अब हवा से भी तेज होगा सफर ! दिल्ली से लखनऊ के लिए 7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का हुआ ऐलान
Udaipur Times, Delhi-Lucknow bullet train : केंद्र सरकार ने देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने के लिए 7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बड़े शहरों के बीच तेज, आधुनिक और विश्वस्तरीय रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सबसे चर्चित प्रोजेक्ट दिल्ली-लखनऊ बुलेट ट्रेन कॉरिडोर है, जो दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का हिस्सा होगा।
दिल्ली-लखनऊ बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट क्या है?
यह प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश के 14 प्रमुख शहरों से जोड़ने की योजना का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यात्रा समय में भारी कमी आएगी। दिल्ली से लखनऊ की यात्रा केवल 2 घंटे में पूरी होगी, दिल्ली से प्रयागराज तक का सफर लगभग 48 मिनट में होगा और दिल्ली से वाराणसी की दूरी लगभग 4 घंटे में तय की जा सकेगी।
320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
यह बुलेट ट्रेन परियोजना जापान की शिंकानसेन (Shinkansen) तकनीक पर आधारित होगी। प्रस्तावित ट्रेन की स्पीड लगभग 320 किमी प्रति घंटा (operational speed) और अधिकतम स्पीड 350 किमी प्रति घंटा तक होगी।
देश में मंजूर किए गए 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सरकार ने जिन प्रमुख बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है वे हैं मुंबई-अहमदाबाद, मुंबई- पुणे, बेंगलुरु- चेन्नई, बेंगलुरु- हैदराबाद, पुणे- हैदराबाद, दिल्ली- लखनऊ, दिल्ली- वाराणसी, दिल्ली- सिलीगुड़ी। इन परियोजनाओं से देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन कब चलेगी?
भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलाई जाएगी। इस परियोजना का संचालन नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा किया जा रहा है। इस रूट पर ट्रायल रन के बाद वर्ष 2027 तक संचालन शुरू होने की संभावना जताई गई है।
जापान की तकनीक और मेक इन इंडिया मॉडल
यह पूरा प्रोजेक्ट जापान की एडवांस्ड शिंकानसेन तकनीक पर आधारित है, जिसमें आधुनिक ट्रेन सिस्टम, सिग्नलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। साथ ही इसमें तकनीक हस्तांतरण के जरिए भारत में मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस परियोजना के बाद देश में रेल यात्रा न केवल तेज होगी, बल्कि वैश्विक स्तर की सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी।
