और अपने उत्पाद को विदेश में बेचने की योजना बना रहा है, तो यह अभियान उसके लिए उपयोगी हो सकता है। कार्यक्रम के जरिए उसे एक्सपोर्ट से जुड़ी जानकारी, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, उत्पाद की ब्रांडिंग और पैकेजिंग सुधारने की सलाह, डिजिटल बिक्री की ट्रेनिंग और विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाने के अवसर मिल सकते हैं।
इस तरह सरकार का उद्देश्य सिर्फ कारोबारियों को एक्सपोर्ट का लाइसेंस या प्रक्रिया समझाना नहीं, बल्कि उन्हें स्थानीय कारोबारी से ग्लोबल एक्सपोर्टर बनाने की दिशा में तैयार करना है। पात्र MSME के लिए यह पहल नए बाजार तलाशने और कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाने का एक अवसर बन सकती है।