अब तेज धूप में भी छत रहेगी एकदम कूल-कूल, वैज्ञानिकों ने तैयार की नई तकनीक, जाने कैसे करेगी काम ?

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अब तेज धूप में भी छत रहेगी एकदम कूल-कूल, वैज्ञानिकों ने तैयार ये नई तकनीक, जाने कैसे करेगी काम ?

Udaipur Times, Passive Daytime Radiative Cooling : गर्मियों में घर की छतें सूरज की तेज गर्मी से तपने लगती हैं, जिसका सीधा असर कमरे के तापमान और AC की बिजली खपत पर पड़ता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसी खास कोटिंग तैयार की है, जो तेज धूप में भी छत को आसपास के तापमान से करीब 22 डिग्री तक ठंडा रखने में मदद कर सकती है। खास बात यह है कि इसके लिए बिजली या किसी मशीन की जरूरत नहीं होती।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के रिसर्चर्स ने इस खास कूलिंग कोटिंग को विकसित किया है। इसे छत पर फिल्म या कोटिंग की तरह लगाया जा सकता है। रिसर्च के मुताबिक, यह तकनीक सूरज की रोशनी का बड़ा हिस्सा वापस रिफ्लेक्ट कर देती है और छत द्वारा सोखी गई गर्मी को बाहर निकालने में मदद करती है। इससे इमारत के अंदर गर्मी का असर कम हो सकता है और AC पर निर्भरता भी घट सकती है।

क्या है पैसिव डेटाइम रेडिएटिव कूलिंग?

इस तकनीक को Passive Daytime Radiative Cooling कहा जाता है। इसमें ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जो सूर्य की रोशनी को अधिक मात्रा में परावर्तित करती है और अपनी गर्मी को इन्फ्रारेड रेडिएशन के जरिए अंतरिक्ष की ओर भेजती है।

रिसर्च के अनुसार, खास पोरस पॉलीमर फिल्म सूरज की करीब 96 फीसदी रोशनी को रिफ्लेक्ट कर सकती है। इसके कारण सतह कम गर्म होती है और आसपास के वातावरण की तुलना में काफी ठंडी रह सकती है।

22 डिग्री तक ठंडी हो सकती है छत

इस तकनीक का फील्ड टेस्ट अमेरिका के ह्यूस्टन में किया गया। टेस्ट के दौरान इस कोटिंग वाली छत का तापमान आसपास के तापमान से करीब 22 डिग्री तक कम पाया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की तकनीक गर्म इलाकों में इमारतों को ठंडा रखने और AC की बिजली खपत कम करने में मददगार हो सकती है।

धूल और गंदगी से भी नहीं होगी जल्दी खराब

ऐसी कोटिंग के सामने एक बड़ी चुनौती धूल, गंदगी और अन्य कणों का सतह पर जमा होना है। इससे इसकी कूलिंग क्षमता कम हो सकती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए रिसर्चर्स ने सेल्फ-क्लीनिंग कंपोजिट पर भी काम किया है, जिससे सतह पर गंदगी कम टिके और कोटिंग लंबे समय तक प्रभावी बनी रहे।

मेटल की छतों के लिए ज्यादा असरदार

यह तकनीक अलग-अलग तरह की छतों पर इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन शुरुआती परीक्षणों में मेटल रूफ पर इसका असर खास तौर पर देखने को मिला है। अगर इसे बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो गर्मियों में AC की जरूरत कम करने के साथ बिजली की खपत और इमारतों से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी को भी कम किया जा सकता है।

हालांकि, इस तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले इसकी लागत, टिकाऊपन और अलग-अलग मौसम में लंबे समय तक प्रदर्शन जैसी चुनौतियों पर काम करना बाकी है। इसके बावजूद, बढ़ती गर्मी और बिजली की मांग के बीच ऐसी पैसिव कूलिंग तकनीक भविष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकती है। आने वाले समय मैं पर्यावरणीय समस्याओं के लिये इस प्रकार की तकनीक काफी लाभदायक हो सकती है।

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